जनसंवाद चौपाल में जोशीमठ नगरपालिका चुनाव के प्रत्याशियों ने रखी अपनी बात

उत्तराखंड में नगर निकायों के चुनावों का प्रचार चल रहा है. 18 नवंबर को तीन नगर निकायों – श्रीनगर(गढ़वाल), रुड़की और बाजपुर को छोड़ कर, प्रदेश के अन्य निकायों में चुनाव होंगे. इन तीन निकायों में चुनाव न होना राज्य सरकार की दक्षता और कुशलता का एक और नमूना है. इस पर विस्तार से अन्यत्र बात होगी. आम तौर पर प्रचार तो ऐसी ही चल रहा है कि सबको देखा बारी-बारी,अबकी बार फलाने भाई की बारी या फिर सारे ही प्रत्याशी-सुयोग्य,कर्मठ,ईमानदार हैं- उनके भौंपुओं के शोर में. लेकिन भौंपुओं के…

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नोटबंदी से काले धन पर प्रहार भी एक जुमला ही था

  दो वर्ष पूर्व आज ही के दिन यानि 8 नवंबर को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा की गयी थी. इसके अंतर्गत 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया गया था.तब इसे काले धन के खिलाफ एक मास्टरस्ट्रोक बताया गया था. परंतु दो साल बाद इस बारे में सरकार में बैठे लोगों ने एक अप्रत्याशित खामोशी अख़्तियार कर ली है. पिछले दिनों सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ मनाने के लिए तो देश के सभी विश्वविद्यालयों को बाकायदा सर्कुलर जारी किया गया. पर…

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किसानों के साथ ये बर्बरता क्यूँ ?

आँसू गैस के गोले दागता आई.पी.एस. अफसर, किसान पर बंदूक ताने बिना वर्दी का पुलिस कर्मी और डंडा उठाए अकेले किसान पर डंडा ताने आधा दर्जन पुलिस वाले- ये इस प्रदर्शन की वो तस्वीरें हैं, जो मानों संकेत कर रही हों कि सरकार ने किसानों के खिलाफ एक तरह से युद्ध का ऐलान कर दिया है. मेहनतकशों के खिलाफ युद्ध का आगाज, हुकूमत ने किया है, अंजाम तक उसे मेहनतकशों का एकताबद्ध संघर्ष पहुंचाएगा.

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एन.एच.74 भूमि घोटाला : अफसरों की बलि से किसकी जान बची ?

उत्तराखंड में दो आई.ए.एस. अफसरों चंद्रेश कुमार यादव और पंकज कुमार पाण्डेय को एन.एच.74 के भूमि घोटाले में निलंबित किए जाने की खबर है. इस घोटाले में राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिग्रहण के लिए ज़मीनों के अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ झाला हुआ.इस मामले में कुछ पी.सी.एस. अधिकारियों समेत राजस्व कर्मी जेल में हैं. बहरहाल दो आई.एस.अफसरों के निलंबन की खबर के साथ ही होड़ मच गयी, सरकार की पीठ ठोकने की कि त्रिवेन्द्र रावत पहले मुख्यमंत्री हैं,जिन्होने आई.ए.एस. अफसरों को निलंबित किया है. यह होड़ जानकारी के अभाव में…

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बेहतर दुनिया का ख्वाब देखने और उसके लिए संघर्ष करने वाली राजनीति की लाल पताका उठा रहा है युवा

