समकालीन जनमत
नाटक

‘ जो बंदिशें लगाते हैं, वे लगाएँगे, जो उन्हें गाते हैं, वो गाएँगे ’

‘कोरस’  द्वारा आयोजित ‘ आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ ’ नाट्योत्सव के दूसरे दिन पूर्वा नरेश निर्देशित ‘बंदिश: 20-20,000 हर्टज़’ और ‘ हमें बोलने दो ’ की प्रस्तुति

पटना, 4 जून.  कोरस नाट्य समूह द्वारा आयोजित ‘ आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ ’ नाट्योत्सव का दूसरा दिन (दो जून) दो नाट्य प्रस्तुतियों से सज़ा था. शाम 5:30 बजे चर्चित रंगकर्मी राजेश कुमार लिखित ‘हमें बोलने दो’ शीर्षक नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति ‘धमार फ़ाउंडेशन’ ने की, जिसकी निर्देशक रूबी खातून हैं.

पत्रकारिता व अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सत्ता के हमलों और समकालीन राजनीतिक परिदृश्य की विद्रूपताओं और व्यंग्य-सम्वादों और चुभते गीतों के सहारे अभिव्यक्ति देने वाला यह नाटक दर्शकों द्वारा ख़ूब सराहा गया.

इसके बाद मुम्बई से आयी ‘आरम्भ मुम्बई प्रोडक्शन टीम’ ने ‘बंदिश: 20-20,000 हर्टज़’ नाटक का मंचन किया. युवा निर्देशक पूर्वा नरेश, महिला सवाल उठाने वाले नाटकों के लिए जानी जाती हैं. उनके काम की गम्भीरता को विदेशों में भी सराहा गया और उन्हें 2014 में यूएनडीपी समर्थित लाडली मीडिया एवार्ड से  नवाज़ा गया.

यह नाटक पुराने और नए कला परिदृश्य के बीच बदलते सांस्कृतिक संसार की झलक तो उभारता ही है, साथ ही वह संस्कृति और सत्ता के सम्बंध की जटिलता को भी उभारने की कोशिश करता है.

एक ग्रीनरूम की कहानी दो पीढ़ी के कलाकारों के बीच बदलती दुनिया से दर्शकों का साक्षात्कार कराती है. दो पुरानी और दो नई गायिकाएँ, आज़ादी की सत्तरवीं सालगिरह का जलसा, एक गायिका पर प्रतिबंध, दूसरी का गाने से इंकार: इन्हीं घटनाओं के इर्द-गिर्द निर्देशक ने एक विचारोत्तेजक दुनिया रची है. बंदिश के दो अर्थ इस नाटक से दर्शकों पर खुलते हैं: एक संगीत की बंदिश और दूसरा प्रतिबंध. साथ ही कला की दुनिया के इतिहास की रसमय यात्रा दर्शक के सामने खुलती जाती है.

हमारे वक़्त की बेहतरीन गायिका शुभा मुद्गल द्वारा संगीतबद्ध यह नाटक गायकी के शिखर छूता है. भारतेंदु हरिश्चंद और कैफी आज़मी जैसे ख्यात हिंदी कवियों के गीतों से सजी यह प्रस्तुति दर्शकों को संगीत की दुनिया की आत्मीय सैर पर ले जाती है.

नाटक में कबीर की भूमिका में अखिल प्रताप सिंह, बाबू की भूमिका में हर्ष खुराना, बेनीबाई की भूमिका में निवेदिता भार्गव, मोशुमी की भूमिका में इप्सिता चक्रवर्ती और अनाउंसर की भूमिका में सारिका सिंह थे. चम्पा की भूमिका निभा रही अनुभा फतेहपुरिया को अभिनय के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है.

 

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