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जेन ज़ी महाजुटान में नेहा पहुँची आज़मगढ़

आइसा का जेन ज़ी महाजुटान अभियान रविवार, 13 सितम्बर को आज़मगढ़ पहुँचा। जन्तर-मंतर प्रोटेस्ट की मुख्य नायक नेहा और मनीष के नेतृत्व में यूपी में चल रहे इस अभियान का शासन-प्रशासन के रोक-टोक, जोर-धमकी के बावजूद जोरदार स्वागत हुआ।

दो दिन पहले से ही पुलिस कार्यक्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं और उनके परिवार को डराने-धमकाने में लगी थी। कार्यक्रम के दिन आयोजन स्थल नेहरू हाॅल को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। चप्पे-चप्पे पर पुलिस ही पुलिस थी। लेकिन आतंक और डर पैदा करने की पुलिस प्रशासन की सारी कोशिशों को हवा में उड़ाते हुए छात्र-युवा, नागरिक समाज, सामाजिक कार्यकर्ता सैकड़ों की संख्या में नेहरू हाॅल पहुंचने लगे। कार्यक्रम के निर्धारित समय से पहले ही नेहरू हाॅल भर गया।

करीब एक बजे नेहा का आगमन हुआ। सबसे पहले उन्होंने नेहरू हाॅल परिसर के बाहर लगी राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वे सभा स्थल पर पहुंची।
शिक्षा, परीक्षा और रोजगार की बदहाल स्थिति पर केन्द्रित इस जेन ज़ी महाजुटान में नेहा ने अपनी बात जंतर-मंतर के अनुभवों से शुरू की। उन्होंने कहा, कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ जंतर-मंतर प्रोटेस्ट 20 जुलाई को पुलिस की लाठियों और पैलेट गन की बौछार के बाद गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गयी। उन्होंने बताया कि जब पुलिस बर्बरता के बाद फूटे हुए सरों पर पट्टी बांधे, टूटे हाथ और पैर पर प्लास्टर लगाये छात्र दोबारा जंतर-मंतर पर जुटे तो वह एक यादगार मंजर था। उनमें जो गुस्सा दिखा, वह कुछ दिनों, कुछ महीनों और कुछ सालों का नहीं था, वह पिछले एक दशक का संचित सामूहिक गुस्सा था। यह अखलाक समेत मुसलमानों की हत्या, लिंचिंग, दलित छात्रों की हत्या, नोटबंदी, नागरिकता कानून, लाॅकडाउन से लेकर बंद होते स्कूल, बदहाल विश्वविद्यालय, नयी शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक से उपजा गुस्सा केन्द्रित होकर जंतर-मंतर पर दिखा।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नेहा ने कहा, कि आज़मगढ़ में हो रही जेन ज़ी महाजुटान के आज ही के दिन छः साल पहले जेएनयू के छात्र उमर खालिद को जेल में डाला गया था। उमर खालिद पिछले छः साल से कानूनी अन्याय का सामना कर रहे हैं। इस महाजुटान में ही नहीं, हमारे हर संघर्ष में उमर खालिद की रिहाई की मांग शामिल रहेगी।

नेहा ने अपने वक्तव्य में आगे कहा, कि आज आरएसएस और सत्ता में बैठी उसकी राजनीतिक इकाई भाजपा देशद्रोही, पाकिस्तानी, अर्बन नक्सल, हिन्दू विरोधी, दिमागी नक्सल कहकर अपने राजनीतिक विरोधियों को अपराधी साबित करने की कोशिश करती है, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है। आजादी के आन्दोलन से गद्दारी करने वाली आरएसएस और उसके द्वारा सत्ता में बैठायी गयी भाजपा को यह अधिकार नहीं है, कि वह किसी की देशभक्ति तय करे। जब सत्रह साल के खुदीराम बोस देश की आजादी के लिए फाँसी पर चढ़ रहे थे, तो आरएसएस के महाविचारक  माफीवीर सावरकर अंग्रेजों से पेंशन लेने में व्यस्त थे। इनसे हमें देशभक्ति नहीं सीखनी।

