“ तुम्हारी तहजीब अपने खंजर से आप ख़ुदकुशी करेगी ”

ए.बी.पी. न्यूज़ में जिस तरह से मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून वाजपेयी की विदाई हुई और अभिसार शर्मा को खामोश किया गया,वह निश्चित ही सत्ता के दबाव का नतीजा है. ‘ मास्टरस्ट्रोक ’ का ‘ स्ट्रोक ’, ‘मास्टर’ को इस कदर चुभ गया कि ‘ मास्टर ’ ने स्ट्रोक लगाने वालों को निपटा दिया. सत्ता का संदेश साफ है या तो हमारी बोली बोलो, वरना झेलो. इस मसले पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ हैं. एक जिसमें पुण्य प्रसून वाजपेयी समेत कतिपय टी.वी. पत्रकारों को मसीहा के रूप में पेश किया…

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‘ अनशन करते मेरे प्राण होम हो जाएँ तो मेरे शरीर को विधायक के घर में फेंक देना ’

विकास के दावों-नारों के शोर के बीच देवपुरी गाँव आज भी सड़क से महरूम है. चार किलोमीटर की सड़क के लिए दो-दो मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की , विधायकों ने वादे किये लेकिन सड़क आज तक नहीं बन सकी. गांव के लोग आन्दोलन कर रहे हैं. रघुवीर सिंह रावत 5 जून से आमरण अनशन पर हैं और उनका कहना है कि सड़क बनने तक उनका अनशन जारी रहेगा, चाहे उनकी जान ही क्यों न चली जाय.

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सीख़चों के बाहर कैद पुलिस

पुलिस कर्मियों की कार्यस्थितियों में समुचित सुधार का एजेंडा न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार के सामने रख दिया है. यह देखना रोचक होगा कि इस फैसले का कितना अनुपालन राज्य सरकार और पुलिस महकमा करता है. पुलिस को लोकतान्त्रिक बनाए जाने की जरूरत है और पुलिस को लोकतान्त्रिक अधिकार दिया जाना भी आवश्यक है.

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तिलाड़ी शहादत स्मृति : जंगल, जमीन, पानी पर जनता के अधिकार की लड़ाई जारी है

राजशाही शहीदों के खून के वेग में बह गयी.पर हमारे लोकतंत्र के खेवनहारों ने राजाओं के गुण बखूबी आत्मसात किये. उन्हें जंगल,जमीन,पानी के लिए लोगों का खून बहाना मंजूर है पर संसाधनों पर जनता का अधिकार मंजूर नहीं है. तिलाडी के हमारे बहादुर पुरखों से चली आ रही यह लड़ाई,आज भी जारी है,हत्यारी राजशाही के गुणसूत्र वाले वर्तमान हुक्मरानों से.

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पहली जंगे आज़ादी और मार्क्स

भारतीय संदर्भ में मार्क्सवाद के बारे में चर्चा करते हुए आम तौर पर यह कहा जाता है कि मार्क्स तो भारत को नहीं समझते थे, उसमें जाति और उसके वर्चस्व के बारे में वे नहीं जानते थे.लेकिन भारत में होने वाले जातीय भेदभाव को मार्क्स बखूबी समझते थे. इसलिए वे साफ़ तौर पर “जात-पात” के “भेदभाव और दासता” का उल्लेख कर रहे थे और भारत के पिछड़ेपन के कारण के तौर पर चिन्हित कर रहे थे.

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पेशावर विद्रोह : जब गढ़वाली फौज ने स्वतंत्रता सेनानियों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया

हवलदार मेजर चन्द्र सिंह गढ़वाली ने साथी सैनिकों से कहा -न ये हिंदुओं का झगड़ा है न मुसलमानों का. झगड़ा है कांग्रेस और अंग्रेज का. जो कांग्रेसी भाई हमारे देश की आजादी के लिये अंग्रेजों से लड़ाई लड़ रहे हैं, क्या ऐसे समय में हमें उनके ऊपर गोली चलानी चाहिये ? हमारे लिये गोली चलाने से अच्छा यही होगा कि अपने को गोली मार लें.”   23 अप्रैल 1930 को चंद्र सिंह गढ़वाली के नेतृत्व में अंजाम दिए गए पेशावर विद्रोह को आज 88 वर्ष पूरे हो गए हैं. अंग्रेजी…

