समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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सिनेमा

‘लापता लेडीज़’ स्त्री विमर्श पर बनी हुई एक सशक्त फ़िल्म है।

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प्रतिमा राज ‘लापता लेडीज़’ ये फ़िल्म देखिए और दिखाइए। यह स्त्री विमर्श पर बनी हुई एक सशक्त फ़िल्म है। ये फ़िल्म लेखक बिप्ल्व गोस्वामी की...
जनमत

बजट 2024- नागरिक के जेब को काटकर कॉर्पोरेट की झोली भरने  की कवायद

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जयप्रकाश नारायण  संघ  की संस्कृति में दीक्षित भाजपा सरकार में वित्त मंत्री कर्ण प्रिय शब्दों के मकड़जाल के साथ 2024 का बजट पेश करते हुए ...
कविता

हिमांशु जमदग्नि की कविताएँ जीवन के विस्तृत आयामों को स्पर्श करती हैं।

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देवेश पथ सारिया युवा कवि हिमांशु जमदग्नि एक गाँव से आते हैं और एक महानगर में पढ़ाई करते हैं। उनकी कविताओं का फलक कम उम्र...
जनमत

अरुन्धती राॅय: एक आवाज़ जिसे दबाना नामुमकिन है

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जिया उस-सलाम वह अदीब जिसके नज़दीक अहम जंगें अदबी महफिलों में नहीं ज़िन्दगी के कूचों में लड़ी जाती हैं। अरुन्धती राॅय को सुनने का मतलब...
कविता

मधु सक्सेना की कविताएँ प्रतिकूलता का डटकर सामना करती हैं।

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ख़ुदेजा ख़ान मधु सक्सेना की कविताओं का मूल स्वर भले ही स्त्री केंद्रित है तथापि इसमें सामाजिक संदर्भों की एक वृहत्तर शृंखला दिखलाई पड़ती है...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

राज्यसत्ता के दमन-उत्पीड़न-अन्याय के बीच प्रेम की पीर का आख्यान

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आलोक  बच्चों के लिए सबसे आरामदेह जगह होती है – माँ की गोद। कभी किसी बच्चे को उसकी माँ की गोद से जबरन अलग करने...
जनमत

नीट परीक्षा पेपर लीक- वर्चस्ववादी विचारधारा, भ्रष्टाचार और अपराध का संगम

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जयप्रकाश नारायण  लगभग 24 लाख छात्र लंबे समय से चिकित्सक बनने की तमन्ना लिए परीक्षा की तैयारी में घर-परिवार छोड़कर कंक्रीट के जंगल नुमा शहरों...
कविता

ज्ञान प्रकाश की कविताएँ बड़े मार्मिक ढंग से हमारी सुप्त अनुभूतियों को झकझोरती हैं।

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शालिनी सिंह एक कवि होना इतना भर तो नहीं कि उसकी रचनाएँ हर महत्वपूर्ण जगह प्रकाशित होने की लालसा से भरी हों.. न ही मानवीय...
साहित्य-संस्कृति

दलित साहित्य का भविष्य और भविष्य का दलित साहित्य

समकालीन जनमत
रामनरेश राम    बहुत भीषण है यहाँ से आगे कलाओं की दुनिया बहुत दुर्गम हैं यहाँ से आगे संवेदनाओं के रास्ते यहाँ से बदलते हैं...
कविता

पवन करण की कविताएँ साहस एवं सजगता का प्रतीक हैं

समकालीन जनमत
अंकिता रासुरी पवन करण की कविताओं में मौजूदा समाज एवं उसकी विडंबनाएँ मौजूद हैं। कैसे समाज बिखर रहा है बल्कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा...
कविता

अजय ‘दुर्ज्ञेय’ की कविताएँ जातिवाद के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की मुखर आवाज़ बनकर उभरती हैं

समकालीन जनमत
जावेद आलम ख़ान युवा कवियों में अजय ‘दुर्ज्ञेय’ प्रतिरोध की मुखर आवाज बनकर उभरे हैं। इनकी कविताओं में धर्म, सत्ता और पूंजी के गठजोड़ पर...
पुस्तक

विनय सौरभ का कविता संग्रह ‘बख़्तियारपुर’ स्मृतियों के माध्यम से वर्तमान को परखने की एक सफल कोशिश है

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प्रज्ञा गुप्ता   आज के समय में जब संबंधों की उष्मा के मायने कम हो रहे हैं; हमारी संवेदना के लिए घटनाएं मात्र एक खबर...
कविता

आँशी अग्निहोत्री की कविताएँ एक अंतर्मुखी प्रकृति प्रेमी स्त्री की स्वतंत्रता का आख्यान हैं

समकालीन जनमत
देवेश पथ सारिया युवा कवयित्री आँशी अग्निहोत्री की कविताएँ पढ़ते हुए तीन मुख्य बिंदु रेखांकित किए जा सकते हैं— (i) यह युवा कवयित्री अंतर्मुखी है...
कविता

संदीप नाईक की कविताएँ स्मृतियों को बचाए रखने की कोशिशें हैं

समकालीन जनमत
पुरु मालव समस्त कलाएँ और विधाएँ परस्पर भिन्न होते हुए भी एक दूसरे के क्षेत्र का अतिक्रमण करती हैं क्योंकि अभिव्यक्ति का मूल तत्व इन...
पुस्तक

चुनाव के छल-प्रपंच: मतदाताओं की सोच बदलने का कारोबार!

पुस्तक- चुनाव के छल प्रपंच लेखक – हरजिंदर (प्रतिष्ठित पत्रकार, समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर करने के लिए प्रयासरत) प्रकाशन – नवारुण क्या आने...
जनमत

मणिपुर के बतिया पर ओठ न हिलावे जी…

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रूपम मिश्र  (बिहार चुनाव में भाकपा मा-ले की भागीदारी पर रवीश कुमार की रपट पर एक टिप्पणी) रवीश कुमार की हाल ही की एक  रिपोर्ट...
ग्राउन्ड रिपोर्ट

पूर्वांचल में “अबकी परिवर्तन बा” को जमीन पर जैसा देखा

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के के पांडेय लोकसभा चुनाव 2024 का अब अंतिम चरण ही बचा है। जिसमें उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में शिव की काशी, लहुरी काशी यानी...
कविता

महादेव टोप्पो की कविताएँ आदिवासियत बचाने का संकल्प हैं

समकालीन जनमत
प्रज्ञा गुप्ता महादेव टोप्पो साहित्य में आदिवासी विमर्श के प्रमुख स्वरों में एक हैं। महादेव टोप्पो स्पष्ट सोच एवं संवेदना के साथ अपनी अनुभूतियों को...
जनमत

सुरजीत सिंह पातर की कविताओं में ज़माने का दर्द बहुत ही शिद्दत से उभरता है

समकालीन जनमत
अमरजीत कौंके पंजाबी के अज़ीम शायर सुरजीत पातर का जन्म 1945 में पंजाब के जालंधर जिला के गांव पत्तड़ कलां में हुआ। उन्होंने अपना तख़ल्लुस...
जनमत

मोदी दशक में हिंदी सिनेमा

समकालीन जनमत
जावेद अनीस यह भारतीय राजनीति और समाज के लिये भारी उठापटक भरा दौर है. साल 2014 के बाद से एक राष्ट्र और समाज के तौर...
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