नेहा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, कि आरएसएस के लोगों का सबसे पसंदीदा काम है, बाबा साहेब की मूर्तियां गिराना, उन पर कालिख पोतना। उन बाबा साहेब अम्बेडकर को, जिन्होंने आजाद भारत के संविधान की रचना की। जनता के अधिकारों की कानूनी रक्षा की व्यवस्था दी।

नेहा ने कहा कि देश में, समाज में नफरत, विभाजन और हिंसा करने वाली आरएसएस और उसकी भाजपा को सिर्फ सत्ता से हटाने तक अब यह संघर्ष नहीं रुकेगा। अब आरएसएस को अपने आस-पास के पार्कों से, अपनी बस्ती, अपने गांव, अपने घरों से बाहर निकालने का भी काम पूरा करना है।

नेहा ने कहा, कि एक बात को और समझने की जरूरत है, कि इन सारे संघर्षों में संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मैं, मनीष और अमीन अगर तेईस दिन भूख हड़ताल पर बैठे और जंतर-मंतर की जीत हासिल किये तो उसके पीछे एक संगठन था। अनेकों नेहा, मनीष, अमीन हमारे साथ लगे थे। हमें बाबा साहेब अम्बेडकर की बात याद रखनी होगी, कि शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो!

महाजुटान को सम्बोधित करते हुए आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष ने कहा, कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर, दलितों पर चलने वाला बुल्डोजर अब शिक्षा पर भी चलाया जा रहा। बड़ी संख्या में दलितों, अल्पसंख्यकों, लड़कियों को शिक्षा के दायरे से बाहर धकेला जा रहा है, शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश से इस बुल्डोजर राज को उखाड़ फेंकने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

महाजुटान में वामपंथी किसान नेता जयप्रकाश नारायण ने कहा, कि जेन ज़ी प्रोटेस्ट भारतीय राजनीति में एक टर्निंग प्वाइंट है। उन्होंने नेहा को धन्यवाद देते हुए कहा, कि हम जैसे पीछे की पीढ़ी को भी आपने नयी राह दी है, उम्मीद दी है।
इस महाजुटान को आइसा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय इकाई की अध्यक्ष सोनाली यादव, आइसा आज़मगढ़ संयोजक अभिषेक तथा आइसा नेता विवेक यादव समेत कई छात्र नेताओं ने भी संबोधित किया। इस सत्र का संचालन आइसा प्रदेश सचिव शशांक ने किया।

महाजुटान का आरम्भ कोरस की साथी समता, रुनझुन, अंकुर, बंटू के जनगीतों से हुआ। इस सांस्कृतिक सत्र का संचालन समकालीन जनमत के सम्पादक के के पाण्डेय ने किया। इसके बाद नेहा का छात्राओं ने बुके देकर स्वागत किया। एडवोकेट वसीउद्दीन(वसु भाई) ने नेहा को निजामाबाद की ब्लैक पाॅटरी निर्मित स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

इस महाजुटान के दौरान लगातार इंकलाब ज़िन्दाबाद और जेन ज़ी ज़िन्दाबाद जैसे नारे लगते रहे। इस महाजुटान में छात्रों, युवाओं के अलावा नागरिक समाज के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, बुद्धिजीवी, पत्रकार, वकील बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। एक लम्बे अरसे बाद सामाजिक-राजनीतिक बदलाव के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे लोगों में उत्साह और उम्मीद साफ-साफ दिख रहा था। ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता भी दिखे, जो लगभग एक दशक से सार्वजनिक दुनिया से अलग हो गये थे या निष्क्रिय हो गये थे। छोटे-छोटे बच्चे भी काफी संख्या में नेहा से मिलने और उन्हें सुनने आये थे। यह महाजुटान पूरे जनपद की सामाजिक-राजनीतिक दुनियां के ठहराव, थकान, निराशा की जगह एक नयी गतिशीलता को जन्म देता हुआ दिखा।

मीडिया फोटो- अंकुर

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