जनमतशख्सियतसिनेमा ज़मीर को हर शै से ऊपर रखने वाले मंटोसमकालीन जनमतSeptember 23, 2018 by समकालीन जनमतSeptember 23, 201803432 अखिलेश प्रताप सिंह. खुदा ज्यादा महान हो सकता है लेकिन मंटो ज्यादा सच्चे दिखते हैं और उससे भी ज्यादा मनुष्य, क्योंकि मंटो को सब कुछ...
कहानीसाहित्य-संस्कृति गांव की साझी सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन गति और उसके संकट को केन्द्र में रखती है हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’समकालीन जनमतAugust 23, 2018 by समकालीन जनमतAugust 23, 20182 2664 (हाल ही में ‘पल-प्रतिपल’ में प्रकाशित हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’ को हमने समकालीन जनमत पोर्टल पर प्रकाशित किया , जिस पर पिछले दिनों...
कहानीजनमत नेसार नाज़ की कहानी ‘मीरबाज़ खान’दीपक सिंहAugust 15, 2018August 15, 2018 by दीपक सिंहAugust 15, 2018August 15, 201813727 (नेसार नाज़ कथा साहित्य में बहुत परिचित नाम नहीं है | छत्तीसगढ़ के एक निहायत ही छोटे से कस्बे बैकुंठपुर (जो अब जिला मुख्यालय बन...
जनमत ‘कुछ नॉस्टैल्जिया तो है’ हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’ मेंदीपक सिंहAugust 14, 2018August 14, 2018 by दीपक सिंहAugust 14, 2018August 14, 201810 1981 (कथाकार हेमंत कुमार की कहानी ‘ रज्जब अली ’ पत्रिका ‘ पल-प्रतिपल ’ में प्रकाशित हुई है. इस कहानी की विषयवस्तु, शिल्प और भाषा को...
कहानी मो. आरिफ की कहानी ‘ लू ’ : दलितों की अपमानजनक स्थितियों और उनकी जिजीविषा को दर्शाने वाली कहानीप्रियम अंकितAugust 4, 2018April 8, 2020 by प्रियम अंकितAugust 4, 2018April 8, 202002478 मो. आरिफ ने अपने लेखन के शुरूआती दौर में अंग्रेज़ी में एक उपन्यास लिखा था. बाद में उन्होंने हिन्दी में कहानियाँ लिखना शुरू किया. उनकी...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति प्रेमचंद किसान जीवन की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार धरम, महाजन और साहूकार की भूमिका की शिनाख्त करते हैंसमकालीन जनमतAugust 2, 2018 by समकालीन जनमतAugust 2, 201803249 31 जुलाई 2018 को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय , बैकुंठपुर(छत्तीसगढ़) में ‘प्रेमचंद और हमारा समय’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति सत्ता संपोषित मौजूदा फासीवादी उन्माद प्रेमचंद की विरासत के लिए सबसे बड़ा खतरा:डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमनसमकालीन जनमतAugust 1, 2018August 1, 2018 by समकालीन जनमतAugust 1, 2018August 1, 201802639 लोकतंत्र, संविधान और साझी संस्कृति के नेस्तनाबूद करने की हो रही है गहरी साजिश-कल्याण भारती प्रेमचंद के सपनों के भारत से ही बचेगी हमारी साझी...
कहानी ‘ बलिदान ’ : किसान-जीवन त्रासदी और प्रेमचंद की कहानी कलासमकालीन जनमतJuly 31, 2018December 9, 2019 by समकालीन जनमतJuly 31, 2018December 9, 201906904 मेरी अपनी समझ से हिंदी कहानी में ‘जादुई यथार्थवाद’ कला का भ्रूण इस कहानी में देखा जा सकता हैं ,साथ ही कहानी कला की ऊँचाई...
कहानीज़ेर-ए-बहस हेमन्त कुमार की कहानी ‘ रज्जब अली ’ में सामंती वैभव देखना प्रतिक्रियावाद को मजबूत करना हैसमकालीन जनमतJuly 30, 2018July 30, 2018 by समकालीन जनमतJuly 30, 2018July 30, 201802995 कहानी में मूल समस्या साम्प्रदायिकता है. यह कहानी हमारे समय के लिहाज से एक बेहद जरूरी कहानी है. इसलिए जरूरी यह है कि इस कहानी...
कहानी सामंती वैभव के प्रति नॉस्टेल्जिया से ग्रस्त है कहानी ‘ रज्जब अली ’डॉ रामायन रामJuly 25, 2018July 29, 2018 by डॉ रामायन रामJuly 25, 2018July 29, 201803040 ‘ रज्जब अली ’ कहानी में कथाकार बड़ा आख्यान रचने की कोशिश में कई ऐसी गलतियाँ कर बैठे हैं जिसकी वजह से अपने बड़े उद्देश्य...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति पठनीयता का संबंध वास्तविकता से होता हैसमकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 2018 by समकालीन जनमतJuly 1, 2018July 1, 201802851 (प्रेमचंद की परंपरा को नये संदर्भ और आयाम देने वाले हिंदी भाषा के कहानीकारों में अमरकांत अव्वल हैं। अमरकांत से शोध के सिलसिले में सन्...
कविताशख्सियतसाहित्य-संस्कृति जनकवि सुरेंद्र प्रसाद की 84वीं जयंती मनाई गईसमकालीन जनमतJune 2, 2018June 2, 2018 by समकालीन जनमतJune 2, 2018June 2, 201804737 बी. आर. बी. कालेज , समस्तीपुर के सभागार में 17 मई, 2018 को जन संस्कृति मंच और आइसा के संयुक्त तत्वावधान में मिथिलांचल के दुर्धर्ष...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति भारतीय समाज के बदलते वर्गीय एवं जातीय चरित्र को बारीकी से व्यक्त करने वाले कथाकार हैं मार्कण्डेयसमकालीन जनमतMay 2, 2018May 2, 2018 by समकालीन जनमतMay 2, 2018May 2, 20185 4673 मार्कंडेय ने भारतीय समाज के बदलते वर्गीय एवं जातीय चरित्र को बहुत ही बारीकी से अपनी कथाओं में व्यक्त किया है. सामाजिक ताने-बाने एवं राजनीतिक...
कहानी अल्पना मिश्र की कहानी : स्याही में सुर्खाब के पंखसमकालीन जनमतApril 29, 2018April 29, 2018 by समकालीन जनमतApril 29, 2018April 29, 201803904 जनतंत्र में 'जन' को नकार कर या पूरी तरह नियंत्रित मान लेना सही आकलन नहीं होगा, क्योंकि 'जन ' में अभी भी असहमति का साहस...
नाटक मेरी कोख पर मेरा हक कब बनेगा ?मनोज कुमार सिंहApril 22, 2018April 22, 2018 by मनोज कुमार सिंहApril 22, 2018April 22, 20185 2512 गोरखपुर. प्रेमचंद पार्क स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आज शाम पटना से आयी सांस्कृतिक संस्था ‘ कोरस ‘ ने प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति की चर्चित कहानी ‘...