समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

मानसा में सखी सुल्तान

आशुतोष कुमार
  इस 23 मार्च को पंजाब के मानसा कस्बे में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की तीन ख़ूबसूरत मूर्तियों का अनावरण किया गया. अनावरण  भाकपा...
चित्रकला

कुम्भ मेले का लोगो : कला की सरकारी समझ का नायाब नमूना

अशोक भौमिक
अख़बार में छपे फोटो से पहले तो मुझे यह लगा कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री प्रयाग में 2019 में होने वाले कुम्भ मेले...
साहित्य-संस्कृति

एंगेल्स की शाहकार किताब ‘ द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट ’

गोपाल प्रधान
2010 में त्रिस्तम हन्ट की नई भूमिका के साथ एंगेल्स की महान किताब ‘द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट’ का प्रकाशन...
कविता

यहीं कही रहेंगे केदारनाथ सिंह

समकालीन जनमत
मंगलेश डबराल, वरिष्ठ कवि हिन्दी कविता की एक महत्वपूर्ण पीढी तेज़ी से विदा हो रही है. यह दृश्य  दुखद और  डरावना  है जहां ऐसे बहुत...
साहित्य-संस्कृति

केदारनाथ सिंह के काव्य वैशिष्टय का अनुकरण नहीं किया जा सकता: प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

समकालीन जनमत
साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों ने प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गोरखपुर, 21 मार्च। प्रेमचन्द पार्क में आज दोपहर बड़ी संख्या में जुटे साहित्यकारों,...
स्मृति

‘ संस्कृति खरगोश की तरह है, जो आने वाले खतरे का आभास देती है ’

समकालीन जनमत
कौशल किशोर   यह कैसा समय है कि साथ के लोग साथ छोड़े जा रहे हैं. कुंवर जी और दूधनाथ सिंह को हम ठीक से...
स्मृति

‘आदमी के उठे हुए हाथों की तरह’ हिन्दुस्तानी अवाम के संघर्षों को थामे रहेगी केदारनाथ सिंह की कविता : जसम

समकालीन जनमत
कवि केदारनाथ सिंह को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि जनतांत्रिक मूल्यों की अकाल-वेला में केदारनाथ सिंह की कविता जनप्रतिरोध के सारसों की अप्रत्याशित आवाज़ थी....
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

‘ कविता भविष्य में गहन से गहनतर होती जाएगी ’

मनोज कुमार सिंह
  ( प्रख्यात कवि प्रो. केदारनाथ सिंह ने 26 फरवरी 2016 को गोरखपुर के प्रेमचंद पार्क में प्रो परमानंद श्रीवास्तव की स्मृति में ‘ कविता...
स्मृति

मै गांव-जवार और उसके सुख-दुख से जुड़ा हुआ हूं

(ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने के बाद डॉ केदारनाथ सिंह से यह संक्षिप्त बातचीत टेलीफ़ोन पर हुई थी. यह साक्षात्कार दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुआ था. )...
स्मृति

अलविदा, स्टार गुरु जी !

संजय जोशी
  मैंने 1989 के जुलाई महीने में जे एन यू के भारतीय भाषा विभाग के हिंदी विषय में एडमिशन लिया. कोर्स एम ए का था....
कविताशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

उठो कि बुनने का समय हो रहा है

समकालीन जनमत
केदारनाथ सिंह की कुछ कविताएं   मुक्ति का जब कोई रास्ता नहीं मिला मैं लिखने बैठ गया हूँ मैं लिखना चाहता हूँ ‘पेड़’ यह जानते...
कविताख़बरशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

वह चला गया, जिसने कहा था कि जाना सबसे खौफनाक क्रिया है

समकालीन जनमत
आशीष मिश्रा, युवा आलोचक   हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह हमारे बीच नहीं रहे . कवि केदारनाथ सिंह के जाने के साथ ही न...
साहित्य-संस्कृति

लोक और जन की आवाज़: त्रिलोचन और मुक्तिबोध

मिथिला विश्वविद्यालय  में मुक्तिबोध-त्रिलोचन जन्म शताब्दी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन मिथिला विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने मुक्तिबोध त्रिलोचन जन्मशताब्दी के अवसर पर दो दिवसीय...
साहित्य-संस्कृतिस्मृति

सुशील सिद्धार्थ के अन्दर सृजन की बहती नदी थी जिसे बाहर आना बाकी था

कौशल किशोर   सुशील सिद्धार्थ का जाना दुखद, बेहद दुखद। अविश्वसनीय सा, सदमे से भरा। हम सभी स्तब्ध हैं इसलिए कि यह कोई जाने की...
ख़बरनाटक

‘गाय’ नाटक का मंचन रोके जाने का कलाकारों ने किया विरोध

समकालीन जनमत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के इशारे पर शाहजहांपुर जिला प्रशासन द्वारा ‘गाय’ नाटक के मंचन पर रोक लगाने का इप्टा, जसम, प्रलेस, जलेस,...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

गैब्रिएल गार्शिया मार्खेज : लैटिन अमेरिकी साहित्य का गौरव

गोपाल प्रधान गैब्रिएल गार्शिया मार्खेज का नाम लैटिन अमेरिकी साहित्य के लिए गर्व का विषय है । उनका उपन्यास ‘सौ सालों का एकांत’ समूचे जादुई...
कविता

शैतान शासक की आकुल आत्मा का ‘चुपचाप अट्टहास’

समकालीन जनमत
(कवि लाल्टू के कविता-संग्रह ‘ चुपचाप अट्टहास ’  पर युवा लेखक आलोक कुमार श्रीवास्तव की टिप्पणी. ) किसी देश की जनता के लिए यह जानना...
इतिहासचित्रकला

कामगार महिलाओं के संघर्ष का दिवस है महिला दिवस, मिथक और बाजार का नहीं

( राधिका मेनन के रेखा चित्रों से जानिए अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास ) महिला दिवस की शुभकामनाएं एक दिन पहले से आने लगीं। इन...
चित्रकला

कद से बड़े कैनवास : श्वेता राय के चित्र

राकेश कुमार दिवाकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में मुहम्मदाबाद छोटा सा शहर है. उस छोटी सी जगह से एक लड़की का आधुनिक कला जगत...
कवितासाहित्य-संस्कृति

‘ रेख्ता के तुम ही नहीं हो उस्ताद ग़ालिब, कहते हैं अगले जमाने में कोई मीर भी था ’

कौशल किशोर
लखनऊ में ‘ब याद: मीर तकी मीर’ का आयोजन ‘रेख्ता के तुम ही नहीं हो उस्ताद ग़ालिब/कहते हैं अगले जमाने में कोई मीर भी था’. ...
Fearlessly expressing peoples opinion