Tag : समकालीन कविता की नई कलम

कविता

भारत की कविताएँ कोमलता को कुचल देने वाली तानाशाही कठोरता का प्रतिकार हैं

समकालीन जनमत
 विपिन चौधरी अपना रचनात्मक स्पेस अर्जित करने के बाद हर युवा रचनाकार पहले अपनी देखी, समझी हुई उस सामाजिक समझ को पुख्ता करता है जिससे...
कविता

दीपक जायसवाल की कविताएँ अतीत और वर्तमान की तुलनात्‍मक प्रतिरोधी विवेचना हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल अतीत और वर्तमान के तुलनात्‍मक प्रतिरोधी विवेचन और वैचारिक जद्दोजहद दीपक जायसवाल की कविताओं में आकार पाते हैं। समय के अभेद्य जिरहबख्‍तर को भेद...
कविता

अशोक कुमार की कविताएँ जीवन के खाली पड़े कटोरों को प्रेम से भर देने की कामना हैं

समकालीन जनमत
गिरिजेश कुमार यादव कविता से जुड़े सभी पारंपरिक और आधुनिक सिद्धान्तों का सार यही है कि कविता तभी कविता है जब वह अपने पाठक तक...
कविता

राजेन्द्र देथा की कविताओं में सहज मनुष्‍यता के उत्‍प्रेरक चित्र हैं

समकालीन जनमत
कुमार मुकुल शिशु सोते नहीं अर्द्धरात्रि तक विश्राम भी नहीं करेंगे वे थोड़ा और हँसेंगे अभी और बताएंगे तुम्हें कि हँसना क्या होता है? सोते...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy