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राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना के विरोध में 19 से 28 सितंबर तक महाअभियान चलाएगी आईआरईएफ

वाराणसी। केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना के सम्बंध में पूर्वोत्तर रेलवे वर्कर्स यूनियन से सम्बद्ध आई आर ई एफ़ व ऐक्टू की कार्यकारणी सदस्यों की नौ सितम्बर को बसुन्धरा कालोनी में बैठक हुई, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के रेलवे समेत देश की परिसंपत्तियों को निजी हाथों में देने के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा गया कि रेलवे को बेचने के किसी भी प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया जाएगा। केन्द्र सरकार का देश की परिसम्पत्तियों का सिर्फ छह लाख करोड़ में मौद्रीकरण करना देश में फिर से कंपनी राज स्थापित करने का बड़ा षड्यंत्र है। यह देश के लिए शहादत देने वाले हजारों शहीदों का अपमान है।

केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना की घोषणा की है जिसमें मुख्यतः रेलवे के 40 रेलवे स्टेशन, 90 यात्री गाडि़यां, 15 स्टेडियम, असंख्य रेलवे कालोनियां, गुड्स शेड, मालगाड़ी के गलियारे, 25 हवाई अड्डे, सड़कें, कारखाने आदि बहुत ही सम्पत्तियों को चिह्नित किया गया है, जिसकी मौद्रिक वैल्यू मात्र छह लाख करोड़ बताई गई है, जबकि इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। यह परिसपंत्तियां देश का बुनियादी ढांचा है जिसको देश के लोगों ने कई दशकों की कड़ी मेहनत एवं करोड़ों रुपये खर्च करके विकसित किया है। देश का जो चहुमुखी विकास संभव हो पाया है इसमें इन परिसंपत्तियों का महत्वपूर्ण योगदान है।

पूर्वोत्तर रेलवे वर्कर्स यूनियन संगठन मंत्री व इंडियन रेलवे इम्प्लाईज फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ कमल उसरी ने कहा कि रेलवे की परिसंपत्तियों को मुद्रीकरण कर देशी-विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में सौंपा जाता है तो इससे यात्री किराए एवं माल भाड़े की दरों में बेतहाशा वृद्धि होगी, देश की जनता का देशी-विदेशी कम्पनियाँ शोषण करेंगी।

उन्होंने कहा कि माल भाड़े की दरों में सैकड़ों गुणा वृद्धि होगी, इससे वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी, देश में मंहगाई बढ़ जाएगी, क्योंकि निजी कम्पनियों का एकमात्र लक्ष्य मुनाफा कमाना होता है। भारत एक कल्याणकारी राज्य है, इसलिए रेलवे देश के लोगों को सस्ती सुगम यात्रा एवं माल ढोने की सुविधाएं “नो प्रॉफिट नो लॉस” के आधार उपलब्ध करवाती है।

मीटिंग में शामिल पदाधिकारियों ने कहा कि इससे भारतीय रेल के ढांचे में इससे देशी-विदेशी कम्पनियों का सीधा प्रवेश देश की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा के लिए भी गम्भीर खतरा पैदा कर सकता है, देशी विदेशी कम्पनियां रेलवे के संसाधनों का व मुनाफ़े का दोहन करेंगी। स्टेडियमों को निजी हाथों में देना बहुत बड़ा षड्यंत्र है, रेलवे ने देश को असंख्य ओलिम्पिक खिलाड़ी दिए जिन्होंने देश का नाम रोशन किया है। निजी कम्पनियां खिलाडि़यों का भी शोषण करेंगी, खेल स्टेडियम स्टेडियमों के निजीकरण से खेल प्रतिभाओं का विकास रुक जाएगा।

बैठक में फ्रंट अगेंस्ट एन पी एस इन रेलवे के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड राजेन्द्र कुमार पाल ने कहा कि केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना को देश में फिर से कम्पनी राज स्थापित करने का षड्यंत्र मानती हैं, इसलिए हम केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय परिसम्पत्तियों के मुद्रीकरण कर निजी कंपनियों को देने के फैसले के ख़िलाफ़ समस्त रेलवे में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन करते हुए 19 सितंबर, 2021 से 28 सितंबर, 2021 तक महाअभियान चलाएगें, वह सरकार की राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना के खिलाफ देश भर के मज़दूरों, किसानों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, विद्यार्थियों एवं महिलाओं को लामबंद कर बड़े आन्दोलन की और जाएंगे।

बैठक की अध्यक्षता पूर्वोत्तर रेलवे वर्कर्स यूनियन के जोन अध्यक्ष कॉमरेड मधुसुदन मगन ने की, बैठक में केंद्रीय पदाधिकारी कॉमरेड राकेश कुमार पाल, कॉमरेड छोटेलाल जी, कॉमरेड महेन्द्र कुमार ,जय प्रकाश, सुनील कुमार, प्रदीप, सुनीता, अनिल कुमार, राजू प्रसाद, श्याम सिंह, दिनेश कुमार, वीर पाल सिंह इत्यादि शामिल रहे थे।

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