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नफरत और हिंसा के खिलाफ, रोजी रोटी रोजगार के लिए वाराणसी में महिलाओं का अधिकार मार्च

नफरत और हिंसा के खिलाफ रोजी-रोटी-रोजगार के लिए ऐपवा ने 26 नवम्बर को संविधान दिवस पर महिला अधिकार मार्च निकाला. वाराणसी जिला प्रशासन ने महिलाओं के इस मार्च के प्रति उपेक्षा और दमन का रुख अख्तियार किया। मार्च की अनुमति आधे घंटे पहले रद कर दी और पीएमओ कार्यालय ने मांग पत्र लेने से इनकार कर दिया। यही नहीं मार्च में शामिल ऐपवा नेताओं और बुद्धिजीवियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया। जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है उनमें प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. चौथीराम यादव, लेखक और विचारक वी .के.सिंह , ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी, ऐपवा यूपी सचिव कुसुम वर्मा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(माले) की सेंट्रल कमेटी के सदस्य मनीष शर्मा के नाम प्रमुख है।

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बेटी-बचाओ की बात करने वाले मोदी जी के संसदीय क्षेत्र बनारस में महिलाओं को मांग-पत्र देने से रोका गया, मार्च में शामिल लेखकों, ऐपवा नेताओं पर मुकदमा दर्ज किया


वाराणसी. नफरत और हिंसा के खिलाफ  रोजी-रोटी-रोजगार के लिए ऐपवा ने 26 नवम्बर को  संविधान दिवस पर महिला अधिकार मार्च निकाला. लम्बे समय से सरकार की गरीब विरोधी नीतियोँ के चलते दमन और उत्पीड़न झेल रही है पूर्वी उत्तर प्रदेश की मेहनकश महिलाओं ने अपनी एक दिन की मजदूरी छोड़कर कैंट रेलवे स्टेशन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय रविंदपुरी तक मार्च निकाला। बनारस शहर के तमाम सामजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भी अधिकार मार्च में हिस्सा लिया।


वाराणसी जिला प्रशासन ने महिलाओं के इस मार्च के प्रति उपेक्षा और दमन का रुख अख्तियार किया। मार्च की अनुमति आधे घंटे पहले रद कर दी और पीएमओ कार्यालय ने मांग पत्र लेने से इनकार कर दिया। यही नहीं मार्च में शामिल ऐपवा नेताओं और बुद्धिजीवियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया। जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है उनमें प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. चौथीराम यादव, लेखक और विचारक वी .के.सिंह , ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी, ऐपवा यूपी सचिव कुसुम वर्मा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(माले) की सेंट्रल कमेटी के सदस्य मनीष शर्मा के नाम प्रमुख है।

सात किमी की लंबी दूरी तय करके अपनी मांगो के साथ पीएमओ के स्थानीय कार्यालय पहुंची महिलाओं से जब मांग पत्र लेने से मना कर दिया तो महिलाओं ने वहीं सभा शुरू कर दी।

सभा को  सम्बोधित करते हुए  ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि  केद्र और उत्तर प्रदेश में बैठी मोदी सरकर महिला सशक्तिकरण के नाम पर सिर्फ खोखले वादे और नारे देने का काम कर रही है और तमाम योजनायें बनाकर महिलाओं को ठग रही है. मीना तिवारी ने कहा कि देश में नफरत और हिंसा  फैलाने का इतिहास रखने वाली भाजपा सरकार ने  महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार जैसे बुनियादी सवालों पर चप्पी साध रखी हैं. उन्होने कहा कि पीएम मोदी  के सारे वादे और नारे की पोल आज खुल चुकी है इसलिए आज मेहनतकश महिलाएं  अपने हक अधिकार के लिए सड़क पर उतरकर इस संविधान विरोधी/ महिला विरोधी सरकार को चुनौती देने उतरी है.

उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान पर करोड़ों खर्च करने वाली यह सरकार गांवों में शौचालय के लिए जमीन तक  मुहैय्या नहीं करा पा रही है बल्कि उल्टे फोटोग्राफी करके और सीटी बजाकर उनका यौन उत्पीड़न कर रही है . मीना तिवारी ने यह भी कहा कि यौन उत्पीड़न के खिलाफ संगठित लड़ाई लड़कर बीएचयू की बहादुर लड़कियों  ने बेटी बचाओ –बेटी पढाओ के फर्जी नारे को अपनी संगठित लड़ाई के चलते बदल दिया .मोदी सरकार को आईना दिखाते हुए वह कह रही थीं – पढ़ेगी बेटी,लड़ेगी बेटी, नही किसी से डरेगी बेटी.


अल्पसंख्यकों के हक में लगातार आवाज उठाने वाले रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने कहा कि मन्दिर-मन्दिर का राग अलापने वाली भाजपा सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश कराकर दिखाएँ ?हकीकत तो यह है कि मन्दिर में प्रवेश के नाम पर आज भी दलितों की हत्या कर दी जाती है. प्रधानमन्त्री के निर्वाचन क्षेत्र में बीएचयू की लडकियाँ जब आधी रात में अपनी आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ रहीं थी तब उन पर लाठियां भांजी जाती हैं. राजीव यादव ने कहा कि मोदी राज में जब भी बेगुनाहों का कत्ल किया गया हो तो उनकी माएं सड़क पर इंसाफ के लिए उतरीं चाहें वह इशरत जहाँ का मामला हों या फिर रोहित वेमुला और नजीब प्रकरण हों. आज साम्प्रदायिक तत्व सम्विधान दिवस से ठीक एक दिन पहले सम्विधान कमजोर करने के उद्देश्य से  अयोध्या में मन्दिर निर्माण की बात कर रहे हैं.
प्रोफेसर चौथीराम यादव ने कहा कि संघ भाजपा के फासीवादी विचार की सबसे पहली मार आधी आबादी पर पड़ रही है इसलिए फासीवाद को शिकस्त देने में भी महिलाएं ही प्रतिरोध की नई संस्कृति का निर्माण करेंगी और सामाजिक बदलाव की पंक्ति में सबसे आगे खडी होंगी. ऐपवा संयोजिका स्मिता बागडे ने कहा कि मोदी-योगी सरकार में दलित-आदिवासी महिलाओं को बड़े पैमाने पर जमीन से बेदखल  कर बर्बर दंग से दमन किया जा रहा है. डॉ नूर फातिमा ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार बेटीबचाओ की बात करती है तो दूसरी तरफ जब इस देश की मेहनतकश बेटियां सुदूर जिलों से अपनी शिकायत पत्र लेकर आती हैं तो प्रधानमन्त्री कार्यालय परही कोई बात नहीं सुनी जाती इससे साबित हित है कि मोदी सरकार जुमलों की सरकार है।

सभा को आल इंडिया सेक्यूलर फ़ोरम के प्रो. मो. आरिफ, वी. के. सिंह, सुतपा गुप्ता, सुजाता भट्टाचार्या, विभा, विभा वाही, अर्चना, बीएचयू की शोध छात्रा प्रज्ञा पाठक, इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंह एवं जिला सचिव कमलेश यादव, ऐपवा राज्य इकाई से जीरा भारती,सरोज, हंसा, शान्ति कोल, मुन्नी, कबूतरा, अनीता, मंजू, चन्द्रावती, गैना, रुखसाना, नूर जहाँ विद्या ने भी अपनी बात रखी. संचालन ऐपवा प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने किया.


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