समकालीन जनमत

Tag : संजय कुंदन

पुस्तक

‘गहन है यह अंधकारा’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण कोई भी भाषा हो वह दुर्जनों की ज़बान से बोले जाते समय कसमसाती होगी। जो ग़लत और झूठ बोला जा रहा है और...
कविता

संजय कुंदन की कविताएँ स्थगित प्रश्नकाल में ख़तरनाक सवाल की उपस्थिति हैं।

उमा राग
अरुण आदित्य संजय कुंदन की कविताओं में गूंजती विविध आवाजों को सुनें तो लगता है कि शास्त्रीयता के बोझ से मुक्त यह कविता दरअसल कविता...
पुस्तक

ज़ीरो माइल पटना : तीन धाराओं से बनी किताब

समकालीन जनमत
पटना, 21 दिसंबर। जिस तरह पटना तीन नदियों से घिरा है उसी तरह संजय कुंदन की किताब भी कहानी, उपन्यास और कविताओं से मिलाकर बनी...
कविता

उज्ज्वल भट्टाचार्य की कविताएँ जनविरोधी व्यवस्था में ख़ुद के होने की शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
संजय कुंदन हिंदी कविता की सुपरिचित मुख्यधारा के भीतर कई नियमित-अनियमित अंतर्धाराएं हैं, जो बिना मुखर हुए हिंदी कविता को विस्तृत कर रही हैं। उज्ज्वल...
शख्सियत

अर्नेस्तो ‘चे’ ग्वेराः नये मनुष्य के निर्माण का स्वप्न

समकालीन जनमत
संजय कुंदन बीते नौ अक्टूबर को महान क्रांतिकारी अर्नेस्तो चे ग्वेरा की शहादत को दुनिया भर में याद किया गया। इस मौके पर बीस वामपंथी...
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