समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

साहित्य-संस्कृति

घर गोष्ठी में “अंधेरे से उजाले तक : सावित्री बाई फुले और फ़ातिमा शेख़ ” पर चर्चा , फिल्म “ फुले ” दिखाई गई

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इलाहाबाद। भारत की प्रथम महिला शिक्षिका फ़ातिमा शेख़ के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर  8 जनवरी को कोरस इलाहाबाद द्वारा आयोजित घर गोष्ठी में “अंधेरे...
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कथाकार मनोज रुपड़ा से बदसलूकी करने वाले कुलपति को हटाने के लिए रायपुर में प्रदर्शन

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रायपुर। वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार मनोज रुपड़ा से बदसलूकी करने वाले कुलपति आलोक चक्रवाल को हटाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के रायपुर में लेखक-संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों...
साहित्य-संस्कृति

शिक्षा से ही समाज बदलेगा, समानता आएगी – डॉ मंदाकिनी राय

सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख की याद में परिसंवाद और कवि गोष्ठी लखनऊ।  एपवा, जसम और आइसा की ओर से चार जनवरी को एसबीएम लाइब्रेरी...
साहित्य-संस्कृति

विचार गोष्ठी का आयोजन कर सफदर हाशमी को याद किया

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बेगूसराय। जन संस्कृति मंच (जसम) ने चार जनवरी को दिनकर कला भवन के कैंपस में प्रख्यात रंगकर्मी सफदर हाशमी की याद में विचार गोष्ठी का...
कविता

सत्यपाल सहगल की कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन है

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अरुण आदित्य सत्यपाल सहगल की कविताएँ सहज में सुंदर की अनुभूति की कविताएँ हैं। इन कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन...
साहित्य-संस्कृति

“  शिवकुमार पराग की पराग जी की गजलें अंधेरे के खिलाफ रोशनी लेकर आती हैं ”

वाराणसी।  कवि  शिवकुमार पराग की की गजलों के नए संग्रह ‘ देख सको तो देखो ‘ का लोकार्पण 29 दिसम्बर को बनारस के जिला राजकीय...
कविता

दुर्गेश की कविताऍं कच्ची-पक्की स्मृतियों की ताज़ी व पहली तोड़ हैं

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नीरज हमारे इर्द-गिर्द हमेशा अनुत्तरित आत्माभिव्यक्तियों के गुबार मौजूद होते हैं जिन्हें केवल सहृदय ही महसूस कर पाते हैं, कवि-हृदय इस मामले में सबसे सहज...
स्मृति

विनोद कुमार शुक्ल : अभाव का ऐश्वर्य और साधारण की असाधारणता

सियाराम शर्मा
प्रसिद्ध कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर जन संस्कृति मंच गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है। अपनी भाषा की रचनात्मकता,...
स्मृति

“ विनोद कुमार शुक्ल अपने लेखन के जरिए ताजिंदगी मनुष्यता के पक्ष में खड़े रहे    ”

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच ने कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल की याद में स्मृति सभा का आयोजन किया  रायपुर. जन संस्कृति मंच की रायपुर इकाई ने प्रसिद्ध...
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‘जीवन में कोमलतम चीज़ों को बचाना चाहती हैं डॉ. प्रज्ञा गुप्ता की कविताएँ’

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काव्य-संग्रह “ काँस के फूलों ने कहा जोहार ! ”  का लोकार्पण , परिचर्चा रांची।  डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के सभागार में 15 दिसंबर को स्नातकोत्तर...
साहित्य-संस्कृति

महिला मुक्ति का प्रश्न राजनीतिक, सामाजिक के साथ सांस्कृतिक भी है- कुमुदिनी पति

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इलाहाबाद। कोरस, इलाहाबाद द्वारा 17 दिसंबर को निर्भया आंदोलन की याद में घर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था – “महिला सुरक्षा के...
कविता

शचीन्द्र आर्य की कविताएँ वापस लौट आने की संभावना हैं

समकालीन जनमत
राग रंजन शचीन्द्र आर्य की कविताएँ आज की हिंदी कविता में एक ऐसे हस्तक्षेप के रूप में पढ़ी जानी चाहिए, जो तेज़ आवाज़ में नहीं,...
स्मृति

विचारधारा में दृढ़ और व्यवहार में सरल थे कामरेड राजा बहुगुणा: दीपंकर भट्टाचार्य

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भाकपा (माले) ने नगर निगम सभागार में आयोजित की स्मृति सभा नगर निगम सभागार में भाकपा (माले) द्वारा कामरेड राजा बहुगुणा की स्मृति में 14...
कविता

कवि जितेंद्र विसारिया की कविताएँ समाज और सत्ता के खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं।

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रौशन कुमार कवि जितेंद्र विसारिया जी की कविताएँ समाज और सत्ता के दोहरेपन तथा खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं। इनकी कविताएँ धर्म, मिथक, इतिहास और...
स्मृति

मास्टर साहब जो मेरे जेठ थे

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(हम क्रांतिकारियों की छवि प्रायः लार्जर दैन लाइफ बना देते हैं। उनकी जिंदगी के छोटे-छोटे प्रसंगों, उनकी कमजोरियों या उनके बहुत सारे सहयोगियों के बारे में...
स्मृति

समकालीन कला का तिलिस्म और भुनेश्वर भास्कर की कला

( चित्रकार और कला समीक्षक भुनेश्वर भास्कर का आज दिल्ली में असामयिक निधन हो गया। उनके हृदय का आपरेशन होना था, पर उसके पहले ही...
कहानी

हत्यारे न्यायाधीश

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(एक सोसायटी के रहवासियों के माध्यम से  व्यंग्यात्मक ढंग में  यह कहानी शुरू होती है। लेकिन चोरी की एक घटना के बाद कहानी बढ़ती हुई ...

‘काँस के फूलों ने कहा, जोहार !’: देशज सौंदर्य और स्त्री चेतना के विविध स्वर

समकालीन जनमत
डॉ. जिन्दर सिंह मुंडा ‘काँस के फूलों ने कहा, जोहार !’ डॉ प्रज्ञा गुप्ता का पहला काव्य- संग्रह है । सद्य: प्रकाशित इस काव्य- संग्रह...
कविता

चंदन सिंह की कविताएँ आत्मयात्रा के अनुभवों को आकार देने की कोशिश हैं

गौरव पाण्डेय चंदन मूलतः युवा चित्रकार हैं और कविताएँ लिखते हैं। चंदन के पास ऐसी भाषा है जो बोलने से ज़्यादा सुनने और ठहरने की...
पुस्तक

कीर्तिगान : भीड़ हत्या का दस्तावेज़ी यथार्थ

समकालीन जनमत
जितेन्द्र विसारिया यह कहा जाता है कि भीड़ का कोई मस्तिष्क नहीं होता, किंतु जब भीड़ किसी विचार या विचारधारा से संचालित होती है, तब...
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