समकालीन जनमत

Tag : संस्कृति

ये चिराग जल रहे हैं

हाँ, गिर्दा, तुम्हारा होना एक दिन अवश्य सार्थक होगा

नवीन जोशी
वह बड़े सपने देखने वाला अनोखा रचनाकार था. अत्यन्त सहज, सरल और सुलभ इनसान. उसके सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में से एक है- ‘जैंता, एक दिन...
ज़ेर-ए-बहस

‘ हमारा सबसे बड़ा दुश्मन ’

(फ़िराक गोरखपुरी की एक अप्राप्य और गुमनाम किताब) जिन लोगों ने फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी को आमतौर से और शख्सियत को क़रीब से देखा और...
साहित्य-संस्कृति

प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भोजली पर्व

समकालीन जनमत
पीयूष कुमार हमारे यहाँ छत्तीसगढ़ की संस्कृति प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और उसके मानवीय एकीकरण की भावना से अनुपूरित है। यह समय समय पर लोक...
ज़ेर-ए-बहस

हम देश को कौन सी कहानी सुनायें साथी!

अंशु मालवीय 2019 के आम चुनावों के नतीजों ने हमे जो दिखाया है उसकी तमाम वजहें विश्लेषकों और विद्वानों ने गिनाई है, उनमें ज़्यादातर वजहें...
कहानीशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

आखिरी दौर की डायरी और एक कहानी -मधुकर सिंह

(मधुकर जी ने अपने आखिरी दिनों में अपनी डायरी में राजनीति, खेल, फिल्म आदि पर कुछ टिप्पणियां और साहित्य-संस्कृति से जुड़ी यादों के साथ-साथ कुछ...
साहित्य-संस्कृति

वर्ष 2018 का ‘वारियर एल्विन सम्मान’ पोस्तोबाला को

समकालीन जनमत
लोककला एवं संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'दुनिया इन दिनों' पत्रिका द्वारा दिया जाने वाला प्रसिद्ध 'वारियर एल्विन सम्मान' वर्ष 2018 के लिए पश्चिम...
साहित्य-संस्कृति

तेलंगाना एक बार फिर से जमींदारों के शिकंजे में कस गया है

समकालीन जनमत
एन. आर.श्याम “भारतवर्ष में समय-समय पर उत्पादन के साधनों पर मालिकाना हक, उत्पादन संबंधों में बदलाव और उत्पादन करने वाली शक्तियों की उन्नति, अभिवृद्धि के...
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