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एससी /एसटी एक्ट : दुरुपयोग की चिंता या कानून की जड़ ही खोदने की कोशिश

उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989  के संदर्भ में फैसला दिए जाने के बाद पूरे देश में इस फैसले के पक्ष और विपक्ष में बहस-मुबाहिसे का माहौल गर्म है. फैसले का विरोध करने वाले मानते हैं कि यह फैसला,अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम को और कमजोर कर देगा. इससे इन जातियों को, जो थोड़ी बहुत कानूनी सुरक्षा हासिल है, उसका भी क्षरण हो जायेगा. इस फैसले का विरोध करने के लिए अनुसूचित जाति के संगठनों ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया, जिसका समर्थन वामपंथी पार्टियों समेत…

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विज्ञान से बैर की वैचारिकी

28 फरवरी को प्रसिद्ध नोबल पुरुस्कार विजेता सी.वी.रामन के जन्मदिन को भारत में विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता.इस बार इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी में आयोजित विज्ञान दिवस के आयोजन के उद्घाटन के लिए अकादमी द्वारा केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह को आमंत्रित किया गया था. सत्यपाल सिंह मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे हैं.वे बागपत से भाजपा के टिकट पर जीत कर लोकसभा पहुंचे हैं और पिछले वर्ष सितम्बर में  केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री पद से नवाजे गए.इस वर्ष जनवरी में उन्होंने…

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नेवी विद्रोह : स्वाधीनता संग्राम का कम चर्चित लेकिन गौरवशाली अध्याय

  1946 के नेवी विद्रोह की बरसी आज भारत की आजादी की लड़ाई के कई प्रसंग बेहद कम चर्चित हैं. 1946 का नेवी विद्रोह भी हमारे स्वाधीनता संग्राम का एक कम चर्चित लेकिन गौरवशाली अध्याय है.यह देश की अवाम यहाँ तक कि अंग्रेजों की रक्षा के लिए बनी सेनाओं के भीतर मुक्ति का विस्फोटक प्रकटीकरण था.यह तो सभी जानते हैं कि अंग्रेजी राज में सेनाओं में हिन्दुस्तानियों के साथ जबरदस्त भेदभाव होता था लेकिन वह 1857 रहा हो या 1946 जब भी सेनाओं के अन्दर से विद्रोह की चिंगारी फूटी,वह…

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उत्तराखंड : डबल इंजन का गर्द-ओ-गुबार

उत्तराखंड में भाजपा की त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व वाली सरकार आगामी मार्च में एक वर्ष पूरा कर लेगी.विधानसभा चुनाव में वोट मांगने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब देहरादून आये थे तो उन्होंने उत्तराखंड के इंजन को दिल्ली के इंजन से जोड़ते हुए डबल इंजन की सरकार बनाने का आह्वान लोगों से किया था.उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार बन भी गयी. साल भर में इस डबल इंजन की चाल-ढाल का अंदाजा, बीते कुछ दिनों में घटित घटनाओं से लगाया जा सकता है. 21 जनवरी को देहरादून में ई.टी.वी. के पत्रकार अवनीश…

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चार लाख पद ख़त्म और ‘ माननीयों ’ की वेतन वृद्धि

बजट से ठीक एक दिन पहले अखबारों में खबर छपी कि केंद्र सरकार लगभग 4 लाख ऐसे पद खत्म करने जा रही है,जो पांच सालों से खाली हैं.आज बजट आया तो पता चला कि राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,सांसदों आदि के वेतन में अच्छी खासी बढ़ोतरी की गयी है.इन दोनों बातों का आपस में कोई सम्बन्ध भले ही न हो,लेकिन ये दोनों ही केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं की अभिव्यक्ति तो हैं ही. सोचिये कि यदि राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति या सांसदों का वेतन बढाने का प्रस्ताव बजट में नहीं शामिल होता तो क्या इनमें से किन्ही महानुभाव…

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