Tag : श्रम

दुनिया

पूंजीवाद के उदय और विकास की कहानी हदास थिएर की जुबानी

गोपाल प्रधान
सबसे पहले वे इस झूठ का भंडाफोड़ करती हैं कि पूंजीवाद कोई स्वाभाविक या शाश्वत चीज है । जो भी लोग ऐसा मानते हैं उनका...
ज़ेर-ए-बहस

मजदूरों को निचोड़ने और फेंकने का काल है यह

आज संगठित और असंगठित, दोनों क्षेत्रों में मजदूरों की दशा, अमानवीयता का सामना कर रही है। अपने देश में ज्यादातर मजदूर असंगठित क्षेत्रों में काम...
कविता जनमत साहित्य-संस्कृति

पराजय को उत्सव में बदलती अनुपम सिंह की कविताएँ

समकालीन जनमत
(अनुपम सिंह की कविताओं को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे वे अपने साथ हमें पितृसत्ता की एक बृहद प्रयोगशाला में लिए जा रहीं हैं...

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