समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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सिनेमा

पटना फिल्मोत्सव : फिल्मों ने मानवीय सौहार्द, संवेदना और जीवन रक्षा के गंभीर सवालों को उठाया

समकालीन जनमत
पटना। सवालों से घिरे हुए हमारे समाज और देश में सत्ताधारी राजनीति प्रायः उनके हल नहीं तलाशती, बल्कि उन्हें और उलझाती है। समस्याओं को और...
सिनेमा

फासीवादी ताकतों को हराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए : लाल्टू

समकालीन जनमत
रेणु की फिल्म ‘संवदिया’ से उठा 13वें पटना फिल्मोत्सव का पर्दा पटना। ‘‘हमारे मुल्क में जब नफरत के लंबरदार नंगा नाच रहे हैं, हर कहीं...
ख़बर

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने 400% फीस वृद्धि, छात्रसंघ बहाली को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का घेराव किया

नई दिल्ली। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज में छात्रसंघ बहाली,कुलपति की अवैध नियुक्ति तथा 400% बढ़े हुए शुल्क के विरोध में पिछले 97 दिनों से आमरण अनशन...
पुस्तक

सुरेश काँटक की कहानियाँ : बर्बर होती व्यवस्था का “आनावरण ”

समकालीन जनमत
  भोजपुर की धरती सामंतवाद विरोधी किसान आंदोलन के लिए ख्यात है। वहीं, यह हिंदी कथा जगत में अपनी त्रयी के लिए भी जानी जाती...
साहित्य-संस्कृति

उपन्यास ‘कर्बला दर कर्बला’ पूरे देश की कथा है

पटना। कालिदास रंगालय में नौ दिसम्बर को 1980 के दशक के भागलपुर पर केंद्रित गौरीनाथ के उपन्यास ‘कर्बला दर कर्बला’ पर हिरावल की ओर से...
ख़बर

पार्टी के 11 वें महाधिवेशन को जनान्दोलनों के उत्सव में बदल दें : दीपंकर भट्टाचार्य

पटना। भाकपा-माले के पटना में होने वाले 11 वें महाधिवेशन और 15 फरवरी 2023 को गांधी मैदान में आयोजित लोकतंत्र बचाओ-देश बचाओ रैली की तैयारी के...
ख़बर

चिरियाबेड़ा गाँव में आदिवासियों पर हिंसा करने वाले सुरक्षा बल के जवानों पर कार्रवाई की मांग

समकालीन जनमत
झारखंड जनाधिकार महासभा ने चिरियाबेड़ा गाँव में सर्च अभियान के दौरान सुरक्षा बल के जवानों द्वारा आदिवासियों से साथ हिंसा और नाबालिक लड़की के साथ...
सिनेमा

‘कंतारा’ जमीन की लड़ाई और हिस्सेदारी की एक मिथ कथा         

   जनार्दन  कंतारा कन्नड़ भाषा की फिल्म है, जो 30 सितंबर 2022 को देश और विदेश में रिलीज हुई। कन्नड़ भाषा के अलावा यह फिल्म...
साहित्य-संस्कृति

मुक्तिबोध पूँजीवादी समाज की जड़ को पकड़ने वाले कवि हैं :  डॉ. वंदना चौबे

 “मुक्तिबोध की रचनाधर्मिता और हमारा समय” पर संगोष्ठी वाराणसीः प्रलेस की बनारस इकाई की सचिव और आर्य महिला पीजी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर डॉ. वंदना...
साहित्य-संस्कृति

बहुजन समाज के नायक साहित्य के इतिहास से बाहर क्यों ?

  लखनऊ में ” सन्तराम बी ए: प्रतिनिधि विचार ” का लोकार्पण लखनऊ। सन्तराम बी ए फाउण्डेशन द्वारा प्रकाशित डा.महेश प्रजापति की पुस्तक ” सन्तराम...
पुस्तक

सांदीनो की बेटियाँ : समाज की मुक्ति के लिए लड़ी स्त्रियों की संघर्ष गाथा

  अरविंद शेखर   स्त्रियां मानव इतिहास का निर्माण कैसे करती हैं। ‘सांदीनो की बेटियां’ किताब इसी का अहम दस्तावेज है। मारग्रेट रांडाल की इस...
जनमत

आर्थिक आधार पर आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण, संविधान की मूल भावना के विपरीत-दीपंकर भट्टाचार्य

पटना। भाकपा-माले की पटना में पोलित ब्यूरो की चल रही बैठक को संबोधित करते हुए माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आर्थिक रूप से...
स्मृति

‘ स्मृतियों के आइने में अरुण पांडेय ’ का विमोचन

समकालीन जनमत
नई दिल्ली। गांधी शांति प्रतिष्ठान के खचाखच भरे हाल में वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया कर्मियों, राजनीतिक व सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, प्रोफेसरों, वकीलों तथा विभिन्न क्षेत्र में कार्यरत...
जनमत

जसम सम्मेलन के बहाने कुछ बातें

दिवाकर मुक्तिबोध बस्तर के आदिवासियों के हितों के लिए वर्षों से संघर्षरत सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सम्मेलन में जो...
ख़बर

प्रो. जी.एन. साईबाबा की रिहाई स्‍थगित करने के खिलाफ़ पटना में नागरिकों का प्रतिवाद

पटना। एआईपीएफ, आईसा, आरवाईए और जन संस्कृति मंच के बैनर से आज पटना में बुद्ध स्मृति पार्क पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रोफेसर सीएन साईं बाबा की...
ख़बर

 जन संस्कृति मंच का राष्ट्रीय सम्मेलन 7-8 अक्टूबर को रायपुर में, पांच सौ से ज्यादा लेखक, कलाकार और संस्कृतिकर्मी जुटेंगे 

समकालीन जनमत
रायपुर. लेखक-संस्कृतिकर्मियों के संगठन जन संस्कृति मंच का 16 वां राष्ट्रीय सम्मेलन 8–9 अक्टूबर को रायपुर में पंजाब केसरी भवन में आयोजित हो रहा है....
ख़बर

भगत सिंह के पास विजन, सपने और यथार्थ की समझ थी- प्रो. जगमोहन सिंह

समकालीन जनमत
कथांतर की ओर से भगत सिंह जयंती का आयोजन कवियों का आह्वान ‘लिखने को बदलना होगा लड़ाई में ‘ पटना। भगत सिंह जाति और सांप्रदायिकता...
ख़बर

नफरत और हिंसा के दौर में पटना में ‘ कोरस ’ का ‘ पैग़ाम ए मोहब्बत ’

समकालीन जनमत
आज के इस दौर में जहाँ नफरत और हिंसा चारों ओर फैलाई जा रही है वहीं ‘ कोरस ’ के द्वारा 23- 25 सितम्बर तीन...
कविता

होती हुई सुबह की तरह कविताएँ

समकालीन जनमत
विनय कुमार लिखने वाले कवियों से भरे हिंदी जगत में कुमार मुकुल एक पढ़ने वाले कवि हैं। उनकी मारक लघु टिप्पणियों से परिचित पाठक भली-भाँति...
पुस्तक

‘दबी-दूब का रूपक’ कालजयी ही नहीं, कालजीवी भी है

दबी-दूब का रूपक पुस्तक पर चर्चा कृष्ण कुमार दरभंगा, साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था अभिव्यक्ति के तत्त्वावधान में रामबाग में आयोजित एक सारस्वत समारोह में कमलानंद झा की...
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