समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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शख्सियत

कामरेड ज़िया उल हक़ और उनका 17 जानसेन गंज, इलाहाबाद

समकालीन जनमत
( 28 सितम्बर 1920 को इलाहाबाद के जमींदार मुस्लिम परिवार में पैदा हुए ज़िया –उल-हक़ आज अपने जीवन के सौ साल पूरे कर रहे हैं....
शख्सियत

एक बेटे की कलम से कुछ यादें

( 28 सितम्बर 1920 को इलाहाबाद के जमींदार मुस्लिम परिवार में पैदा हुए ज़िया –उल-हक़ आज अपने जीवन के सौ साल पूरे कर रहे हैं....
भाषा

उर्दू की क्लास : नाज़नीन, नाज़मीन और नाज़रीन

( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की आठवीं  क़िस्त में नाज़नीन, नाज़मीन और नाज़रीन के फ़र्क़ के मायने के...
कविता

अंतिम आदमी की हालत बयाँ करतीं विधान की कविताएँ

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल गुंजन श्रीवास्तव ‘विधान’ की कविताएँ ‘कवियों के कवि’ शमशेर बहादुर सिंह से लेकर सीधा नारा की तर्ज़ पर गांधी के ‘अंतिम आदमी’ की...
कविता

मुमताज़ सत्ता की चालाकियों को अपनी शायरी में बड़े सलीके से बेनक़ाब करते हैं

समकालीन जनमत
संविधान के पन्नों में तंबाकू विल्स की भर-भर के संसद की वो चढ़ें अटरिया, जै जै सीता-जै जै राम ये एक ऐसे शायर का शे’र...
कविता

विश्वकर्मा पूजा :  रिपोर्ताज़

समकालीन जनमत
( हिंदी के वरिष्ठ कथाकार शेखर जोशी ने इलाहाबाद के 508 आर्मी बेस वर्कशॉप में नौकरी करते हुए लम्बा समय कारख़ाने में कारीगरों के बीच...
ख़बर

दिल्ली के झुग्गीवासियों के आवास व आजीविका के अधिकार चार्टर को जारी करते हुए भाकपा माले की 48 घंटे की चेतावनी भूख हड़ताल खत्म हुई

समकालीन जनमत
  48 घण्टे से जारी भूख हड़ताल को समाप्त करते हुए दिल्ली में झुग्गियों को तोड़े जाने के आदेश को पूरी तरह ख़ारिज करने और...
ख़बर

दिल्ली में रेलवे किनारे की झुग्गियों को तोड़े जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल का दूसरा दिन

समकालीन जनमत
48 घंटे की भूख हड़ताल का आज दूसरा दिन! रेलवे मंत्रालय द्वारा न्यायालय में झुग्गियों के तोड़े जाने पर चार सप्ताह की रोक की सूचना...
ख़बर

भाकपा माले ने दिल्ली में झुग्गी बस्तियों को तोड़े जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ शुरू की 48 घंटे की भूख हड़ताल

समकालीन जनमत
    भाकपा माले ने झुग्गी बस्तियों को तोड़े जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ शुरू की 48 घंटे की भूख हड़ताल ! 4 सप्ताह तक...
भाषा

उर्दू की क्लास : “ख़िलाफ़त” और “मुख़ालिफ़त” का फ़र्क़

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की सातवीं  क़िस्त में “ख़िलाफ़त” और “मुख़ालिफ़त” के फ़र्क़ के मायने के बहाने...
कविता

छूटते हुए ज़रूरी प्रश्नों का कवि अंजन कुमार

समकालीन जनमत
बसन्त त्रिपाठी   सत्ता संरचना में अंतर्निहित क्रूर आकांक्षाओं को जिन युवा कवियों ने रोजमर्रा के अनुभवों से पकड़ने में अतिरिक्त रूप से सजगता दिखाई...
ख़बर

दिल्ली में रेलवे किनारे हज़ारों हज़ार झुग्गियों को उजाड़ने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू

समकालीन जनमत
  रेल पटरी के नज़दीक बसे लोगों ने कहा – झुग्गी तोड़ने का फैसला उन्हें स्वीकार्य नहीं, ‘आवास का अधिकार’ लेकर रहेंगे वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र...
कविता

स्त्री जीवन के अनचीन्हे सच को दर्ज करतीं रजनी अनुरागी की कविताएँ

समकालीन जनमत
संजीव कौशल रजनी अनुरागी की कविताओं से गुज़रना, शरीर के ताप को सीधे महसूस करना है वह ताप जिसमें धीरे धीरे एक स्त्री का जीवन...
भाषा

उर्दू की क्लास : “क़वायद तेज़” का मतलब

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की छठी क़िस्त में “क़वायद तेज़” के मायने के बहाने उर्दू भाषा के...
भाषा

उर्दू की क्लास : “मौज़ूं” और “मौज़ू” का फ़र्क़

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की पांचवीं   क़िस्त में “मौज़ूं” और “मौज़ू” के फ़र्क़ के बहाने उर्दू भाषा...
कविता

समवेत की आवाज़ हैं मनोज कुमार झा की कविताएँ

समकालीन जनमत
सन्तोष कुमार चतुर्वेदी अब तलक जिन क्षेत्रों को दुर्गम समझा जाता था, आज की कविता वहाँ की यात्रा सहज ही कर लेती है। अब तलक...
जनमत

‘रामदास’ की हत्या का दृश्य-विधान, तब और अब: मनोज कुमार

समकालीन जनमत
[शिक्षा व साहित्य के इलाक़ों में जाने-पहचाने अध्येता मनोज कुमार का यह लेख रघुवीर सहाय की प्रसिद्ध कविता ‘रामदास’ की पुनर्व्याख्या का ज़रूरी कार्यभार सम्पन्न...
ग्राउन्ड रिपोर्ट

…कहाँ जाईं, का करीं

समकालीन जनमत
कोरोना डायरी : लॉकडाउन-3 नीलिशा [युवा पत्रकार नीलिशा दिल्ली में रहती हैं और इस भयावह वक़्त का दस्तावेज़ीकरण वे कोरोना डायरी नाम से कर रही...
शख्सियत

दास्तान-ए-ख़लीफ़ा

समकालीन जनमत
(आज़ादी के बाद उम्मीद की जाती थी कि लोककलाओं का विकास होगा लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। 60 और 70 का दशक आते-आते जो लोक...
भाषा

उर्दू की क्लास : “आज होगा बड़ा ख़ुलासा!”

समकालीन जनमत
( युवा पत्रकार और साहित्यप्रेमी महताब आलम  की श्रृंखला ‘उर्दू की क्लास’ की  चौथी  क़िस्त में “ख़ुलासा” और “बेग़म” के मायने के बहाने उर्दू भाषा...
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