Friday, July 1, 2022
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बुलडोज़र राजनीति, महिला हिंसा, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ ऐपवा ने लखनऊ में धरना दिया

लखनऊ। भाजपा की बुलडोज़र राजनीति, महिला हिंसा, बेताहाशा बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ ऐपवा ने आज लखनऊ के इकोगार्डन में राज्यस्तरीय धरना दिया। धरने में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से ऐपवा नेताओ के साथ सैकड़ो की संख्या में महिलाओं ने शिरकत की। धरने में ऐपवा ने सरकार की अग्निपथ योजना की निंदा की।

धरने को मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित करते हुए ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के शासन में महिलाओं के ऊपर हिंसा, हत्या, बलात्कार की घटनाओं में शर्मनाक ढंग से इज़ाफ़ा हुआ है। अपराधियों और बलात्कारियों को सजा मिलने के बजाय सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। बहुमत से दुबारा सत्ता हासिल करने वाले और प्रदेश से अपराध कम करने और कानून का राज स्थापित करने की बात करने वाले मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश को पुलिस स्टेट में तब्दील कर दिया है। यूपी पुलिस घरों में घुसकर बेटियों को मार रही है, हत्या और बलात्कार तक में शामिल हो रही है और उन पर किसी भी तरह की कोई क़ानूनी कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री तानाशाही ढंग से संविधान, कानून और न्यायालय को ध्वस्त कर रहे हैं।

ऐपवा की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने कहा की डबल इंजन की भाजपा सरकार बुलडोज़र राजनीति के तहत उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर नफ़रत और हिंसा का सांप्रदायिक ज़हर घोलने की कोशिश कर रही है। इसकी आड़ में आंदोलनकारियों को भी परेशान कर रही है, गैरकानूनी ढंग से उनके मकानों पर बुलडोज़र चलाकर उन्हें ध्वस्त कर रही है। प्रयागराज में परवीन फातिमा और आफ़रीन, जावेद के साथ हुई शर्मनाक घटना इसका ताजा उदाहरण है।

प्रदेश उपाध्यक्ष आरती राय ने कहा कि योगी -2 शासन में महिला हिंसा और बलात्कार की घटनाओं में तेजी आई हैं। लखनऊ,लखीमपुर खीरी, सीतापुर, कानपुर, प्रयागराज आदि जिलों में महिलाओं के साथ हिंसा, हत्या, गैंग रेप की जघन्य घटनाएं सामने आई हैं। ललितपुर, सिद्धार्थनगर, चन्दौली जिलों में आश्चर्यजनक रूप से खुद पुलिस अपराधी और बलात्कारी है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि योगी सरकार में प्रदेश की पुलिस निरंकुश हो चुकी है।

लखनऊ की सहसंयोजक कमला गौतम ने कहा कि योगी सरकार महंगाई को कम करने में नाकाम साबित हो रही है । गैस सिलेंडर समेत खाने पीने की जरुरी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर ढंग से लागू करने के बजाय और गरीबों को 5 किलो फ्री राशन पर चुनाव जीतेन का दम्भ भरने वाली योगी सरकार आज गांव-गांव में मनरेगा में काम बंद कर रही है और राशन कार्डों को जबरन रदद् कर रही है।

ऐक्टू के प्रदेश अध्यक्ष का विजय विद्रोही ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अग्निवीर योजना प्रचलित श्रम कानूनों को समाप्त कर लाई गई नई श्रम संहिता के तहत फिक्स टर्म इमप्लाइमेंट का कानून पहले ही बना चुकी है जिसे अग्निवीर योजना के तहत सेना में भी लागू किए जा रहे हैं। इसलिए पुराने श्रम कानूनों को पुनः लागू करने की लड़ाई को तेज करना होगा।

ऐपवा के आंदोलन को भाकपा माले ने समर्थन दिया। भाकपा माले के लखनऊ के जिला सचिव रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि जनता के हर मोर्चे पर फेल साबित हो चुकी है योगी सरकार की बुलडोजर राजनीति गरीबो, दलितों, आदिवासियों, मुस्लिमों को उनकी जमीनो से उजाड़ रही है, बडे पैमाने पर उनका दमन कर रही है। इसलिए आज जनता का बड़ा हिस्सा अपने अधिकारों के लिए सड़क पर आ चुका है।

आइसा के प्रदेश अध्यक्ष आयुष ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार राष्ट्रीय सम्पत्तियों को एक-एक करके बड़े पूंजीपतियों के हित में बेच देना चाहती है। इसी तरह से भाजपा की शिक्षा के निजीकरण की नीति के चलते आज लाखों करोड़ो छात्र छात्राएं उच्च शिक्षा से महरूम हो रहे हैं।

आरवाईए के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने ऐपवा के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा की अग्निपथ योजना की कड़ी निंदा की और कहा कि यह भारत के बेरोजगार नौजवानों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि आरवाईए सेना में स्थायी भर्ती को सुनिश्चित करने और संविदा पर भर्ती को बंद करने की मांग करती है। उन्होने कहा कि वह अग्निपथ के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ है और लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे नौजवानो के पुलिसिया उत्पीड़न के ख़िलाफ़ है।

धरना में लखीमपुर खीरी से माला , सीतापुर से सरोजिनी, कानपुर से विद्या रजवार, गाजीपुर से सरोज, मंजू गोंड, चंद्रावती देवी, भदोही से कबूतरा देवी, चन्दौली से प्रमिला मौर्य, मुन्नी गोंड, श्यामदेई, वाराणसी से रुखसाना, नूरजहां, भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य मिठाईलाल आदि ने वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का संचालन ऐपवा राज्य कार्यकारिणी सदस्य सरोजिनी बिष्ट ने किया। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल के नाम ऐपवा ने 9 सूत्रीय मांगपत्र भी दिया।

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