Monday, October 3, 2022
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गांव में डॉ. अम्बेडकर व गौतम बुद्ध की मूर्ति रखने पर दलितों का उत्पीड़न

डॉ संदीप पांडेय


उ.प्र. के राजधानी लखनऊ से सटे जिलों के दो गांवों में दलित समुदाय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर व भगवान गौतम बुद्ध की मूर्तियां लगा पाने में असफल है क्योंकि गांव के बाहर के शासक दल के प्रभावशाली लोग व प्रशासन के अधिकारी विरोध कर रहे हैं। सीतापुर जिले की बिस्वां तहसील के थानगांव थाना क्षेत्र के गांव गुमई मजरा ग्राम सभा रामीपुर गोड़वा व बाराबंकी जिले के देवा थाना क्षेत्र के सरसौंदी गांव में मूर्तियां लगाने हेतु जिला प्रशासन के माध्यम से शासन से अनुमति भी मांगी गई है किंतु अभी तक दोनों जगह कोई जवाब नहीं मिला है।

 सीतापुर जिले के गांव गुमई के दलित निवासी गुलशन पुत्र बनवारी की निजी भूमि पर भगवान गौतम बुद्ध व डॉ. बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर की मूर्तियां 24-25 सितम्बर, 2018 की रात को गांव के दलित समुदाय के लोगों ने रखीं तो दिन में पुलिस व उप जलाधिकारी ने आकर मूर्तियां हटा दीं।

 ऐसा बताया जा रहा है कि बगल वाले भूभाग गाटा संख्या 111 ख, जो जगरानी पत्नी स्व. मेडीलाल के नाम दर्ज है, पर देवी का स्थान है जो सरासर असत्य है। भूतपूर्व ग्राम प्रधान मेडीलाल ने यहां बिना छत के चार दिवारें खड़ी की थीं जिस ढांचे के अंदर कोई मूर्ति नहीं है। ढांचे की हालत जर्जर है।

  गांव के बाहर के कुछ लोग, जो स्थानीय विधायक ज्ञान तिवारी से जुड़़े हुए हैं, जबरदस्ती विवाद खड़ा कर रहे हैं। मूर्तियां हटाने के बाद पुलिस ने 14 लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया है जिसमें से अशोक कुमार पुत्र खगेश्वर, विजय पाल पुत्र छोटेलाल, राजकुमार पुत्र मेडीलाल व झब्बूलाल पुत्र भगवानी को गिरफ्तार किया व राजित राम पुत्र प्यारेलाल को पकड़ने के बाद छोड़ दिया। कैलाश, रमेश, छोटेलाल, रामगोपाल, गजोधर, परशुराम मोतीलाल गुलशन, बेचन व दुर्गेश गिरफ्तारी से बचने के लिए गांव से बाहर हैं और पुलिस गांव के अन्य लोगों को आतंकित कर रही है। अशोक व विजयपाल को जमानत मिल गई है।

बाराबंकी जिले के देवा थाना क्षेत्र के सरसौंदी गांव में ग्राम सभा के अभिलेखों में 0.202 हेक्टेयर भूमि जिसका गाटा संख्या 312 है अम्बेडकर पार्क के नाम से दर्ज है। गांव वासी इस वर्ष अम्बेडकर जयन्ती के अवसर पर डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा लगाना चाह रहे। किंतु कार्यक्रम के ठीक पहले लेखपाल कमलेश शर्मा ने झूठी आख्या लगा दी कि उक्त भूमि का वाद बंदोबस्त चकबंदीअधिकारी के यहां चल रहा है जिसमें गांव के ही दो नागरिकों कबीर अहमद व प्रमोद चौहान को गवाह दिखाया गया है। चकबंदी कार्यालय से सम्पर्क करने पर यह बताया गया कि उक्त भूमि को लेकर उनके यहां कोई बाद लम्बित नहीं है। शिकायतकर्ता कन्हैया लाल ईंट भट्ठा मालिक हैं व ग्राम सभा के निवासी भी नहीं हैं। स्पष्ट है कि लेखपाल दलित विरोधी मानसिकता से ग्रसित है।

  हमारी मांग है कि गांव गुमई, जिला सीतापुर में भगवान गौतम बुद्ध व डॉ. बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर की मूर्तियों को गुलशन की भूमि पर वापस रखवाया जाए और निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लिया जाए। इसी तरह गांव सरसौंदी जिला बाराबंकी में अम्बेडकर पार्क में डॉ. अम्बेडकर की मूर्ति लगवाई जाए।

 
डॉ संदीप पाण्डेय प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं और सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) से जुड़े हुए हैं

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