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नागरिकता संशोधन विधेयक, एनआरसी व छात्रों पर दमन के खिलाफ लखनऊ में प्रतिरोध

तमाम प्रतिबंधों को धता बता वाम दलों ने लखनऊ समेत प्रदेश भर में किया विरोध

▪बनारस में 75 प्रदर्शनकारी जेल भेजे गये

लखनऊ, 19 दिसंबर। वाम दलों ने नागरिकता संशोधन विधेयक, एनआरसी व जामिया से लेकर अलीगढ़ तक हुए छात्रों पर दमन के खिलाफ तमाम प्रशासनिक प्रतिबंधों को धता बता लखनऊ समेत प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन किया।

लखनऊ में सफेद बारादरी के निकट इंदिरा गांधी आंख अस्पताल के निकट भाकपा (माले), माकपा समेत वाम दलों व संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए और दोपहर दो बजे परिवर्तन चौक की ओर मार्च कर दिया। मार्च में सैकड़ों की संख्या में शामिल लोग नारे लगा रहे थे, “संविधान-विरोधी नागरिकता संशोधन कानून रद्द करो, एनआरसी नहीं चलेगा, जामिया-अलीगढ़ में छात्रों पर पुलिस दमन क्यों- अमित शाह जवाब दो, देश को बांटने की साजिश बंद करो”. जुलूस जिमखाना क्लब होते हुए परिवर्तन चौक के निकट पहुंचा, जहां पहले से बैरिकेड लगाए प्रशासन ने रोक दिया। प्रदर्शनकारी मुख्य सड़क पर बैठ गए और सभा शुरू कर दी, जिसे संबोधित करते हुए भाकपा (माले) की केन्द्रीय कमेटी सदस्य मोहम्मद सलीम ने कहा कि आज का दिन साझी शहादत का दिन है। अशफाकउल्ला, राम प्रसाद बिस्मिल व रोशन सिंह को अंग्रेजी हुकूमत ने आज फांसी दी थी। हिंदुस्तान की आजादी साझी शहादत की बदौलत मिली है और संविधान हमारी साझी विरासत है। हमें संविधान में भेदभावपूर्ण बदलाव मंजूर नहीं है।हम एनआरसी तथा नागरिकता संशोधन कानून को नामंजूर करते हैं। सभा को माकपा के राज्य सचिव हीरालाल यादव, प्रेमनाथ राय, ऐडवा की मधु गर्ग, रिहाई मंच के राबिन, लोकतांत्रिक जनता दल के जुबैर खान, इलाहाबाद विवि के पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर सिंह व अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। मार्च व सभा में माले की केंद्रीय समिति के सदस्य इश्वरी प्रसाद कुशवाहा, जिला प्रभारी रमेश सिंह सेंगर, राज्य समिति सदस्य राधेश्याम मौर्य, ऐपवा नेता मीना, आरआईए के राजीव कुमार, आइसा से जुड़े छात्र और बड़ी संख्या में शहरवासी भी मौजूद थे। सभा के साथ प्रतिवाद कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुआ। ज्ञातव्य है कि पहले वाम दलों व नागरिक संगठनों ने परिवर्तन चौक से हजरतगंज चौराहा स्थित अम्बेडकर प्रतिमा तक मार्च निकालने की घोषणा की थी, लेकिन एक दिन पहले से ही प्रशासनिक दबाव व पुलिस की घेरेबंदी के चलते उन्होंने अपनी रणनीति में परिवर्तन कर विरोध की जगह में बदलाव कर दिया। भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद उन्होंने छापामार तरीके से प्रतिवाद मार्च निकाल दिया। इसके पहले, आज सुबह ही आइसा प्रदेश सचिव शिवा रजवार, स्थानीय संयोजक अतुल व शिवम को पुलिस ने प्रदर्शन में भाग लेने से रोकने के लिए लखनऊ विवि परिसर से गिरफ्तार कर लिया।

बनारस में गिरफ्तार साथियों की रिहाई के लिए पुलिस लाइन पर ऐपवा व अन्य संगठनों का धरना 19 दिसंबर

उधर राबर्ट्सगंज (सोनभद्र) में भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाल रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पार्टी कार्यालय के पास रोक दिया। वहां सड़क पर डेढ़ घंटे की सभा के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया। लखीमपुर खीरी में माले की केंद्रीय समिति सदस्य कृष्णा अधिकारी को जिला कचेहरी में जुलूस के साथ पहुंचने पर गिरफ्तार कर लिया गया। मऊ में माले जिला सचिव को पुलिस ने आज सुबह ही उनके घर मे नजरबंद कर दिया ताकि वे प्रदर्शन न कर सकें। बलिया, देवरिया व कुशीनगर में प्रदर्शनकारी वामपंथी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। बनारस में करीब 75 प्रदर्शनकारी जेल भेजे गये। इनमें माले की केंद्रीय समिति सदस्य मनीष शर्मा भी शामिल हैं। इलाहाबाद में भारी पुलिस बंदोबस्त के बावजूद बड़ी संख्या में लोग वाम दलों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। फैजाबाद में फौव्वारा चौराहा तक मार्च निकाल कर वाम कार्यकर्ताओं ने असफाकउल्लाह की मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद सभा की गई। मिर्जापुर, कानपुर, गाजीपुर, सीतापुर, पीलीभीत, जालौन, आजमगढ़, मथुरा, बिजनौर, मुरादाबाद, रायबरेली, मैनपुरी, आगरा व अमरोहा में भी प्रतिवाद कार्यक्रम हुए।

भाकपा (माले) ने प्रदेश भर में लागू धारा 144 को तोड़कर आज के प्रतिवाद को सफल बनाने के लिए प्रदेशवासियों को बधाई दी है। साथ ही सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की है।

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