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महिला संगठनों ने भाई के अत्याचार से त्रस्त मीरा के गायब होने पर पुलिस पर उठाए सवाल

लखनऊ। महिला संगठनों ऐपवा , ऐडवा, महिला फेडरेशन, हमसफर, साझी दुनिया, आली ने लखनऊ के पवनपुरी कालोनी देवीखेड़ा आशियाना मे रहने वाली मीरा यादव को थाने ले जाए जाने के बाद पता नहीं चलने पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठााए हैं। महिला संगठनों ने पूछा है कि पुलिस कहती है कि मीरा यादव को गिरफ़्तार कर जेल भेजा गया है जबकि न उसे कचहरी लाया गया न तो उससे संबंधित कोई कागज ही आया है। आखिर मीरा यादव कहां गयी ?

महिला संगठनों के अनुसार मीरा यादव अपने भाई के अत्याचार से वर्षों से त्रस्त है। वह अपने पिता के घर में रहती है । साल 2009 में हुए दुर्घटना के बाद अपाहिज हो चुकी मीरा अविवाहित है और अपने पिता के घर मे ही रहकर अपना जीवन जी रही है । मीरा की मां का दो साल पहले निधन हो चुका है । मीरा का आरोप है कि उनका भाई रंजीत कुमार यादव संपत्ति के लालच में उनकी जान का दुश्मन बना हुआ है । रंजीत अपराधी प्रवृत्ति का है जो अतीत में 307 , 302 जैसी संगीन धाराओं का आरोपी रहा है, जिसमे वह जेल भी जा चुका है । मीरा का आरोप है कि उनके भाई रंजीत ने बदनीयती से उनके साथ छेड़खानी की, जिसका विरोध करने पर उसने उन्हें जान से मार देने की धमकी दी। इसकी शिकायत लेकर मीरा 4 जुलाई को आशियाना थाने मे गयी जहां उनकी शिकायत यह कहकर नहीं लिखी गयी कि ये परिवारिक मामला है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते ।

इसके बाद मीरा बड़ी उम्मीद से महिला थाने गयी लेकिन उनको वहां भी निराशा ही हाथ लगी । महिला थाने के गेटमैन ने उन्हें गेट से ही भगा दिया । इसके बाद मीरा ने राष्ट्रीय महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया और 31 जुलाई 2020 को महिला आयोग में केस रजिस्टर करवाया। तीन अगस्त 2020 को महिला आयोग ने पुलिस से इस केस से सबंधित रिपोर्ट मांगी। 8 अगस्त को कैंट ने फोन कर मीरा को बयान देने के लिए बुलाया था । मीरा ने बताया कि जो उन्होंने बताया वह रिपोर्ट में नहीं लिखा है । इस बीच मीरा यादव ने ऐपवा की प्रदेश ज्वाइंट सेक्रेटरी मीना सिंह से सम्पर्क किया और मदद मांगी।

पांच अगस्त को उसके भाई ने घर की लाइट काट दी और रात 9 बजे के आसपास उसको घर से निकाल दिया । उसके बाद मीना सिंह ने फोन करके चैकी इंचार्ज से बात की। चैकी इंचार्ज ने कहा कि मैं कुछ नहीं कर सकता ये इनका घरेलू मामला है। दबाव बनाने पर उस दिन मीरा को घर मे घुसने दिया लेकिन इस बीच रंजीत यादव ने तीन बार घर की बिजली काट दी । अब बिजली विभाग वालो ने कहा कि ये आपका घरेलू मामला है। हम लोग बार बार बिजली ठीक करने नहीं आएंगे। ऐपवा के हस्तक्षेप के बाद इस धमकी के साथ बिजली जोड़ी गयी कि हम दुबारा ठीक करने नहीं आएंगे।

11 अगस्त को रंजीत अपने दोस्तों के साथ जाकर मीरा के साथ गाली गलौज करना शुरू कर दिया और धमकियां देने लगा कि घर से चली जाओ नहीं तो जान से मार देंगे। घबराकर मीरा कहीं से मदद नहीं मिलने पर अपनी दोस्त के घर चली गई। दो दिन बाद 13 अगस्त को रंजीत ने सुबह 4 बजे उसके घर का ताला तोड़ दिया और उसके जेवर रुपये पैसे तथा घर का सारा सामान टेम्पो में लादने लगा। तब मीरा के पड़ौसी ने फोन कर मीरा को ये सब बताया । मीरा 6 बजे सुबह घर पहुंची। इस बीच मीरा ने फिर चैकी इंचार्ज मदद से की गुहार की तो इस बार कहा गया मैं कुछ नहीं कर सकता 11 बजे थाने जाना । मीरा उसे समान ले जाने से मना करने लगी इस पर रंजीत ने अपना आपा खो दिया और मीरा को पीटने लगा और उसका फोन भी छीन लिया । जब उसको बचाने के लिए मीरा की बहन की लड़की आयी उसको भी मारा पीटा । सूचना मिलने पर ऐपवा नेता मीना सिंह ने पुलिस को फोन कर उसकी जान बचाने की अपील की तब जाकर मौके पर चैकी इंचार्ज पहुचें और दोनों को आशियाना थाने ले आये ।

इसके बाद मीरा से बात नहीं हो पा रही थी । वकील को थाने भेजा गया तब पुलिस ने बताया कि धारा 107 और 116 में जेल भेज रहे है। रंजीत को भी धारा 151 में भेज रहे है । रात 7 बजे तक कुछ पता नहीं चला तो आली महिला संगठन से लोगो ने 5 थानों पर जाकर पता किया तब विभूति खण्ड थाने से बताया गया कि उन्हें जेल भेज दिया है। 14 अगस्त को मीरा के वकील ने कोर्ट में जाकर पता किया तो पता चला कि कचहरी में नही लाया गया है न ही उससे संबंधित कोई कागज ही आया है।

यह रिपोर्ट लिखे जाने तक मीरा के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

महिला संगठनों ऐपवा , ऐडवा, महिला फेडरेशन, हमसफर, साझी दुनिया, आली आदि ने पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है और मीरा के लिए न्याय की मांग की है।

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