‘वे दर्ज होंगे इतिहास में/पर मिलेंगे हमेशा वर्तमान में/लड़ते हुए/और यह कहते हुए कि/स्वप्न अभी अधूरा है

भारतीय जनता के महानायक और भाकपा माले के संस्थापक महासचिव कामरेड चारू मजूमदार की 46 वें शहादत दिवस को लखनऊ के लेनिन पुस्तक केन्द्र में संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया.

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कृषि अर्थव्यवस्था पर हमला है गौ रक्षा कानून

देश के जिन राज्यों में भी गौ रक्षा कानून लागू किया गया है मेरे खुद के सर्वे के अनुसार उन राज्यों में गौ-वंश की संख्या दो तिहाई तक कम हो गयी है. इससे देश भर में घाटे की खेती की मार झेल रहे छोटे व मध्यम किसानों के सामने आर्थिक संकट ज्यादा गहरा गया है. हमारे देश में छोटी व माध्यम जोतों की संख्या अस्सी प्रतिशत के करीब है. इसमें भी बहुतायत छोटी जोतों की है. यही कारण है कि यहाँ छोटी खेती या ग्रामीण मजदूरी पर निर्भर हर परिवार…

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड :बिहारी समाज पहले दिन से आंदोलित है

कुमार परवेज मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड को मीडिया में अब जगह मिल रही है क्योंकि इसे अब दबाया नहीं जा सकता. दबाने के बहुत प्रयास हुए थे, लेकिन बिहारी समाज ने ऐसा होने नहीं दिया. घटना की जानकारी के पहले दिन से ही वह लड़ रहा है, पता नहीं रवीश कुमार ने ने अपने लेख में ऐसा क्यों लिखा कि सांस्थानिक यौन उत्पीड़न की ऐसी वीभत्स घटना पर बिहारी समाज सोता रहा. नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. मुजफ्फरपुर के अखबारों में 2 जून को यह घटना सामने आई. उसके…

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अमरेंद्र की अवधी कविताएँ: लोकभाषा में संभव राजनीतिक और समसामयिक अभिव्यक्तियाँ

( कवि-कथन : अवधी में कविता क्यों ? मुझसे मुखातिब शायद यही, किसी का भी, पहला सवाल हो। जवाब में कई बातें हैं लेकिन पहला कारण यही है कि जैसी सहजता मैं अपनी मातृभाषा अवधी में पाता हूँ वैसी कहीं दूसरी जगह नहीं। यह सहजता ‘प्रथम भाषा’ होने की सहजता है। यह सहजता वैसे ही है जैसे घर-गाँव में किसी रहवासू की होती है। नागर व औपचारिक जीवन के बरअक्स। सभ्यता के बहुत से भाषायी आवरण भी होते हैं जिनकी लपेट में भाषा अक्सर बँध जाती है। भाषायी मानकीकरण भी…

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