Wednesday, May 18, 2022
Homeख़बरकिसान आंदोलन को जीत की मंजिल तक पहुंचाना इस दौर का मुख्य...

किसान आंदोलन को जीत की मंजिल तक पहुंचाना इस दौर का मुख्य उद्देश्य : दीपंकर भट्टाचार्य

राज्य सम्मेलन पहले दिन लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की हत्या के खिलाफ सामूहिक उपवास में बदला

लखनऊ। भाकपा (माले) का तीन दिवसीय 13 वां राज्य सम्मेलन हरगांव (सीतापुर) में सोमवार को शुरू हुआ। शुरू होने के साथ ही सम्मेलन, लखीमपुर खीरी में शनिवार को हुई किसानों की हत्या के विरोध में प्रतिवाद दर्ज कराते हुए भूख हड़ताल में बदल गया।

राज्य सम्मेलन का उद्घाटन भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज हम ऐसे दौर में हैं, जहां सम्मेलन और आंदोलन में फर्क नहीं बचा है। यह बात हमारे आज के सम्मेलन का सन्दर्भ लेकर समझी जा सकती है। हमने अपने राज्य सम्मेलन को लखीमपुर खीरी में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देते हुए शुरू किया तथा किसानों की हत्यारी इस सरकार के खिलाफ लड़ने के अपने जज्बे को मजबूत करने के लिए समर्पित किया है।

माले महासचिव ने कहा, आज हमारे देश में भिन्न-भिन्न आंदोलनों के बहुतेरे रूपों में बदलने और देश भर में फैल जाने की घटना घट रही है। इन व्यापक आंदोलनों को रोकने और उनका दमन करने के लिए सरकार हर तरह के हथकंडे अपना रही है, लेकिन इससे प्रतिरोध का तेवर धीमा होने के बजाय और तीव्र होता जा रहा है। सरकार ने किसान आंदोलन के खिलाफ भी तमाम दुष्प्रचार किये, इसे खालिस्तानी साजिश बताया। लेकिन ऐसी कोई भी तरकीब किसान आंदोलन को कमजोर करने में काम नहीं आयी।

दीपंकर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का घटनाक्रम यह बताता है कि सरकार लोकतंत्र का अपहरण करने की हद तक दमन करने की नीयत बना कर बैठी है। हमें यह संकल्प लेना होगा कि किसान आंदोलन के इस निर्णायक दौर में इसे जीत के मंज़िल तक पहुंचाने के लिए हम अपना सब कुछ झोंक दें। हमें यह बात पूरी शक्ति के साथ कहनी होगी कि अगर काले कृषि कानूनों को हटाना है, तो मोदी सरकार को भी हटाना होगा। इसकी शुरुआत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी सरकार को हटाने से करनी होगी।”

उद्घाटन सत्र को राज्य सम्मेलन के केंद्रीय पर्यवेक्षक व पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेंद्र झा (बिहार), राज्य सचिव सुधाकर यादव, सीतापुर के किसान नेता सुरजीत सिंह, पार्टी राज्य स्थायी समिति के सदस्य ओमप्रकाश सिंह व अफ़रोज़ आलम ने सम्बोधित किया।

इससे पहले, सम्मेलन की शुरुआत वरिष्ठ माले नेता व अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड जयप्रकाश नारायण द्वारा झंडोत्तोलन से हुई। उद्घाटन सत्र में आए प्रतिनिधियों, पर्यवेक्षकों व अतिथियों का स्वागत माले जिला सचिव व निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य अर्जुन लाल ने किया। लखीमपुर खीरी में किसान हत्या मामले में घटनास्थल पर गए भाकपा (माले) नेताओं की टीम की रिपोर्ट इस दल के सदस्य ओमप्रकाश सिंह ने रखी।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे माले नेता जयप्रकाश नारायण ने किसान आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए कहा कि, “लखीमपुर खीरी की ज़मीन नक्सल आन्दोलन की ज़मीन रही है। शनिवार की घटना के बाद से किसान आंदोलन वहां पर अपनी एक पहचान के साथ उभर रहा है, जो कि ऐतिहासिक जज़्बे को प्रदर्शित करता है। तीन कृषि कानून भारत के शासक वर्ग के अस्तित्व को बचाने की पहल है, इसीलिए इन्हें भारतीय किसानों पर जबरन थोपा जा रहा है।” सत्र का संचालन इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष राकेश सिंह ने किया।

उपरोक्त के अलावा, केंद्रीय समिति के सदस्य व पार्टी के हिंदी मुखपत्र समकालीन लोकयुद्ध के संपादक संतोष सहर (पटना), पोलित ब्यूरो सदस्य व उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी रामजी राय, जीरा भारती, रामप्यारे, शशिकांत कुशवाहा सहित पूरे प्रदेश से आए प्रतिनिधि उद्घाटन सत्र में शामिल रहे।

सम्मेलन छह अक्टूबर बुधवार तक चलेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments