संस्कृत साहित्य में स्वाधीन स्त्रियाँ

संस्कृत साहित्य की परंपरा पाँच हजार साल से अधिक पुरानी है। कविता और शास्त्र की विविध विधाओं में यह बहुत संपन्न साहित्य है। पर यह प्रायः पुरुषों के द्वारा और पुरुषों के लिए लिखा गया साहित्य है। इसके बावजूद इसमें स्वाधीन मन वाली, स्वाधीनता के लिए संघर्ष करती या पुरुष के वर्चस्व के आगे न झुकने वाली स्त्रियों की अनेक छवियाँ हैं।

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देश विरोधी व्यावसायिक मंसूबा है लाल किला को डालमिया समूह की गोद में देना

हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित करना न केवल सरकार की संस्थाओं की जिम्मेदारी है बल्कि हम नागरिकों का भी दायित्व है। सरकार के इस देश विरोधी व्यावसायिक मंसूबो को सफल होने से रोकना चाहिए। इस पूरे मामले पर संस्कृति कर्मियों और लेखकों को ‘ सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत को बचाओ, सरकार के जन विरोधी व्यावसायिक मंसूबों को हराओ ‘ जैसा व्यापक अभियान चलाना चाहिए।

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गीत गाते, नारे लगाते, हाथ में लाल झंडा लिए खेत मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं का कारवां बढ़ चला पटना की ओर

साम्प्रदायिक दंगों, दलित उत्पीडन तथा जनता के अधिकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ भाकपा माले की 23 अप्रैल से बिहार के विभिन्न हिस्सों में शुरू हुई ‘ भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ, लोकतंत्र बचाओ-देश बचाओ जन अधिकार पदयात्रा ‘ 30 अप्रैल की शाम तक पटना पहुंच जाएगी. विभिन्न स्थानों पर रात्रि विश्राम के बाद एक मई को एक बार फिर से पैदल मार्च करते हुए यह यात्रा गांधी मैदान पहुंचेगी जहां जनअधिकार महासम्मेलन का आयोजन किया गया है. इस महासम्मेलन को मुख्य वक्ता पार्टी के महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य संबोधित करेंगे.

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लाल किला को नीलाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती : दीपंकर भट्टाचार्य

भाजपा को देश व बिहार से भगाना कितना जरूरी हो गया है, यह इससे भी साबित हो रहा है कि इस सरकार ने लाल किला नीलाम कर दिया है. 15 अगस्त को जिस लाल किले पर प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं, उसे डालमिया ग्रुप के हवाले कर दिया गया है. यह वहीं डालमिया ग्रुप है जिसने बिहार को लूटकर बर्बादी की गर्त में धकेल दिया था.

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‘ यह बाबा पूजने लायक नहीं है, ये बापू बहुत गंदा है ’

अब मेरा मन और घबराने लगा, मुझे लगा अब कहां रह गई। कुछ देर बाद जब बेटी बाहर निकली तो बदहवास थी….। उसका यह हाल देखकर मेरा दिल वहीं पर धक्क बोल गया। मैंने उससे पूछा क्या हुआ, वह बस इतना बोली, ‘ चलो यहां। यह बाबा पूजने लायक नहीं है। ये बापू बहुत गंदा है। ‘

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अल्पना मिश्र की कहानी : स्याही में सुर्खाब के पंख

जनतंत्र में ‘जन’ को नकार कर या पूरी तरह नियंत्रित मान लेना सही आकलन नहीं होगा, क्योंकि ‘जन ‘ में अभी भी असहमति का साहस बचा हुआ है और पूंजी, धर्म और सत्ता के गठजोड़ पर टिकी बर्बरता की पहचान से उपजे प्रतिरोध की आवाजें मुखर हैं

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मनरेगा मज़दूरी भुगतान का बढ़ता संकट

मनरेगा अब एक काम का अधिकार कम, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधान मंत्री आवास योजना और समेकित बाल विकास सेवाओं जैसे कार्यक्रमों की आवश्यकताओं को पूरा करने का साधन बन गया है.

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एनएचआरसी : भोपाल सेंट्रल जेल में सिमी विचाराधीन कैदियों के उत्पीड़न की शिकायत सही

आयोग ने अपने जांच रिपोर्ट में कैदियों के उत्पीड़न में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल जेल कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की अनुशंसा भी की है साथ ही रिपोर्ट में कैदियों द्वारा लगाए आरोपों की जांच उच्च स्तर पर कराने की सिफारिश भी की है.