वामपंथी छात्र संगठन हाथ से बनाए गए कलात्मक पोस्टरों के सहारे चुनाव लड़ रहे थे. भाषण,जनगीत,नुक्कड़ नाटक ही उनकी ताकत थे और पूंजी के नाम पर उनके पास वर्ष भर के छात्र आंदोलनों की सक्रियता की पूंजी थी. उनको न केवल धनबल का मुक़ाबला करना था,बल्कि अपने खिलाफ चलाये जा रहे मिथ्या प्रचार का मुकबला भी करना था. ऐसे में यदि वामपंथी छात्र संगठनों ने इतने बड़े पैमाने पर छात्र-छात्राओं का वोट हासिल किया तो यह निश्चित ही उल्लेखनीय और उम्मीद जगाने वाला है. यह इस बात का भी द्योतक है कि आज के दौर का युवा सिर्फ आई.टी. सेल के घृणा अभियान का वाहक और मॉब लिंचिंग गिरोहों का हिस्सा नहीं बन रहा है,वह आदर्शों, उसूलों वाली बेहतर दुनिया, बेहतर समाज का ख्वाब देखने और उसके लिए संघर्ष करने वाली राजनीति की लाल पताका भी उठा रहा है.

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मगर हथकड़ियां खनकी, वह उस आवाज से डर गया

मोदी सरकार जिनको देश के दुर्दांत दुश्मन के तौर पर पेश करना चाह रही थी, ऐसा कोहराम मचाने की कोशिश की गई, गोया देश की सब समस्याएं इन अधेड़ उम्र के लोगों की वजह से हों, उन्हें तो सुप्रीम कोर्ट ने जेल ही नहीं भेजने दिया. दिल्ली उच्च न्यायालय के सामने तो पुलिस हकलाते नज़र आई. सत्ता जिन्हें देश के सबसे बड़े दुश्मन के रूप में पेश कर रही थी, उनके पास मिला क्या, ये भी बड़ा रोचक है. सरकार तो बड़ी चीज है, पुलिस के अदने से सिपाही के…

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उत्तराखंड के पूर्व महानिदेशक बी.एस. सिद्धू पर एनजीटी ने 46.14 लाख का जुर्माना लगाया

उत्तराखंड पुलिस के पूर्व महानिदेशक बी.एस. सिद्धू पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल-एन.जी.टी.) ने 46,14,960 रुपये ( छियालिस लाख चौदह हजार नौ सौ साठ रु.) का जुर्माना लगाया है. प्रदेश में नौकरशाही में भ्रष्टाचार का चर्चा तो बहुत होता रहा है, लेकिन पुलिस के सर्वोच्च पद पर रह चुके किसी अफसर के खिलाफ सजा या आर्थिक दंड का संभवतः पहला मामला है. जिस मामले में सिद्धू को भारी भरकम आर्थिक दंड की सजा हुई है. इस पूरे मामले को देखें तो ऐसा लगता है कि कोई फिल्मी कहानी चल रही है, जिसमें उच्च पद पर बैठा व्यक्ति खलनायक का रोल अदा कर रहा है.

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मैंने गिर्दा को कैसे जाना

(गिर्दा के स्मृति दिवस 22 अगस्त पर गिर्दा की याद) बात 1994 की है. उत्तराखंड आंदोलन पूरे ज़ोर पर था. इसी बीच में उत्तराखंड आंदोलन पर नरेंद्र सिंह नेगी जी का कैसेट आया. आन्दोलन पर 7-8 गीत उसमें थे. उन्हीं में से एक गीत था- ततुक नी लगा उदेख,घुनन मुनई नि टेक जैंता इक दिन त आलो ऊ दिन यो दुनि में मैं उस समय 12वीं में पढ़ता था और उत्तरकाशी में अपने चाचा जी के साथ रहता था. गीत सुना तो न मेरी समझ में गीत आया और न…

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एक समाज के रूप में कहाँ पहुँच गए हैं हम ?

इस घटना में पहले दिन से जैसे आरोपियों को भीड़ के हवाले करने की मांग की गयी,वह चिंताजनक संकेत हैं. कल्पना करके देखिये कि पहले दिन जो लोग संदिग्ध बताए गए,यदि वे भीड़ के हाथ पड़ गए होते तो क्या होता ? निश्चित ही वे भीड़ द्वारा बेहद भयानक तरीके से मार डाले गए होते. भीड़ उन्हें मारती और मारने वालों में वह व्यक्ति भी शामिल होता, जिसे अब हत्यारा बताया जा रहा है. क्या यह न्याय होता ? वही न्याय,जिसके नाम पर भीड़,पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों को अपने हाथों सौंपने की मांग कर रही थी ?

