जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी विष्णु खरे की याद

अशोक पाण्डे अलविदा विष्णु खरे – 1 जबरदस्त कवि, बड़े सम्पादक, सिनेमा और संगीत के अध्येता, गंभीर पाठक, भाषाओं और यारों के धनी उस आदमी की महाप्रतिभा का हर कोई कायल रहा. असाधारण उपलब्धियों और आत्मगौरव से उपजे उनके नैसर्गिक दंभ का भी मैं दीवाना था. उनका दंभ उन पर फबता था. ऐसा कोई दूसरा आदमी अभी मिलना बाकी है जिसके बारे में ऐसा कह सकूं. उनके अद्वितीय जीवन का विस्तार इतना विराट था कि भले-भलों की कल्पना तक वहां नहीं पहुँच सकती. बौनों से भरे साहित्य-संसार दुनिया में वे…

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चार आयामों का एक कवि विष्णु खरे

मंगलेश डबराल   यह बात आम तौर पर मुहावरे में कही जाती है कि अमुक व्यक्ति के न रहने से जो अभाव पैदा हुआ है उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा. लेकिन विष्णु खरे के बारे में यह एक दुखद सच्चाई है की उनके निधन से जो जगह खाली हुई है, वह हमेशा खाली रहेगी. इसलिए की विष्णु खरे मनुष्य और कवि दोनों रूपों में सबसे अलग, असाधारण और नयी लीक पर चलने वाले व्यक्ति थे. वे कवि,आलोचक, अनुवादक, शास्त्रीय और फिल्म संगीत के गहरे जानकार, सिमेमा के मर्मज्ञ और पत्रकार…

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वैज्ञानिक दृष्टि और आलोचनात्मक यथार्थ वाले विचार संपन्न कवि थे विष्णु खरे: आलोक धन्वा

विष्णु खरे जनता के आक्रोश के संगठित होने की कामना करने वाले कवि हैं। उनकी कविताएं जनसाधारण के जीवन के दृश्यचित्रों की तरह हैं। वर्णनात्मकता और संवेदना के साथ उनकी कविताएं विचार और तर्क के गहन सिलसिले की वजह से महत्वपूर्ण हैं। उनकी कविताएं हमारे संस्कारों और रूढ़ विचारों को बदलने की क्षमता रखती हैं।

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विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं किया

विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी परहेज़ नहीं किया। झूठ के घटाटोप से घिरी हमारी दुनिया में ऐसे लोग बहुत कम रह गए हैं। निर्मम आलोचना की यह धार बगैर गहरी पक्षधरता और ईमानदारी के सम्भव नहीं हो सकती थी। बनाव और मुँहदेखी उनकी ज़िंदगी से ख़ारिज थे। चुनौतियों का सामना वे हमेशा सामने से करते थे। अडिग-अविचल प्रतिबद्धता, धर्मनिरपेक्ष-प्रगतिशील-जनवादी दृष्टि और विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष करने का अप्रतिम साहस हमारे…

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