समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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शख्सियत

झारखंड आंदोलनकारी दादा उम्मीदलाल गोप एक अच्छे कलाकार भी थे

द्वितीय स्मृति दिवस झारखंड आंदोलनकारी दादा उम्मीदलाल गोप का जन्म 03 फरवरी 1971 को हेसालौंग, डाड़ी, हजारीबाग में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ...
कविता

सुधीर सुमन की प्रेम कविताएँ अकेलेपन से संवाद हैं

समकालीन जनमत
राजेश कमल सुधीर सुमन हमारे समय के उन महत्त्वपूर्ण कवियों में हैं, जिनकी उपस्थिति गहरी है, पर जिनका प्रॉपर रेखांकन अब तक नहीं हुआ ।...
कविता

सुरेश जिनागल की कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की तरह हैं

समकालीन जनमत
अरुण आदित्य सुरेश जिनागल गहन मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकारों वाले कवि हैं। उनकी ये कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की...
ख़बरजनमत

आइसा का 26 वाँ इकाई सम्मेलन सम्पन्न

समकालीन जनमत
  आइसा का 26 वाँ इकाई सम्मेलन सम्पन्न हुआ। 85 सदस्यों की परिषद चुनी गई जिसने सोनाली को अध्यक्ष और भानु को सचिव चुना। चुनी...
जनमत

सिसकता लेह

समकालीन जनमत
लद्दाख को राज्य का दर्ज़ा देने और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के फलस्वरूप उपजी हिंसा और पुलिसिया बर्बरता के बाद लेह...
जनमत

द्योलीडांडा शिल्पकार सम्मेलन(शताब्दी समारोह)

समकालीन जनमत
हेमन्त कुमार  आज से ठीक सौ साल पहले अपने मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्षरत दलित समुदाय के अग्रणी नेता राय बहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा...
कविता

पल्लवी की कविताएँ संवेदना की परिपक्व भाव-भूमि पर रची गई हैं।

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता पल्लवी की कविता स्त्री-स्वातंत्र्य, विद्रोह और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को रूपक और प्रतीकों के माध्यम से बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत...
कविता

मानसी मिश्र की कविताएँ जन विरोधी व्यवस्था वाली दुनिया में एक स्त्री नागरिक का अधिकारपूर्ण दखल हैं।

समकालीन जनमत
एकता वर्मा मानसी संभावनाओं की कवयित्री हैं। इनकी कविताओं में युवा हृदय की उत्तेजनाएँ हैं। उनकी कविताएँ एक आधुनिक हुई, शिक्षित, शहरीकृत हुई कामगार महिला...
कविता

सुमन कुमार सिंह की कविताएँ वंचित तबकों का यथार्थ बयान करती हैं

अवंतिका सिंह सुमन कुमार सिंह की कविताएँ समकालीन भारतीय समाज का दर्पण हैं। इन कविताओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विडंबनाओं, आम आदमी की...
जनमत

अखबार में आ जाएगा

समकालीन जनमत
दिनेश अस्थाना    राहत इंदौरी साहब का एक मशहूर शेर है:- बन के इक हादसा बाज़ार में आ जाएगा                                         जो नहीं होगा...
कवितास्मृति

इज़ाडोरा डंकन को उनकी पुण्यतिथि पर के. मंजरी श्रीवास्तव की काव्यात्मक श्रद्धांजलि

समकालीन जनमत
विश्व के महान व्यक्तित्वों (ख़लील जिब्रान, ग़ालिब, मीर, रूमी, इक़बाल, पाब्लो नेरुदा, इज़ाडोरा) के जीवन और विचारों को भारत के समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्थापित करते...
कविता

संतोष पटेल की कविताएँ मानवीय संघर्ष और अस्मिता के विस्तार तक ले जाती हैं

समकालीन जनमत
नीलाम्बुज सरोज संतोष पटेल की कविताएँ हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हैं। उनका कविता संग्रह ‘कारक के चिह्न’ केवल साहित्यिक सौंदर्य का उत्सव नहीं, बल्कि...
जनमत

पंचायत: एपिसोडिक शो से गंभीर ड्रामा तक

महेश सिंह भारतीय सिनेमा के विशाल परिदृश्य में अक्सर अपराध, हिंसा और ग्लैमर वाली फिल्मों का ही बोलबाला रहा है, लेकिन अमेज़ॅन प्राइम वीडियो पर...
कविता

गौरव सिंह की कविताएँ नेपथ्य में खो गए जीवन-रागों को आवाज़ देती हैं

समकालीन जनमत
प्रो. रामेश्वर राय कविता समय से तटस्थ नहीं होती, लेकिन समय के साथ उसका रिश्ता इतिहास और सूचना-तंत्र से भिन्न होता है। कविता में दर्ज़...
पुस्तक

स्मिता सिन्हा के कविता संग्रह ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
जावेद आलम ख़ान छलकती पीड़ा को रोककर बेआवाज़ प्रार्थना है ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’। स्मिता सिन्हा का यह संग्रह अपने नाम को सार्थक करता है।...
कविता

रत्नेश कुमार की कविताएँ सामाजिक सरोकारों और मानव मूल्यों का यथार्थ चित्रण हैं

रौशन कुमार रत्नेश की कविताएँ मानव जीवन में होने वाली उथल-पुथल समेत समकालीन वक्त की समस्याओं एवं चुनौतियों को ज़रूरी ढंग से रेखांकित करतीं हैं।...
जनमत

एनसीईआरटी की ‘विभाजन विभीषिका’ अंग्रेज शासकों-हिंदू महासभा-आरएसएस के अपराधों पर पर्दा डालने की बेशर्म कोशिश

समकालीन जनमत
शम्सुल इस्लाम    शिक्षा से जुड़ी एक प्रचलित कहावत है कि अगर किसी अयोग्य व्यक्ति को शिक्षक नियुक्त किया जाता है, तो छात्रों की कई...
जनमत

‘संयुक्त-चुनाव विधेयक चुनाव आयोग को खुला खेल करने की छूट दे देता है’’

समकालीन जनमत
भारत के पूर्व मुख्य-न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इस विधेयक की समीक्षा से सम्बन्धित संसदीय-समिति को अपने विचारों से अवगत कराया : उनका कहना है कि...
जनमतज़ेर-ए-बहस

लाल किले से आरएसएस को वैधता या लोकतंत्र विरोधी प्रतिक्रांति की घोषणा

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण    आजाद लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष भारत स्वतंत्रता का 78 वां वर्ष पूरा करते-करते अपने प्रतिलोम में बदल गया है। 15 अगस्त को लाल किले...
पुस्तक

उषा राय के कविता संग्रह ‘भीमा कोरेगाँव तथा अन्य कविताएँ’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण ●यह कास का फूल है इसके पत्ते हाथ चीर देते हैं घाव भले ही भर जाये पर कसक रह जाती है बड़ा खुद्दार...
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