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“ तुम्हारी तहजीब अपने खंजर से आप ख़ुदकुशी करेगी ”

ए.बी.पी. न्यूज़ में जिस तरह से मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून वाजपेयी की विदाई हुई और अभिसार शर्मा को खामोश किया गया,वह निश्चित ही सत्ता के दबाव का नतीजा है. ‘ मास्टरस्ट्रोक ’ का ‘ स्ट्रोक ’, ‘मास्टर’ को इस कदर चुभ गया कि ‘ मास्टर ’ ने स्ट्रोक लगाने वालों को निपटा दिया. सत्ता का संदेश साफ है या तो हमारी बोली बोलो, वरना झेलो. इस मसले पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ हैं. एक जिसमें पुण्य प्रसून वाजपेयी समेत कतिपय टी.वी. पत्रकारों को मसीहा के रूप में पेश किया…

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‘ अनशन करते मेरे प्राण होम हो जाएँ तो मेरे शरीर को विधायक के घर में फेंक देना ’

विकास के दावों-नारों के शोर के बीच देवपुरी गाँव आज भी सड़क से महरूम है. चार किलोमीटर की सड़क के लिए दो-दो मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की , विधायकों ने वादे किये लेकिन सड़क आज तक नहीं बन सकी. गांव के लोग आन्दोलन कर रहे हैं. रघुवीर सिंह रावत 5 जून से आमरण अनशन पर हैं और उनका कहना है कि सड़क बनने तक उनका अनशन जारी रहेगा, चाहे उनकी जान ही क्यों न चली जाय.

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सीख़चों के बाहर कैद पुलिस

पुलिस कर्मियों की कार्यस्थितियों में समुचित सुधार का एजेंडा न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार के सामने रख दिया है. यह देखना रोचक होगा कि इस फैसले का कितना अनुपालन राज्य सरकार और पुलिस महकमा करता है. पुलिस को लोकतान्त्रिक बनाए जाने की जरूरत है और पुलिस को लोकतान्त्रिक अधिकार दिया जाना भी आवश्यक है.

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तिलाड़ी शहादत स्मृति : जंगल, जमीन, पानी पर जनता के अधिकार की लड़ाई जारी है

राजशाही शहीदों के खून के वेग में बह गयी.पर हमारे लोकतंत्र के खेवनहारों ने राजाओं के गुण बखूबी आत्मसात किये. उन्हें जंगल,जमीन,पानी के लिए लोगों का खून बहाना मंजूर है पर संसाधनों पर जनता का अधिकार मंजूर नहीं है. तिलाडी के हमारे बहादुर पुरखों से चली आ रही यह लड़ाई,आज भी जारी है,हत्यारी राजशाही के गुणसूत्र वाले वर्तमान हुक्मरानों से.

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पहली जंगे आज़ादी और मार्क्स

भारतीय संदर्भ में मार्क्सवाद के बारे में चर्चा करते हुए आम तौर पर यह कहा जाता है कि मार्क्स तो भारत को नहीं समझते थे, उसमें जाति और उसके वर्चस्व के बारे में वे नहीं जानते थे.लेकिन भारत में होने वाले जातीय भेदभाव को मार्क्स बखूबी समझते थे. इसलिए वे साफ़ तौर पर “जात-पात” के “भेदभाव और दासता” का उल्लेख कर रहे थे और भारत के पिछड़ेपन के कारण के तौर पर चिन्हित कर रहे थे.

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पेशावर विद्रोह : जब गढ़वाली फौज ने स्वतंत्रता सेनानियों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया

हवलदार मेजर चन्द्र सिंह गढ़वाली ने साथी सैनिकों से कहा -न ये हिंदुओं का झगड़ा है न मुसलमानों का. झगड़ा है कांग्रेस और अंग्रेज का. जो कांग्रेसी भाई हमारे देश की आजादी के लिये अंग्रेजों से लड़ाई लड़ रहे हैं, क्या ऐसे समय में हमें उनके ऊपर गोली चलानी चाहिये ? हमारे लिये गोली चलाने से अच्छा यही होगा कि अपने को गोली मार लें.”   23 अप्रैल 1930 को चंद्र सिंह गढ़वाली के नेतृत्व में अंजाम दिए गए पेशावर विद्रोह को आज 88 वर्ष पूरे हो गए हैं. अंग्रेजी…

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एससी /एसटी एक्ट : दुरुपयोग की चिंता या कानून की जड़ ही खोदने की कोशिश

उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989  के संदर्भ में फैसला दिए जाने के बाद पूरे देश में इस फैसले के पक्ष और विपक्ष में बहस-मुबाहिसे का माहौल गर्म है. फैसले का विरोध करने वाले मानते हैं कि यह फैसला,अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम को और कमजोर कर देगा. इससे इन जातियों को, जो थोड़ी बहुत कानूनी सुरक्षा हासिल है, उसका भी क्षरण हो जायेगा. इस फैसले का विरोध करने के लिए अनुसूचित जाति के संगठनों ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया, जिसका समर्थन वामपंथी पार्टियों समेत…

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विज्ञान से बैर की वैचारिकी

28 फरवरी को प्रसिद्ध नोबल पुरुस्कार विजेता सी.वी.रामन के जन्मदिन को भारत में विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता.इस बार इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी में आयोजित विज्ञान दिवस के आयोजन के उद्घाटन के लिए अकादमी द्वारा केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह को आमंत्रित किया गया था. सत्यपाल सिंह मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे हैं.वे बागपत से भाजपा के टिकट पर जीत कर लोकसभा पहुंचे हैं और पिछले वर्ष सितम्बर में  केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री पद से नवाजे गए.इस वर्ष जनवरी में उन्होंने…

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नेवी विद्रोह : स्वाधीनता संग्राम का कम चर्चित लेकिन गौरवशाली अध्याय

  1946 के नेवी विद्रोह की बरसी आज भारत की आजादी की लड़ाई के कई प्रसंग बेहद कम चर्चित हैं. 1946 का नेवी विद्रोह भी हमारे स्वाधीनता संग्राम का एक कम चर्चित लेकिन गौरवशाली अध्याय है.यह देश की अवाम यहाँ तक कि अंग्रेजों की रक्षा के लिए बनी सेनाओं के भीतर मुक्ति का विस्फोटक प्रकटीकरण था.यह तो सभी जानते हैं कि अंग्रेजी राज में सेनाओं में हिन्दुस्तानियों के साथ जबरदस्त भेदभाव होता था लेकिन वह 1857 रहा हो या 1946 जब भी सेनाओं के अन्दर से विद्रोह की चिंगारी फूटी,वह…

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उत्तराखंड : डबल इंजन का गर्द-ओ-गुबार

उत्तराखंड में भाजपा की त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व वाली सरकार आगामी मार्च में एक वर्ष पूरा कर लेगी.विधानसभा चुनाव में वोट मांगने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब देहरादून आये थे तो उन्होंने उत्तराखंड के इंजन को दिल्ली के इंजन से जोड़ते हुए डबल इंजन की सरकार बनाने का आह्वान लोगों से किया था.उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार बन भी गयी. साल भर में इस डबल इंजन की चाल-ढाल का अंदाजा, बीते कुछ दिनों में घटित घटनाओं से लगाया जा सकता है. 21 जनवरी को देहरादून में ई.टी.वी. के पत्रकार अवनीश…

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