समकालीन जनमत

Category : साहित्य-संस्कृति

स्मृति

वीरेंद्र यादव : ‘मुख्यधाराओं’ के विरुद्ध तैरने वाला आलोचक

आशुतोष कुमार
वीरेंद्र यादव हिंदी की मार्क्सवादी आलोचना को इक्कीसवीं सदी में ले जाने वाले प्रमुख आलोचक थे। उनके आकस्मिक निधन से ऐसा लग रहा है कि...
स्मृति

राजेन्द्र कुमार होना आसान नहीं

कौशल किशोर
विनोद जी, नासिर भाई और ज्ञान जी के जाने के सदमे से हम उबर ही रहे थे कि राजेंद्र कुमार जी चले गए। 16 जनवरी...
पुस्तक

नारीवाद, पूंजीवाद और पारिस्थितिकी

गोपाल प्रधान
2023 में नार्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी प्रेस से जोहान्ना ओकसाला की किताब ‘ फ़ेमिनिज्म, कैपिटलिज्म, ऐंड इकोलाजी ’ का प्रकाशन हुआ । लेखिका को लगातार यह डर...
कविता

सुमन शेखर की कविताएँ प्रयोगधर्मी और लंबी साँस की कविताएँ हैं

समकालीन जनमत
आदित्य शुक्ला सुमन शेखर की ये कविताएँ लंबी साँस की कविताएँ हैं। जैसे किसी चित्रकार ने एक लंबी साँस में एक चित्र खींच दिया हो।...
पुस्तक

पहाड़ों की ठंडी हवा सरीखी कविताएँ :अशोक कुमार के काव्य संग्रह ‘रिक्तियों में पहाड़’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
आलोक कुमार मिश्रा हिन्द युग्म प्रकाशन से कवि अशोक कुमार का नया काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है- ‘रिक्तियों में पहाड़।’ संग्रह के नाम में ही...
स्मृति

साहित्य-समाज में हमेशा उपस्थित रहेंगे ज्ञानरंजन

समकालीन जनमत
लखनऊ। प्रसिद्ध कथाकार तथा ‘पहल’ के संपादक ज्ञानरंजन की स्मृति में 10 जनवरी को बलराज साहनी सभागार, कैसरबाग मेंआयोजित श्रद्धांजलि सभा में लखनऊ के साहित्यकारों...
साहित्य-संस्कृति

घर गोष्ठी में “अंधेरे से उजाले तक : सावित्री बाई फुले और फ़ातिमा शेख़ ” पर चर्चा , फिल्म “ फुले ” दिखाई गई

समकालीन जनमत
इलाहाबाद। भारत की प्रथम महिला शिक्षिका फ़ातिमा शेख़ के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर  8 जनवरी को कोरस इलाहाबाद द्वारा आयोजित घर गोष्ठी में “अंधेरे...
साहित्य-संस्कृति

कथाकार मनोज रुपड़ा से बदसलूकी करने वाले कुलपति को हटाने के लिए रायपुर में प्रदर्शन

समकालीन जनमत
रायपुर। वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार मनोज रुपड़ा से बदसलूकी करने वाले कुलपति आलोक चक्रवाल को हटाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के रायपुर में लेखक-संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों...
साहित्य-संस्कृति

शिक्षा से ही समाज बदलेगा, समानता आएगी – डॉ मंदाकिनी राय

सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख की याद में परिसंवाद और कवि गोष्ठी लखनऊ।  एपवा, जसम और आइसा की ओर से चार जनवरी को एसबीएम लाइब्रेरी...
साहित्य-संस्कृति

विचार गोष्ठी का आयोजन कर सफदर हाशमी को याद किया

समकालीन जनमत
बेगूसराय। जन संस्कृति मंच (जसम) ने चार जनवरी को दिनकर कला भवन के कैंपस में प्रख्यात रंगकर्मी सफदर हाशमी की याद में विचार गोष्ठी का...
कविता

सत्यपाल सहगल की कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन है

समकालीन जनमत
अरुण आदित्य सत्यपाल सहगल की कविताएँ सहज में सुंदर की अनुभूति की कविताएँ हैं। इन कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन...
साहित्य-संस्कृति

“  शिवकुमार पराग की पराग जी की गजलें अंधेरे के खिलाफ रोशनी लेकर आती हैं ”

वाराणसी।  कवि  शिवकुमार पराग की की गजलों के नए संग्रह ‘ देख सको तो देखो ‘ का लोकार्पण 29 दिसम्बर को बनारस के जिला राजकीय...
कविता

दुर्गेश की कविताऍं कच्ची-पक्की स्मृतियों की ताज़ी व पहली तोड़ हैं

समकालीन जनमत
नीरज हमारे इर्द-गिर्द हमेशा अनुत्तरित आत्माभिव्यक्तियों के गुबार मौजूद होते हैं जिन्हें केवल सहृदय ही महसूस कर पाते हैं, कवि-हृदय इस मामले में सबसे सहज...
स्मृति

विनोद कुमार शुक्ल : अभाव का ऐश्वर्य और साधारण की असाधारणता

सियाराम शर्मा
प्रसिद्ध कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर जन संस्कृति मंच गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है। अपनी भाषा की रचनात्मकता,...
स्मृति

“ विनोद कुमार शुक्ल अपने लेखन के जरिए ताजिंदगी मनुष्यता के पक्ष में खड़े रहे    ”

समकालीन जनमत
जन संस्कृति मंच ने कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल की याद में स्मृति सभा का आयोजन किया  रायपुर. जन संस्कृति मंच की रायपुर इकाई ने प्रसिद्ध...
साहित्य-संस्कृति

‘जीवन में कोमलतम चीज़ों को बचाना चाहती हैं डॉ. प्रज्ञा गुप्ता की कविताएँ’

समकालीन जनमत
काव्य-संग्रह “ काँस के फूलों ने कहा जोहार ! ”  का लोकार्पण , परिचर्चा रांची।  डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के सभागार में 15 दिसंबर को स्नातकोत्तर...
साहित्य-संस्कृति

महिला मुक्ति का प्रश्न राजनीतिक, सामाजिक के साथ सांस्कृतिक भी है- कुमुदिनी पति

समकालीन जनमत
इलाहाबाद। कोरस, इलाहाबाद द्वारा 17 दिसंबर को निर्भया आंदोलन की याद में घर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था – “महिला सुरक्षा के...
कविता

शचीन्द्र आर्य की कविताएँ वापस लौट आने की संभावना हैं

समकालीन जनमत
राग रंजन शचीन्द्र आर्य की कविताएँ आज की हिंदी कविता में एक ऐसे हस्तक्षेप के रूप में पढ़ी जानी चाहिए, जो तेज़ आवाज़ में नहीं,...
स्मृति

विचारधारा में दृढ़ और व्यवहार में सरल थे कामरेड राजा बहुगुणा: दीपंकर भट्टाचार्य

समकालीन जनमत
भाकपा (माले) ने नगर निगम सभागार में आयोजित की स्मृति सभा नगर निगम सभागार में भाकपा (माले) द्वारा कामरेड राजा बहुगुणा की स्मृति में 14...
कविता

कवि जितेंद्र विसारिया की कविताएँ समाज और सत्ता के खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं।

समकालीन जनमत
रौशन कुमार कवि जितेंद्र विसारिया जी की कविताएँ समाज और सत्ता के दोहरेपन तथा खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं। इनकी कविताएँ धर्म, मिथक, इतिहास और...
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