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साहित्य-संस्कृति

आजमगढ़ में समकालीन कथा साहित्य पर विमर्श, छह कहानियों का पाठ

आजमगढ़. गाथांतर, पुरवाई पत्रिका तथा जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन आज़मगढ़ में विज़डम इंटरनेशनल स्कूल ( गोरखपुर रोड , हाफिजपुर ) में किया गया जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों ने समकालीन कथा साहित्य पर अपने विचार व्यक्त किए.

एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए साहित्य कि क्या दिशा हो सकती है और आने वाले संस्कार किस तरह से हो कि लोग अपने साहित्यिक विरासत को सजोये, इस तरह की परिचर्चा इस गोष्ठी में आए हुए साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए. गोष्ठी में सोशल मीडिया फेसबुक आज से साहित्य को मिल रही चुनौतियों पर विशेष बल दिया गया.

इस गोष्ठी में साहित्यकारों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि, आजमगढ़ जनपद पंडित राहुल सांकृत्यायन, लक्ष्मी नारायण पांडे, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध आदि जैसे लोगों की जमीन रही है, यहां पर आकर साहित्य के बारे में नव संवेदना प्रकट करना हम लोगों के लिए गौरव की बात है.

कार्यक्रम की शुरुआत बलिया के रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी की संकल्प टीम द्वारा फैज़, गोरख पांडेय के गीतों की सुर बद्ध प्रस्तुति से हुई. प्रथम सत्र में जलेस के प्रदेश के महासचिव नलिन रंजन जी ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुये समकालीन कथा साहित्य के महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा कि महाकाव्य विधा को उपन्यास ने अपदस्थ किया अब वही संकट उपन्यास के लिये भी आ गया है. यह कम पढे जाने का दौर है. इस दौर में कहानी की किस्सागोई ही उसे बचा सकेगी. डा. सुनीता ने कहानी में कहन की वापसी की बात कही. प्रतिष्ठित आलोचक राकेश बिहारी ने कहा कि कहानी का आलोचक पटवारी या जन गणना अधिकारी नहीं होता. बिना किसी कहानी का नाम लिये कहानी के मुकदमे का फैसला नहीं सुनाना चाहिये.

प्रलेस के संजय श्रीवास्तव कहा स्त्री का कहानी लिखना ही एक राजनैतिक परिघटना है. डा. सुनीता ने कहा वर्तमान कथा साहित्य में हाशिये की कहानी विस्तार मुख्य कहानी से अधिक है. इस अवसर पर कविता-पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गयी। इस सत्र का संचालन डॉ. सोनी पांडेय ने किया.

द्वितीय सत्र कहानी पाठ का था, जिसकी शुरुआत मध्य प्रदेश से आयी सीमा शर्मा ने ‘ मैं, रेज़ा और पच्चीस जून’ कहानी पढ़ कर की। बिहार से आए राकेश बिहारी ने अपनी कहानी ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का पाठ किया। उत्तराखण्ड से आये कथाकार विक्रम सिंह ने ‘काफिल का कुत्ता’ नामक कहानी पढ़ी। गोरखपुर से आये नवोदित कहानीकार रवीन्द्र प्रताप सिंह ने ‘वैशाली एक्सप्रेस’ नामक कहानी का पाठ किया। आजमगढ़ जनपद से प्रज्ञा सिंह ने ‘हंसी की पाज़ेब’ और सोनी पाण्डेय ने ‘सलमबाई’ कहानी का पाठ किया। इस सत्र का संचालन रवींद्र प्रताप सिंह ने किया।

इस अवसर पर प्रियंका, अनामिका सिंह पालीवाल, वन्दना शाह, अनीता सिंह श्रीवास्तव, पूर्णिमा जैसवाल, कुमार मंगलम,अजय पाण्डेय, वी पी तिवारी, संध्या नवोदित, वसुंधरा पाण्डेय, बैजनाथ यादव, जितेन्द्र पाण्डेय, राहुल, जमुना  बीनी, सुनील दत्त प्रतिभा, राजेश आस्थाना, दीपांकर राव आदि उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम के अंत में पुरवाई पत्रिका के सम्पादक आरसी चौहान ने वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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