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संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में बड़ी एकता की जरूरत : दीपंकर भट्टाचार्य

इंसाफ मंच का तीसरा राज्य सम्मेलन, गोपाल रविदास अध्यक्ष और कयामुद्दीन अंसारी सचिव चुने गए, 71 सदस्यीय राज्य परिषद का गठन 

पटना। ” आज देश की नींव पर हमला हो रहा है. आरएसएस-भाजपा द्वारा हिंदू राष्ट्र का खुलेआम आह्वान किया जा रहा है और हर दिन व हर स्तर पर संविधान को कुचला जा रहा है. देश में अल्पसंख्यक, दलित व महिलाएं निशाने पर है. अमेरिका में जब एक पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि भारत में लोकतंत्र व संविधान सबकुछ खतरे में है, तो मोदी जी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ऐसा नहीं है. लोकतंत्र हमारे रगों में है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता. लेकिन उसके दो दिन बाद ही उनकी ही पार्टी के असम के मुख्यमंत्री ने उनकी पोल खोलते हुए कहा कि भाजपा की प्राथमिकता देश के अंदर के बराक हुसैन ओबामाओं को जेल में पहले डालने की है, उसके बाद किसी के बारे में सोचा जाएगा. यही आज के भारत का सच है. “

यह बातें इंसाफ मंच के तीसरे राज्य सम्मेलन में मुख्य अतिथि भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कही। यह सम्मेलन 25 जून को पटना के गेट पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित किया गया था।

उन्होंने कहा कि आज हिंदुस्तान में उन्माद-उत्पात कोई अपवाद की घटना नहीं बल्कि एक नियम बन गया है. पूरे देश में आतंक का शासन चल रहा है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में एक बड़ी एकता कायम की जाए, हम एक दूसरे का सुख-दुख समझें और एकताबद्ध होकर भाजपा को राज व समाज से बेदखल करें।

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज से 10 साल पहले इंसाफ मंच की शुरूआत हुई थी. 2013 में मोदी की रैली के दौरान गांधी मैदान में एक तथाकथित बम ब्लास्ट हुआ था और पूरे बिहार में उसके नाम पर मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी का सिलसिला चल पड़ा था. तब इंसाफ मंच ने पूरी बहादुरी के साथ उसका प्रतिकार किया था और मोदी व भाजपा के झूठ का पर्दाफाश किया था.

इसके पूर्व इंसाफ मंच के निवर्तमान सचिव कयामुद्दीन अंसारी ने सभी अतिथियों का मंच पर स्वागत किया. सम्मेलन में माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, सत्येदव राम, मनोज मंजिल, सुदामा प्रसाद, वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल, खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा, मीना तिवारी, केडी यादव सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे. 13 सदस्यों के अध्यक्ष मंडल के नेतृत्व में सम्मेलन की शुरूआत हुई. अध्यक्ष मंडल में आसमां खान, आफशा जबीं, शाह शाद, नेयाज अहमद, अनवर हुसैन सहित अन्य लोग शामिल थे.

प्रतिनिधियों ने अपने विगत तीन सालों के कामकाज की रिपोर्ट की समीक्षा की और अपने-अपने विचार रखे. सबने यह महसूस किया कि फासीवाद का सबसे तीखा हमला दलितों, मुसलमानों और महिलाओं पर ही है. इसलिए वक्त का तकाजा है कि उत्पीड़ित समुदाय आज मिलकर चले और अपनी चट्टानी एकता बनाए.

महबूब आलम ने अपने संबोधन में कहा कि देश में फासीवाद के खतरे की एकदम ठीक समय पर पहचान करते हुए बिहार में दलितों, मुस्लिमों, महिलाओं और कमजोर समुदाय के हक व इंसाफ की आवाज को बुलंद करने के लिए इंसाफ मंच का गठन हुआ था. तीसरा बिहार राज्य सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब फासीवादी गिरोह का हमला अपने चरम पर पहुंच गया है।

सम्मेलन से फुलवारी के विधायक गोपाल रविदास अध्यक्ष और कयामुद्दीन अंसारी सचिव चुने गए. गया के वरिष्ठ अधिवक्ता फैयाज हाली को सम्मानित अध्यक्ष बनाया गया। सम्मेलन से 71 सदस्यों की नई राज्य परिषद का भी गठन किया गया।

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