समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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साहित्य-संस्कृति

गोरख पांडेय : साक्षात्कारों के आईने से

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      “ कविता और प्रेम—दो ऐसी चीज़ें हैं, जहाँ मनुष्य होने का मुझे बोध होता है.”   “कविता को दमन के ज़रिए ख़त्म...
कविता

कल्पना झा की कविताएँ जो कुछ भी सुंदर है उसे बचा ले जाने की कोशिश हैं

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आनंद गुप्ता रंगकर्मी एवं अभिनेत्री कल्पना झा की कविताओं में स्त्री मन की गहरी समझ है. इनकी कविताओं से गुजरते हुए हम स्त्रियों के दुख...
ख़बर

दिल्ली की सड़कों पर गूंजी आशा कर्मियों की आवाज़

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श्वेता राज दिल्ली आशा कामगार यूनियन (ऐक्टू) के बैनर तले आज राजधानी के मंडी हाउस गोल चक्कर से सैकड़ों आशाओं ने ‘आशा अधिकार मार्च’ निकाला।...
ख़बर

हाथरस बलात्कार एवं हत्या केस :  एक साल बाद भी परिवार न्याय की आस में

समकालीन जनमत
( ‘द हिन्दू’  16 सितम्बर को प्रकाशित अनुज कुमार की इस रिपोर्ट को दिनेश अस्थाना ने हिंदी अनुवाद कर समकालीन जनमत के पाठकों के लिए...
ख़बर

रोज़गार अधिकार सम्मेलन में छात्र-युवा-सामाजिक न्याय विरोधी नीतियों के खिलाफ बड़ी लड़ाई का संकल्प

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लखनऊ। बेरोज़गारी की समस्या के खिलाफ एक मुकम्मल लड़ाई खड़ी करने तथा सम्मानजनक रोज़गार की माँग के साथ बने 10 से अधिक छात्र युवा संगठनों...
स्मृति

‘ रचना, विचार और आन्दोलन के साथी थे सुरेश पंजम ’

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लखनऊ। नागरिक परिषद व पीपुल्स यूनिटी फोरम के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यकार, शिक्षक व सामाजिक चिंतक डा. एस. के. पंजम की याद में 19 सितम्बर...
कविता

अनामिका अनु की कविताएँ स्त्री विमर्श को कई कोणों से देखती हैं

समकालीन जनमत
विशाखा मुलमुले   अनामिका अनु जी मूलतः बिहार की रहवासी हैं व कर्मभूमि से केरल की हैं। मैं जब उनकी कविताएँ पढ़ती हूँ तो कविता...
ख़बर

100 से अधिक शिक्षक-कर्मचारी संगठन सरकार के खिलाफ लामबंद, 30 नवम्बर को महारैली की घोषणा

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कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच का गठन किया, योगी सरकार पर कर्मचारियों-शिक्षकों के अधिकार छीनने का आरोप लगाया  लखनऊ। प्रदेश के 100 से अधिक...
ख़बर

दिल्ली आशा कामगार यूनियन (ऐक्टू) अपनी मांगों को लेकर चला रही हैं पोस्टकार्ड कैंपेन

समकालीन जनमत
श्वेता राज ऐक्टू से सम्बद्ध दिल्ली आशा कामगार यूनियन (ऐक्टू) ने दिल्ली में कार्यरत आशाओं के बीच ‘चुप्पी तोड़ो पोस्टकार्ड अभियान’ शुरू किया है. इस...
ख़बर

प्रधानमंत्री के जन्मदिन को ‘ राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस ’ के रूप में मनाएगी इंकलाबी नौजवान सभा

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भुवनेश्वर। इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) की राष्ट्रीय परिषद की दो दिवसीय बैठक 11-12 सितंबर को  भुवनेश्वर हुई। बैठक मे 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...
स्मृति

‘ जब भी समाज में अंधेरा गहराता है, विचार के गर्भ से उठती है आंधी ’

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 काॅ. बृजबिहारी पांडे की स्मृति सभा में जुटे देश के विभिन्न हिस्सों के वामपंथी नेता पटना। भूमिहीन गरीब किसानों के ऐतिहासिक नक्सलबाड़ी उभार के दौर के...
पुस्तक

स्मृतियों के कथ्य में जीवनानुभव की अभिव्यक्ति

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राम विनय शर्मा ‘ग़ाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल’ पत्रकार और लेखक उर्मिलेश के संस्मरणों का संकलन है। ‘प्रमुखतः इसमें साहित्य-संस्कृति और मीडिया से सम्बद्ध लोगों, प्रसंगों...
कविता

सतीश छिम्पा की कविताएँ अपने समय से किये गए बेचैन सवाल हैं

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अनुपम त्रिपाठी सतीश जी राजस्थान के रहने वाले हैं. इनके तीन कविता संग्रह ‘लहू उबलता रहेगा’ (फिलिस्तीन के मुक्ति संघर्ष के लिए), ‘लिखूंगा तुम्हारी कथा’, ‘आधी...
जनमत

राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना के विरोध में 19 से 28 सितंबर तक महाअभियान चलाएगी आईआरईएफ

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वाराणसी। केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना के सम्बंध में पूर्वोत्तर रेलवे वर्कर्स यूनियन से सम्बद्ध आई आर ई एफ़ व ऐक्टू की कार्यकारणी सदस्यों की...
ख़बर

इंकलाबी नौजवान सभा के सम्मेलन में यूपी माँगे रोजगार अभियान चलाने का निर्णय

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वाराणसी। इंकलाबी नौजवान सभा 7वां राज्य सम्मेलन नौ सितंबर को बनारस के भगतसिंह-अम्बेडकर हॉल में आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेश की 28 जिलों के...
कहानी

स्लोवेनियन कहानीकार लिली पोटपारा की कहानी ‘ चाबी ’

समकालीन जनमत
( ‘ चाबी  ‘लिली पोटपारा द्वारा लिखित स्लोवेनियन भाषा की कहानी है। लिली पोटपरा स्लोवेनियन साहित्य की एक प्रसिद्ध व पुरस्कृत लेखिका व अनुवादिका हैं।...
पुस्तक

वैश्विकता और स्‍थानीयता को जोड़ने वाली आत्‍मालोचना युक्‍त भावना

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल ताइवान के वरिष्ठ कवि, आलोचक ली मिन-युंग की कविताएँ आजादी, प्रेम और स्‍वप्‍न की भावनाओं को सहज और सचेत ढंग से स्‍वर देती...
कविता

सोनू यशराज की कविताएँ किताबों से एक स्त्री का संवाद हैं

समकालीन जनमत
आलोक रंजन सोनू यशराज की अधिकांश कविताएँ किताबों को समर्पित हैं और शेष स्त्री प्रश्नों से जुड़ी हुई । किताबों के माध्यम से रचनाकार ने...
ज़ेर-ए-बहस

आलोचनात्मक साहित्य को सेंसर करना देश को कमजोर बनाता है:लेखक और सांस्कृतिक संगठन

समकालीन जनमत
सिलेबस से बाहर की गई रचनाओं को बहाल करे दिल्ली विश्वविद्यालय- दस संगठनों का संयुक्त बयान साम्प्रदायिक फासिस्ट शक्तियां स्वभावतः साहित्य, संस्कृति और वैज्ञानिक शिक्षा...
कविता

प्रेम की अँजोरिया फैलाती हैं नीरज की कविताएँ

समकालीन जनमत
रमण कुमार सिंह अवधी पृष्ठभूमि के कवि नीरज की कविताएँ किसान जीवन और संस्कृति से हमारा साक्षात्कार कराती हैं। सबसे ज्यादा आकर्षित करती है उनकी...
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