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व्यवस्था की विसंगतियों पर प्रहार है देव नाथ द्विवेदी की गजलों में

लखनऊ में देव नाथ द्विवेदी के  गजल संग्रह ‘ हवा परिन्दों पर भारी है ’ का विमोचन और परिसंवाद कौशल किशोर लखनऊ. ‘ हिन्दुस्तानी जबान में आम आदमी की कविता को हम हिन्दी गजल कहते हैं. समकालीनता और जन पक्षधरता इसके दो घटक हैं. जन समस्या, जन सरोकार, जनाक्रोश और जनांदोलन से हिन्दी गजलो का गहरा जुड़ाव है. दुष्यन्त, गोरख, अदम से यह परम्परा आगे बढ़ी. देव नाथ द्विवेदी की गजलें इसी का हिस्सा है. देव नाथ की गजलों में सरलता और सहजता है तो वहीं गंभीरता और कहने का अपना…

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भाकपा (माले) लिबरेशन ने गढ़चिरौली मुठभेड़ की स्वतंत्र जाँच की मांग की

नई दिल्ली. भाकपा (माले) लिबरेशन ने गढ़चिरौली में मुठभेड़ के नाम पर हत्याओं की उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थापित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र और समयबद्ध जाँच करने की मांग की है.  पार्टी ने कहा ही कि राज्य-प्रशासन छापेमारी के नाम पर स्थानीय आदिवासी समुदाय का दोहन या उत्पीड़न बंद करे. भाकपा (माले) लिबरेशन की केन्द्रीय समिति द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि  22 और 23 अप्रैल 2018 को ताड़गाँव, गढ़चिरौली में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल और…

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मानव रहित रेल क्रासिंग पर स्कूली वैन की पैसेंजर ट्रेन से टक्कर, 13 बच्चों की मौत

कुशीनगर. कुशीनगर जिले के दुदही क्षेत्र से दिल दहला देने वाली एक घटना में आज सुबह दुदही रेलवे स्टेशन के पास बहपुरवा रेलवे क्रासिंग पर पैसेंजर ट्रेन से स्कूली वैन टकरा गई जिसमें 13 बच्चों की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल चार बच्चों और वैन ड्राईवर को इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर में भर्ती कराया गया है.  घटना सुबह 7 बजे की है.  मिली जानकारी के अनुसार डिवाइन मिशन स्कूल के बच्चे स्कूली वैन पर सवार होकर स्कूल जा रहे थे। स्कूली वैन बहपुरवा के मानव…

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बीआरडी मेडिकल कालेज आक्सीजन कांड : डॉ कफील खान को हाई कोर्ट से जमानत मिली

गोरखपुर। दस अगस्त 2017 को बीआरडी मेडिकल कालेज में हुए आक्सीजन हादसे में सात महीने से अधिक समय से जेल में बंद मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के प्रवक्ता एवं एनएचएम के नोडल प्रभारी रहे डा. कफील अहमद खान को आज हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने डा. कफील के अधिवक्ता नजरूल इस्लाम जाफरी और सदाफुल इस्लाम जाफरी तथा सरकार की तरफ से प्रस्तुत हुए अधिवक्ता विमलेन्दु त्रिपाठी को सुनने के बाद जमानत मंजूर कर ली। सरकारी अधिवक्ता विमलेन्दु त्रिपाठी ने जमानत का विरोध…

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साक्षी मिताक्षरा की कविताएं : गाँव के माध्यम से देश की राजनीतिक समीक्षा

आर. चेतन क्रांति गाँव हिंदी कविता का सामान्यतः एक सुरम्य स्मृति लोक रहा है, एक स्थायी नोस्टेल्जिया, जहाँ उसने अक्सर शहर में रहते-खाते-पीते, पलते-बढ़ते लेकिन किसी एक बिंदु पर शहर के सामने निरस्त्र होते समय शरण ली है. वह गाँव जो छूट गया, वह गाँव जिसे छोड़ना पड़ा, वह गाँव जहाँ सब कुछ बचपन की तरह इतना सुंदर था, अक्सर कविता में आता रहा है. गद्य विधाओं में गाँव जिस तरह देश की राजनीतिक समीक्षा का आधार बना, वैसा कविता में संभवतः नहीं हुआ. इधर के नए कवियों में शहर…

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रवीन्द्रनाथ ठाकुर का चित्र ‘ माँ और बच्चा ’

  रवीन्द्र नाथ ठाकुर (1861-1941) को हालाँकि सभी एक विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार के रूप में जानते हैं जिन्होंने उत्कृष्ट कविता, गीत, कहानी, उपन्यास, नाटक आदि रचे. उन्हे 1913 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार, उनकी कृति ‘ गीतांजलि ‘ के लिए दिया गया था , पर एक अत्यंत मौलिक चित्रकार के रूप में हम उनकी प्रतिभा और उनके चित्रों से कम परिचित हैं. वास्तव में रवीन्द्र नाथ ठाकुर का चित्रकला में आगमन भारतीय चित्रकला के हज़ारों वर्षों के इतिहास में एक बहुत महत्वपूर्ण घटना है. रवीन्द्र नाथ ठाकुर की कला ही…

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पेशावर विद्रोह : जब गढ़वाली फौज ने स्वतंत्रता सेनानियों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया

हवलदार मेजर चन्द्र सिंह गढ़वाली ने साथी सैनिकों से कहा -न ये हिंदुओं का झगड़ा है न मुसलमानों का. झगड़ा है कांग्रेस और अंग्रेज का. जो कांग्रेसी भाई हमारे देश की आजादी के लिये अंग्रेजों से लड़ाई लड़ रहे हैं, क्या ऐसे समय में हमें उनके ऊपर गोली चलानी चाहिये ? हमारे लिये गोली चलाने से अच्छा यही होगा कि अपने को गोली मार लें.”   23 अप्रैल 1930 को चंद्र सिंह गढ़वाली के नेतृत्व में अंजाम दिए गए पेशावर विद्रोह को आज 88 वर्ष पूरे हो गए हैं. अंग्रेजी…

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क्या वाकई मैं कुसूरवार हूँ ? नहीं ! बिलकुल नहीं !

जेल में बंद डॉ. कफ़ील अहमद खान का का ख़त -सच बाहर ज़रूर आएगा और न्याय होकर रहेगा ( दस अगस्त 2017 को बीआरडी मेडिकल कालेज  गोरखपुर में हुए आक्सीजन कांड में बीआरडी मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के प्रवक्ता एवं एनएचएम के नोडल प्रभारी रहे डॉ. कफील अहमद खान को दो सितम्बर 2017 को गिरफ्तार किया गया था. वह सात महीने से अधिक समय से जेल में बंद हैं. डॉ. कफ़ील के खिलाफ पुलिस ने 409, 308, 120 बी आईपीसी के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है.  उनकी…

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मेरी कोख पर मेरा हक कब बनेगा ?

गोरखपुर. प्रेमचंद पार्क स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आज शाम पटना से आयी सांस्कृतिक संस्था ‘ कोरस ‘ ने प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति की चर्चित कहानी ‘ कुच्ची का कानून ’ का मंचन किया. यह आयोजन प्रेमचन्द साहित्य संस्थान और अलख कला समूह ने किया था। नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे. नाटक के मंचन के बाद वरिष्ठ कथाकार मदन मोहन ने नाटक की निर्देशक एवं कोरस की सचिव समता राय को स्मृति चिन्ह प्रदान किया. ‘ कुच्ची का कानून ‘ गांव के गहरे अंधकूप से एक स्त्री…

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लेनिन : जो समय से प्रभावित ही नहीं, जिसने समय को प्रभावित भी किया

गोपाल प्रधान (व्लादिमीर इल्यिच उल्यानोव जो लेनिन के नाम से लोकप्रिय हैं , के जन्म दिवस पर गोपाल प्रधान का लेख ) 1917 के अक्टूबर/नवम्बर महीने में रूस में एक ऐतिहासिक अश्रुतपूर्व प्रयास हुआ। वह प्रयास उन्नीसवीं सदी की क्रांतियों को पूर्णता प्रदान करने वाला था और बीसवीं सदी का चेहरा इससे निर्मित हुआ. सारी दुनिया का शायद ही कोई मुल्क होगा जिसकी चेतना में इस क्रांति की मौजूदगी न हो. हमारे देश में भी रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘ रशियार चिठी ’ और प्रेमचंद के तमाम लेखन में इसका समर्थन मिलता…

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न्याय के लिए आजीवन लड़ने वाले शख्स के रूप में पहचाने जाएंगे सच्चर साहेब : एनएपीएम

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) की जस्टिस राजेन्द्र सच्चर को श्रद्धांजलि   नई दिल्ली.  आज न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर जी पंचतत्व में विलीन हुए. सच्चर साहेब  न्याय के लिए आजीवन लड़ने वाले शख्स के रूप में पहचाने जाएंगे. वे पीयूसीएल जैसे मानव अधिकार संगठनों के साथ तो थे ही , वे देश के मुस्लिमों पर बनी सच्चर कमेटी के अध्यक्ष भी रहे. देश के जन आंदोलनों में शायद ही कोई ऐसा जनपक्षीय और पर्यावरणपक्षीय आंदोलन होगा जिसके हक में सच्चर साहेब खड़े ना हुए होंगे . 90 वर्ष से ऊपर की उम्र…

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जन संस्कृति मंच ने दैनिक जागरण के ‘ बिहार संवादी ’ आयोजन के बहिष्कार की अपील की

पटना. कठुआ गैंगरेप और नृशंस हत्या के बारे में फर्जी खबर छापने के विरोध में जन संस्कृति मंच ने साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों से दैनिक जागरण द्वारा आयोजित ‘बिहार संवादी’ नामक आयोजन के बहिष्कार की अपील की है. जन संस्कृति मंच, पटना के संयोजक राजेश कमल ने बयान जरी कर कहा कि  कठुआ गैंगरेप और नृशंस हत्या तथा हत्यारों के पक्ष में शर्मनाक राजनीतिक तरफदारी का जब पूरे देश और दुनिया में विरोध हो रहा है, तब दैनिक जागरण द्वारा प्रमुखता से यह फर्जी खबर छापना कि ‘कठुआ मे बच्ची के साथ…

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