समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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जनमत

भारत में ट्रान्सजेंडर के अधिकार : कागजी कानून और वास्तविक संघर्ष

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दीक्षा पाण्डेय पिछले काफी अरसे से, खासतौर से तब, जब से डोनाल्ड ट्रम्प ने दो से अधिक जेंडर्स को दी गई आधिकारिक मान्यता को वापस...
कविता

रणेन्द्र की कविताएँ युगबोध और प्रतिबद्धता की बानगी हैं।

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प्रज्ञा गुप्ता “रणेन्द्र युगबोध के कवि हैं। रणेन्द्र का कवि मन अपनी विविध प्रतिबद्धताओं,सरोकारों के बीच रागारुण संवेदना के साथ उपस्थित है।” ‘ग्लोबल गाँव के...
कविता

माया मिश्रा की कविताओं में कभी न ख़त्म होने वाली उम्मीद का एक शिखर है

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गुंजन श्रीवास्तव माया मिश्रा जी की कविताओं को पढ़कर एक बात तो साफ़ कही जा सकती है कि यह एक कवि के परिपक्व अनुभव से...
कविता

हरे प्रकाश उपाध्याय की कविताएँ तनी हुई मुट्ठी की तरह ऊपर उठती हैं।

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चित्रा पंवार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कविता के विषय में कहते हैं– ‘कविता अगर मेरी धमनियों में जलती है पर शब्दों में नहीं ढल पाती मुझे...
कविता

दुनिया में ताक़त के खेल को समझने की कोशिश है अरुणाभ सौरभ की कविताएँ

समकालीन जनमत
बीते शनिवार को प्रभाकर प्रकाशन में अरुणाभ सौरभ के काव्य-संग्रह ‘मेरी दुनिया के ईश्वर’ के तीसरे संस्करण का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर एक परिचर्चा...
कविता

रचित की कविताएँ यथास्थिति को बदलने के लिए बेचैन हैं

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जावेद आलम ख़ान रचित की कविताओं में गुस्सैल प्रेमी रहता है ऐसा नायक जो यथार्थ को नंगा नहीं करता, बड़े सलीके से परोसता है जिसकी...
ख़बर

बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस समारोह

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8 दिसंबर 2024 दिन रविवार को बरामदपुर गांव (सुल्तानपुर) में डॉ. अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस समारोह के उपलक्ष्य में संविधान के मूल्यों को बनाए और...
कविता

ग्रेस कुजूर की कविताओं में नष्ट होती प्रकृति का दर्द झलकता है।

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प्रज्ञा गुप्ता प्रकृति का सानिध्य किसे प्रिय नहीं। प्रकृति के सानिध्य में ही मनुष्य ने मनुष्यता सीखी; प्रकृति एवं जीवन के प्रश्नों ने ही मनुष्य...
साहित्य-संस्कृति

हेमंत कुमार की नयी कहानी ‘वारिस’

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(हेमंत की कहानियां अपने समय के यथार्थ को बेहद संवेदनशील तरीके से चित्रित करती हैं और पाठक को सोचने को विवश करती हैं। पढ़िए हेमंत...
शख्सियत

याद ए मकबूल जायसी का आयोजन : चर्चा और ग़ज़ल संध्या 

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  ‘मकबूल जायसी की शायरी हिंदुस्तानियत और इंसानियत से सराबोर’  ‘अब ये गजलें मिजाज बदलेंगी‘ लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से ‘याद ए...
कविता

पूजा कुमारी की कविताओं में हाशिये की तमाम आवाज़ें जगह पाती हैं।

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बबली गुज्जर जिंदगी में जब लगता है कि सब खत्म हो गया है, तो असल में वह कुछ नया होने की शुरुआत होती है। चुप्पियाँ...
कविता

माया प्रसाद की कविताएँ उस व्यक्ति-मन की प्रतिक्रियाएँ हैं जो अपने परिवेश के प्रति जागरुक और संवेदनशील है।

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प्रज्ञा गुप्ता डॉ माया प्रसाद की कविताएँ उस व्यक्ति-मन की प्रतिक्रियाएँ हैं जो बहुत संवेदनशील है और अपने पूरे परिवेश के प्रति जागरुक है। उनकी...
कविता

कुछ न होगा के विरुद्ध हैं चंद्रभूषण की कविताएँ

समकालीन जनमत
प्रियम अंकित चंद्रभूषण की कविताएँ निरंतर जटिल होते समय में जनता के सहज सरोकारों के पक्ष में खड़ी होने वाली कविताएँ हैं। आज जब एक...
शख्सियत

कहानीकार और संपादक विजयकांत को श्रद्धांजलि

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नक्सलबाड़ी की क्रांतिकारी धारा के चर्चित कहानीकार और संपादक विजयकांत का 31 अक्टूबर 2024 को निधन हो गया। पिछले कई सालों से अस्वस्थता के कारण...
कविता

अनुराग यादव की कविताएँ अपने समय और समाज को देखने का विवेक हैं।

समकालीन जनमत
शंकरानंद कविता की दुनिया में अभी कई पीढ़ियाँ एक साथ सक्रिय हैं और इसी बीच नए लोग भी आ रहे हैं जिनकी उपस्थिति चकित करती...
कविता

आशीष तिवारी की कविताएँ सामूहिक प्रतिरोध का आह्वान करती हैं।

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विपिन चौधरी जहाँ हिन्दी साहित्य में कई युवा रचनाकारों ने अपनी आमद से आश्वस्त किया है ऐसे ही एक युवा कवियों की फ़ेहरिस्त में एक...
साहित्य-संस्कृति

नहीं रहे जनपक्षधर, जुझारू जर्नलिस्ट और हिंदी—उर्दू—पंजाबी अदब के शैदाई अमरीक

समकालीन जनमत
स्मृतिशेष : लेखक—पत्रकार अमरीक तुम देश छोड़ने का कह रहे थे, दोस्त ! ये क्या किया, तुमने तो दुनिया ही… —ज़ाहिद ख़ान जनपक्षधर, जुझारू जर्नलिस्ट...
कविता

श्रुति कुशवाहा की कविताओं में स्त्री विमर्श एक आक्रामक तेवर के साथ उपस्थित है।

समकालीन जनमत
निरंजन श्रोत्रिय स्त्री विमर्श जब ठंडा-सा हो तो वह स्त्री के पक्ष में खड़ा ज़रूर नज़र आता है लेकिन उसकी निर्णायक भूमिका संदिग्ध ही होती...
जनमत

श्रीलंका का चुनाव परिणाम और भारतीय उपमहाद्वीप में कम्युनिस्ट आन्दोलन

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जयप्रकाश नारायण  दो दिन पहले एक दैनिक समाचार पत्र के कार्यालय में बैठा था। वहां कुछ मध्यवर्गीय पृष्ठभूमि के मित्र भी थे। मेरे पहुंचते ही...
कविता

केतन की कविताएँ वैचारिकी और परिपक्व होते कवित्त का सुंदर समायोजन हैं

समकालीन जनमत
अणु शक्ति सिंह कविताओं से गुजरते हुए एक ख़याल जो अक्सर कौंधता है वह कवि की निर्मिति से जुड़ा होता है। वह क्या है जिससे...
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