समकालीन जनमत
ख़बर

बिरसा मुंडा के स्मृति दिवस पर झारखंड जन संस्कृति मंच का आयोजन

धरती आबा बिरसा मुंडा की 126वीं स्मृति दिवस के अवसर पर 9 जून 2026 को झारखंड जन संस्कृति मंच (जसम), बरकाकाना इकाई के घुटूवा मशाल टीम द्वारा सीसीएल सामुदायिक भवन, बरकाकाना में एक वृहद एवं भव्य सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं वैचारिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 250 से अधिक बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र-युवाओं, महिलाओं तथा आम नागरिकों ने भाग लिया। वहीं विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगभग 75 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ धरती आबा बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। माल्यार्पण में हीरा गोप (जिला सचिव, भाकपा-माले, रामगढ़) सहित उपस्थित अतिथियों ने भाग लिया। इसके पश्चात भरत बेदिया की अगुवाई में टुकु दास, अफसर अंसारी, दिनेश करमाली एवं नंदलाल दास द्वारा बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और उलगुलान आंदोलन पर आधारित लोकगीत प्रस्तुत किए गए। लोकगीतों ने उपस्थित जनसमूह को आदिवासी स्वाभिमान, प्रतिरोध और संघर्ष की विरासत से जोड़ते हुए कार्यक्रम को भावपूर्ण वातावरण प्रदान किया।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता मोतीलाल बेदिया ने तथा संचालन शिवनारायण बेदिया ने किया। प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में अमल घोषाल, संतोष कुमार बेदिया, नंदलाल दास एवं टुकु दास शामिल थे। चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा 1 से 6 तथा क्विज प्रतियोगिता में कक्षा 7 से 10 तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। आर्य बाल विद्यालय, के.बी. स्कूल भुरकुंडा, के.एस.एन. पब्लिक स्कूल, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय चपरी, डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल नयानगर बरकाकाना, राजकीय मध्य विद्यालय नयानगर बरकाकाना, सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल एवं बाल विकास विद्यालय घुटूवा सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

लोकनृत्य प्रतियोगिता में स्वाती कुमारी समूह, पूर्णिमा कुमारी समूह, वाणी कुमारी समूह, चांदनी समूह, प्रांजल समूह एवं वैष्णवी समूह ने शानदार प्रस्तुति दी। कविता पाठ में प्रियांश बेदिया, गौरव बेदिया, ऋषभ कुमार एवं ईवा बेदिया ने भाग लिया, जबकि भाषण प्रतियोगिता में मनु बेदिया एवं आरुषी बेदिया ने प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किए। चित्रकला एवं क्विज प्रतियोगिताओं में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और ज्ञान का परिचय दिया।

सांस्कृतिक सत्र में उमेश बेदिया के निर्देशन में पडरिया टीम के बच्चों ने बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और उलगुलान पर आधारित एक प्रभावशाली लघु नाटक प्रस्तुत किया। नाटक में लकी बेदिया, लवंश बेदिया, नितेश बेदिया, साहिल बेदिया, हर्षित बेदिया, हिमांशु बेदिया, प्राची बेदिया, प्रेरणा बेदिया, आदित्य बेदिया, सृष्टि बेदिया, ईशा बेदिया, आयुष बेदिया, चिराग बेदिया, अमीषा बेदिया, अंश बेदिया, कशिश बेदिया, साक्षी बेदिया एवं अभि बेदिया ने अभिनय किया। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।

इस अवसर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सांत्वना प्रशस्ति प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

