हवालात : वैचारिक सौंदर्य का संवेदक परिदृश्य

राजेश कुमार नेमिचन्द्र जैन के नौ लघु नाटक संग्रह में एक नाटक ‘ हवालात’ है, जिसके लेखक हैं सर्वेश्वर दयाल सक्सेना। नेमिचन्द्र जी ने इस नाटक को लघु नाटक के नाम से संबोधन किया है लेकिन युवा निर्देशक पीयूष वर्मा ने कथ्य में बगैर कोई कांट- छांट किये बल्कि धूमिल की कुछ कविताएँ जोड़कर एक सम्पूर्ण नाटक का रूप दे दिया है। आजकल नए या सीनियर निर्देशक जहां ऐसे नाटक से बचते हैं, ऐसे सवाल से कटते हैं, पीयूष वर्मा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के नाटक को समसामयिक , प्रासंगिक बनाने…

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‘ जो बंदिशें लगाते हैं, वे लगाएँगे, जो उन्हें गाते हैं, वो गाएँगे ’

‘ बंदिश ‘ नाटक पुराने और नए कला परिदृश्य के बीच बदलते सांस्कृतिक संसार की झलक तो उभारता ही है, साथ ही वह संस्कृति और सत्ता के सम्बंध की जटिलता को भी उभारने की कोशिश करता है.

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