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100 से अधिक शिक्षक-कर्मचारी संगठन सरकार के खिलाफ लामबंद, 30 नवम्बर को महारैली की घोषणा

कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच का गठन किया, योगी सरकार पर कर्मचारियों-शिक्षकों के अधिकार छीनने का आरोप लगाया 

लखनऊ। प्रदेश के 100 से अधिक कर्मचारी व शिक्षक संगठनों ने कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच का गठन करते हुए योगी सरकार पर कर्मचारियों व शिक्षकों का शोषण करने, उनके अधिकार को छीनने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। आंदोलन के तहत पांच अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर मोटरसाइकिल रैली निकालने, आठ अक्टूबर को प्रदेश जिला मुख्यालयों पर धरना और 30 नवम्बर को लखनऊ के इको गार्डेन में महारैली करने का निर्णय लिया है।

यह घोषणा 15 सितम्बर को लखनऊ में एक पत्रकार वार्ता में की गई है। पत्रकार वार्ता में मंच के अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा, प्रधान महासचिव सुशील कुमार त्रिपाठी, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी, जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पांडेय, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री डाॅ. आरपी मिश्रा, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राम राज दुबे, वर्कचार्ज कर्मचारी महासंघ लोक निर्माण विभाग के अध्यक्ष भरत यादव, नगर निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष आनन्द वर्मा, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के शिवशंकर पांडेय, उत्तर माध्यमिक शिक्षक संघ के नरेन्द्र कुमार वर्मा उपस्थित थे।

पत्रकार वार्ता में शिक्षक व कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के 20 लाख से अधिक कर्मचारी व शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु संघर्ष करने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार कर्मचारी व शिक्षकों का शोषण कर रही है। इस सरकार के कार्यकाल में कर्मचारी, शिक्षकों को लगातार क्षति पहुंचायी जा रही है। प्रदेश के लाखों कर्मचारी व शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और पुराने पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं क्योंकि पेंशन के नाम पर उनके वेतन से कराड़ों रूपए की कटौती करके शेयर बाजार में झोंका जा रहा है और सरकार कर्मचारी के सेवानिवृत्त के समय सुनिश्चित पेंशन देने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

मंच के नेताओं ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारी व शिक्षकों का 18 महीने के महंगाई भत्ते का लगभग दस हजार करोड़ रुपए सरकार डकार गई है। नगर प्रतिकर भत्ता, कम्प्यूटर भत्ता, परियोजना भत्ता, स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता, परियोजना भत्ता, द्विभाषीय भत्ता समेत 10 से अधिक भत्ते सरकार द्वारा समाप्त करके कर्मचारी व शिक्षकों के पेट पर लात मारी गई है। 45 हजार वेतन पाने वाले शिक्षा मित्र को आज दस हजार पर लाकर भुखमरी के कगार पर खड़ा कर दिया गया है। हजारों शिक्षा मित्र अवसाद ग्रस्त होकर आत्महत्या कर चुके हैं। अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार से घटाकर सात हजार कर दिया गया है। प्रदेश के वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षकों का मानदेय समाप्त करके उनके परिवार के साथ कुठाराघात किया गया है। कस्तूरबा गाधी बालिका विद्यालय के दो हजार से अधिक शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया गया हैं। बेसिक स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के एक लाख से अधिक पद समाप्त कर करके शिक्षकों के पदोन्नति के अवसर समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव के बार-बार निर्देश के बावजूद भी कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं की जा रही है। कलेक्ट्रेट को विशेष प्रतिष्ठा प्रदान करते हुए ग्रेड वेतन उच्चीकरण के सम्बन्ध में राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश की संस्तुति के उपरान्त शासन ने माह जनवरी 2019 में पत्र दिया कि इसे कैबिनेट ले जाकर शासनादेश निर्गत किया जाएगा जो आज तक शासनादेश निर्गत न होने से कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।

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