द्वितीय सत्र में “बिरसा मुंडा का उलगुलान : संघर्ष, संस्कृति और जन प्रतिरोध की विरासत” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता झारखंड जन संस्कृति मंच के राज्य सचिव सुरेन्द्र बेदिया ने तथा संचालन जन्मजेय तिवारी (अधिवक्ता, रामगढ़ एवं जसम राज्य सह-सचिव) ने किया। विचार गोष्ठी में झारखंड जन संस्कृति मंच के राज्य उपसचिव रमेश शर्मा ने उद्घाटन वक्तव्य देते हुए कहा कि बिरसा मुंडा का उलगुलान जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा का ऐतिहासिक जनआंदोलन था तथा आज भी उनके विचार सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक अधिकारों और जनसंघर्षों को दिशा प्रदान करते हैं। इसके बाद युवा कवि एवं तकनीकी अधिकारी, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डॉ. लालदीप गोप, के.बी. महाविद्यालय हजारीबाग की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रमिला कुमारी गुप्ता, जनवादी लेखक संघ के सदस्य रूपलाल बेदिया, खोरठा भाषा साहित्य संस्कृति परिषद के निदेशक डॉ. बी.एन. ओहदार, आदिवासी संघर्ष मोर्चा के देवकीनन्दन बेदिया तथा रेलवे ट्रेड यूनियन के अवधेश कुमार गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए।

डॉ. लालदीप गोप ने कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष केवल इतिहास का विषय नहीं है, बल्कि वर्तमान समय में सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने युवाओं से बिरसा के विचारों को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

प्रमिला कुमारी गुप्ता ने कहा कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता समाज परिवर्तन के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

रूपलाल बेदिया ने कहा कि बिरसा मुंडा की विरासत आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और प्रतिरोध की परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने साहित्य और संस्कृति की भूमिका पर प्रकाश डाला।

डॉ. बी.एन. ओहदार ने झारखंडी भाषाओं, विशेषकर खोरठा भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भाषा और संस्कृति किसी भी समाज की पहचान का आधार होती हैं।

अवधेश कुमार गुप्ता ने श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश जनता के अधिकारों के संघर्ष को बिरसा मुंडा की विरासत से जोड़ते हुए सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

देवकीनन्दन बेदिया ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए व्यापक जनएकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जनसंस्कृति और जनआंदोलनों के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। कवि अजय कुमार, प्रमोद रंजन, विजय राणा, चक्रपाणि मिश्रा,शंकर गुप्ता, विजय कुमार कर्ण एवं सुरेन्द्र सिंह ने अपनी कविताओं के माध्यम से बिरसा मुंडा के संघर्ष, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र तथा जनप्रतिरोध की परंपरा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कवियों ने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज में चेतना जगाने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

कार्यक्रम के दौरान सभी आमंत्रित अतिथियों एवं वक्ताओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में झारखंड जन संस्कृति मंच के पदाधिकारी महेश गोप, रामप्रवेश गोप तथा लोकगायक विनोद सिंह चुंबा की सक्रिय उपस्थिति रही। भाकपा (माले) के साथी नीता बेदिया, नागेश्वर मुंडा, देवानंद गोप, बटेश्वर मुंडा, रामवृक्ष बेदिया, उमेश गोप, तृतियाल बेदिया, हिरोलाल बेदिया, मदन प्रजापति, बृज नारायण मुंडा, गोपी बेदिया, रामदेव बेदिया, पवन यादव, रजना देवी, प्रोफेसर शाहनवाज खान एवं प्रदीप करमाली ने कार्यक्रम में शिरकत की।

इसके अतिरिक्त वार्ड संख्या 21 की वार्ड पार्षद गीता देवी, नेपाल विश्वकर्मा, बिरजू ठाकुर, शिक्षिका हेमंती देवी, किरण कुमारी, सतपाल बोहरा, रामशब्द राम, पवन कुमार झा, सुशील कुमार सहित क्षेत्र के अनेक शिक्षक, बुद्धिजीवी, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, कलाकार, युवा एवं महिलाएँ उपस्थित रहीं।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा के संघर्ष, स्वाभिमान, समानता और न्याय के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। कार्यक्रम का समापन बिरसा मुंडा के सपनों के अनुरूप न्यायपूर्ण, समतामूलक और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।

आयोजन में कुल 250 से अधिक लोगों की उपस्थिति तथा लगभग 75 बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने धरती आबा बिरसा मुंडा की संघर्षशील विरासत, सामाजिक न्याय और जनप्रतिरोध की चेतना के प्रति व्यापक जनसमर्थन एवं जागरूकता का परिचय दिया।

सुरेन्द्र कुमार बेदिया

राज्य सचिव

झारखंड जन संस्कृति मंच

Related posts

Fearlessly expressing peoples opinion