समकालीन जनमत

Category : ज़ेर-ए-बहस

ज़ेर-ए-बहस

लाल बारादरी और ‘ कानून-व्यवस्था ’ का निर्मित संकट

शांतम निधि
22 फरवरी को लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने पाया कि लाल बारादरी को सील कर दिया गया है। न कोई कार्यपालक आदेश प्रदर्शित किया गया,...
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पर्यावरण अब एक राजनैतिक एजेण्डा है

दुर्गा सिंह
आज़मगढ़। जन संस्कृति मंच ने 10 जनवरी 2026 को एक गोष्ठी का आयोजन किया। अरावली संकट के सन्दर्भ में पर्यावरण और संस्कृति विषय पर केन्द्रीय...
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जरूरत है एसआईआर 2.0 के सोशल ऑडिट की

( पूर्व-प्रशासनिक अधिकारी  और वर्तमान में ‘सिटिज़न्स कमीशन ऑन एलेक्शन्स’ के को-अर्डिनेटर एमजी देवसहयाम का यह लेख 18 नवम्बर 2025 को ‘ द हिन्दू ‘...
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निर्यात-अर्थव्यवस्था के ढाँचे में हाशिये पर उत्तर-पूर्व

( शोधकर्ता सैंगमुआन हैंगसिंग का यह लेख  ‘ द हिन्दू ’ में 26 सितंबर को प्रकाशित हुआ है। लेखक कौटिल्य स्कूल ऑफ  पब्लिक पाॅलिसी के...
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फासीवाद को मुँह चिढ़ाता ‘‘ एंटिफा ’’

समकालीन जनमत
( श्रीनिवासन रमानी का यह लेख ‘ द हिन्दू’ में 21 सितंबर को प्रकाशित हुआ है। समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका हिंदी अनुवाद...
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नेपाल का संकट और क्रांति की अधूरी यात्रा

समकालीन जनमत
  शांतम निधि नेपाल में हालिया उथल-पुथल ने पूरे उपमहाद्वीप को चौंका दिया है। एक स्वतःस्फूर्त युवा आंदोलन ने न केवल प्रधानमंत्री से इस्तीफ़ा दिलवा...
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लाल किले से आरएसएस को वैधता या लोकतंत्र विरोधी प्रतिक्रांति की घोषणा

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण    आजाद लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष भारत स्वतंत्रता का 78 वां वर्ष पूरा करते-करते अपने प्रतिलोम में बदल गया है। 15 अगस्त को लाल किले...
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 बहुसंख्यकता एक मिथ है – निवेदिता मेनन

समकालीन जनमत
( अनाइअलेशन ऑफ कास्ट पर विचार मंथन) नई दिल्ली। ‘ भारत में कोई समुदाय बहुसंख्यक नहीं है। बहुसंख्यकता एक मिथ है। इसे बहुत से ब्राह्मणेतर...
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हमें अपने विश्वविद्यालय में राजनीतिक कठपुतली नहीं चाहिए

shantam Nidhi
डॉ. माद्री काकोटी एक ऐसी शिक्षिका हैं जो अपने विद्यार्थियों के लिए पूरी निडरता के साथ खड़ी होती हैं। एक ऐसी नागरिक जो केवल अपने...
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला स्तब्धकारी

समकालीन जनमत
दिनांक 17 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र के द्वारा नाबालिग बच्ची के खिलाफ यौन शोषण के मामले में अपने...
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‘प्रोजेक्ट चीता’ मनुष्यों और पशुओं दोनों के लिये अनैतिक एवं अनुचित हैः अध्ययन  

आथिरा पेरिंचेरी स्थानीय लोगों से इस प्रोजेक्ट के बारे में न तो कोई सलाह-मशविरा किया और न ही उन्हें इसकी कोई जानकारी ही दी गयी...
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भारत में फ़ासीवाद की शिनाख्त: अगर अब नहीं, तो कब ?

सीपीआई(एम) के आगामी 24वें कांग्रेस से पहले पार्टी की पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक आंतरिक नोट, जिसे मीडिया में प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया है,...
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महाबोधि विहार आंदोलन पर मीडिया और बुद्धिजीवी चुप क्यों ?

समकालीन जनमत
केतन यादव 12 फरवरी 2025 से महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन आमरण अनशन के रूप में चालू है। तमाम बौद्ध‌ भिक्षु अन्न‌ आदि त्याग कर बैठे...
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जंजीरों में जकड़े आजादी की धरती पर

समकालीन जनमत
( इसी बीच निर्वासितों के दो जत्थे, 119 और 157 लोगों के, और भी आ चुके हैं, वैसे ही हालात में और उसी हवाई अड्डे...
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आज का कुलीनतंत्र

समकालीन जनमत
अतानु बिस्वास (वैसे तो यह लेख ट्रम्प के चुनाव को लेकर है पर थोड़ा गौर से देखा जाय तो इसके  निहितार्थ की परिधि में भारत...
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जाति, जनगणना और सामाजिक न्याय : अंतरसंबंधों पर कुछ सवाल

राहुल यादुका
राहुल यादुका ये कहना गलत होगा कि हालिया जाति सर्वेक्षण के कारण बिहार या देश की राजनीति में जाति का सवाल फिर से मुख्यधारा में...
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बस्तर पर गहराता अँधेरा

समकालीन जनमत
शुभोमय सिकदार बीजापुर के 33 वर्षीय पत्रकार मुकेश चन्द्राकर की एक दशक की, घटनाओं से भरपूर शानदार पत्रकारिता को सलाम, पर यह भी सच है...
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समाज, महिलाएं और बिहार के जेलों में उनका जीवन संघर्ष

समकालीन जनमत
 पूजा कुमारी   ( यह लेख स्वतंत्र शोधार्थी पूजा कुमारी द्वारा बिहार की जेलों में महिलाओं की स्थिति पर किए गए शोध “ INCARCERATED GENDER...
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