समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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पुस्तक

ललन चतुर्वेदी के कविता संग्रह ‘आवाज़ घर’ की पुस्तक समीक्षा

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 अष्टभुजा शुक्ल ललन चतुर्वेदी छोटी – छोटी कविताओं के ऐसे प्रौढ़ कवि हैं जो घोषित तौर पर ‘ बड़ी कविताएँ ‘ नहीं लिख सकते। कारण...
जनमत

पूनम शुक्ला के कविता संग्रह ‘पिता का मोबाईल नंबर’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण तुम्हारी बातें कुदाल-सी खोदती रहतीं हैं मेरी मिट्टी, जब मिलता है तुम्हारे नेह का जल, हरी-भरी हो जाती हूं- कवि पूनम शुक्ला के...
कविता

अपूर्वा दीक्षित की कविताएँ मन की डोर को थामे रहने की समझ से निर्मित हैं

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पीयूष कुमार संभावनाओं से भरी अपूर्वा की कविताएँ.. समकालीन कविता जहाँ साहित्यिक लोकतंत्र के विस्तार से सम्पन्न हुई है, वहीं विचारहीन युवाओं के इस स्वर्णकाल...
कविता

सबीहा रहमानी की कविताओं में सामाजिक सच्चाई से टकराने का साहस है

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मयंक खरे डॉ. सबीहा रहमानी की कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे एक वैचारिक प्रतिरोध, सामाजिक दृष्टि और सांस्कृतिक पुनर्पाठ की कोशिशें...
जनमत

नीलकांत: एक औघड़ लेखक

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(हिन्दी के चर्चित साहित्यकार, मार्क्सवादी सौन्दर्यशास्त्री नीलकांत का 14 जून 2025 को दिल्ली के रोहिणी स्थित एक अस्पताल  में निधन हो गया। वे इलाहाबाद में...
पुस्तक

बोधिसत्व के कविता संग्रह ‘अयोध्या में कालपुरुष’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण   जो प्रेम हठ नहीं करता वो बच नहीं सकता! ए.के. रामानुजन की तीन सौ रामायण निबंध-पुस्तक जिसे रामानुजन ने पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में...
कविता

गुलज़ार हुसैन की कविताएँ नफ़रत के ख़िलाफ़ मोहब्बत का पैग़ाम हैं

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पंकज चौधरी प्रखर युवा कवि, पत्रकार गुलज़ार हुसैन का जन्म एक अत्यंत कमज़ोर आर्थिक पृष्ठभूमि में हुआ। नौकरी की तलाश में मुंबई जैसे महानगर पहुँचे,...
जनमत

मोदी सरकार की विदेश नीति का ढोल क्यों फटा

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जयप्रकाश नारायण  पहलगाम में आतंकियों द्वारा पर्यटकों की हत्या और उसके बाद भारत का पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर टारगेटेड हमले के बीच विश्व राजनीति...
कविता

नीरज की कविताएँ समकालीन जटिलताओं की पुख़्ता शिनाख़्त हैं

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विजय राही समकाल को समझे बिना कविता को समझना दुष्कर है। कोई भी कवि समय सापेक्ष परिस्थितियों को उजागर करता हुआ आगे बढ़ता है या...
पुस्तक

भाषा सिंह के कविता संग्रह योनि-सत्ता संवाद की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण मेरे आदमी नहीं हो तुम, मेरे आंसू नहीं ढलकते हैं तुम्हारे गालों पर…. भाषा सिंह की कविताएँ पढ़ने की प्रक्रिया में मन में...
जनमत

अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर निकाला मार्च

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  आज़मगढ़, 26 मई 2025, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले को लेकर आज़मगढ़ नागरिक समाज, राजनीतिक दल और जनवादी लोकतांत्रिक संगठन के...
स्मृति

याद किए गए वरिष्ठ जन पत्रकार व प्रगतिशील मैथिली साहित्यकार अग्निपुष्प

समकालीन जनमत
शामिल हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य जन संस्कृति मंच व समकालीन जनमत का आयोजन पटना, 25.05.2025 चर्चित जन पक्षधर हिंदी पत्रिका समकालीन जनमत के संस्थापक...
पुस्तक

जुवि शर्मा की ‘अबोली की डायरी’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
गति उपाध्याय ‘अबोली की डायरी’ लेखिका ‘जुवि शर्मा’ की पहली किताब है। पहली किताब का अर्थ ‘कथेतर साहित्य’ में इनकी ‘पहली किताब’ से है। इसके...
पुस्तक

विपिन शर्मा की लप्रेक ‘तुम जिंदगी का नमक हो’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
कल्पना पन्त मामला इश्क का , राजनीति पार्टीशन की पर हमारा अमृतसर अभी नहीं आया.. तुम जिंदगी का नमक हो 2023 में पुस्तकनामा से प्रकाशित...
पुस्तक

प्रिया वर्मा के काव्य संग्रह ‘स्वप्न के बाहर पाँव’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण ●गिनती में रहने के लिए दुर्घटनाओं में शरीक़ होना क्यों है ज़रूरी? ●यह भी क्या मामूली सुख है, कि गए हुए की परछाईं...
कविता

मोहन मुक्त की कविताएँ भाषा में वर्णाश्रमी प्रपंचों को तोड़ने वाली राजनीतिक चेतना की बानगी हैं

समकालीन जनमत
केतन यादव एक पूर्वकथन यह कि मेरी भूमिका मात्र इस कवि से परिचय कराने की होगी बाकि बात कवि की कविताएँ खुद कहेंगी। यह एक...
पुस्तक

‘निराला का कथा साहित्य’ पर आयोजित हुई परिचर्चा

समकालीन जनमत
पूजा   इलाहाबाद, जसम की जिला इकाई की श्रृंखला ‘किताब पर बातचीत’ के अंतर्गत दुर्गा सिंह की किताब ‘निराला का कथा साहित्य’  पर परिचर्चा 4...
जनमत

फ़ायर और सीजफायर

समकालीन जनमत
भारत को कश्मीर मामले में किसी तीसरी ताक़त को हस्तक्षेप का मौका नहीं देना चाहिए भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिन तक चले सघन...
कविता

रानी कुमारी की कविताएँ मनुष्य की गरिमा के पक्ष में उठाये गए सवाल हैं

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अरविंद पासवान रानी की कविताओं से होकर गुजरना, मानो आईना में अपना ही अक्स देखना है। कवयित्री कल्पना के उड़ान पर सवार नहीं होती, बल्कि...
पुस्तक

सविता भार्गव के कविता संग्रह ‘थमी हुई बारिश में दोपहर’ की पुस्तक समीक्षा

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पवन करण मैं चुप रहकर समय को चीख़ में बदल देती हूँ.. कवि सविता भार्गव अपने एकांत में निवास करती हैं। एकांत ही उनका प्रकाश...
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