समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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कवितास्मृति

इज़ाडोरा डंकन को उनकी पुण्यतिथि पर के. मंजरी श्रीवास्तव की काव्यात्मक श्रद्धांजलि

समकालीन जनमत
विश्व के महान व्यक्तित्वों (ख़लील जिब्रान, ग़ालिब, मीर, रूमी, इक़बाल, पाब्लो नेरुदा, इज़ाडोरा) के जीवन और विचारों को भारत के समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्थापित करते...
कविता

संतोष पटेल की कविताएँ मानवीय संघर्ष और अस्मिता के विस्तार तक ले जाती हैं

समकालीन जनमत
नीलाम्बुज सरोज संतोष पटेल की कविताएँ हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हैं। उनका कविता संग्रह ‘कारक के चिह्न’ केवल साहित्यिक सौंदर्य का उत्सव नहीं, बल्कि...
जनमत

पंचायत: एपिसोडिक शो से गंभीर ड्रामा तक

महेश सिंह भारतीय सिनेमा के विशाल परिदृश्य में अक्सर अपराध, हिंसा और ग्लैमर वाली फिल्मों का ही बोलबाला रहा है, लेकिन अमेज़ॅन प्राइम वीडियो पर...
कविता

गौरव सिंह की कविताएँ नेपथ्य में खो गए जीवन-रागों को आवाज़ देती हैं

समकालीन जनमत
प्रो. रामेश्वर राय कविता समय से तटस्थ नहीं होती, लेकिन समय के साथ उसका रिश्ता इतिहास और सूचना-तंत्र से भिन्न होता है। कविता में दर्ज़...
पुस्तक

स्मिता सिन्हा के कविता संग्रह ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
जावेद आलम ख़ान छलकती पीड़ा को रोककर बेआवाज़ प्रार्थना है ‘रूंधे कंठ की अभ्यर्थना’। स्मिता सिन्हा का यह संग्रह अपने नाम को सार्थक करता है।...
कविता

रत्नेश कुमार की कविताएँ सामाजिक सरोकारों और मानव मूल्यों का यथार्थ चित्रण हैं

रौशन कुमार रत्नेश की कविताएँ मानव जीवन में होने वाली उथल-पुथल समेत समकालीन वक्त की समस्याओं एवं चुनौतियों को ज़रूरी ढंग से रेखांकित करतीं हैं।...
जनमत

एनसीईआरटी की ‘विभाजन विभीषिका’ अंग्रेज शासकों-हिंदू महासभा-आरएसएस के अपराधों पर पर्दा डालने की बेशर्म कोशिश

समकालीन जनमत
शम्सुल इस्लाम    शिक्षा से जुड़ी एक प्रचलित कहावत है कि अगर किसी अयोग्य व्यक्ति को शिक्षक नियुक्त किया जाता है, तो छात्रों की कई...
जनमत

‘संयुक्त-चुनाव विधेयक चुनाव आयोग को खुला खेल करने की छूट दे देता है’’

समकालीन जनमत
भारत के पूर्व मुख्य-न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इस विधेयक की समीक्षा से सम्बन्धित संसदीय-समिति को अपने विचारों से अवगत कराया : उनका कहना है कि...
जनमतज़ेर-ए-बहस

लाल किले से आरएसएस को वैधता या लोकतंत्र विरोधी प्रतिक्रांति की घोषणा

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण    आजाद लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष भारत स्वतंत्रता का 78 वां वर्ष पूरा करते-करते अपने प्रतिलोम में बदल गया है। 15 अगस्त को लाल किले...
पुस्तक

उषा राय के कविता संग्रह ‘भीमा कोरेगाँव तथा अन्य कविताएँ’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण ●यह कास का फूल है इसके पत्ते हाथ चीर देते हैं घाव भले ही भर जाये पर कसक रह जाती है बड़ा खुद्दार...
कविता

नीलाम्बुज सरोज की कविताएँ जन आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
सुमन कुमार सिंह समकालीन हिंदी कविता का स्वर बहुरंगी है। यह रंग ठीक ‘हिंदी-सा’ है। यह इसलिए भी कि यह देश के हर कोने, हर...
कविता

धर्मेश चौबे की कविताएँ दो दुनियाओं के बीच क्षरित होने की मार्मिक अभिव्यक्ति हैं

समकालीन जनमत
विपिन चौधरी   “घर केवल ईंट पत्थर और गारे का जोड़ भर नहीं होते जो ईश्वर की कोई भी चुनी हुई कौम ढहा दे तो...
जनमत

राष्ट्रीय तिरंगा झण्डा और आरएसएस का अवसरवाद

समकालीन जनमत
शम्सुल इस्लाम    आरएसएस-भाजपा शासकों ने भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ नारा देकर देशवासियों से राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगा फहराने...
जनमत

15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस 2025 का संदेश

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण    इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस विगत वर्षों की तुलना में एक  नये अंदाज में आने जा रहा है। इसके संकेत संसद से ‌लेकर...
जनमत

राहुल गाँधी के बयान के निहितार्थ और फासीवाद के खतरे

समकालीन जनमत
जयप्रकाश नारायण    विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा कि ‘मैं जानता हूं कि मैं आग से खेल रहा हूं’ और...
कविता

पवन कुमार वर्मा की कविताएँ समकालीनता का स्वीकार प्रस्तुत करती हैं

समकालीन जनमत
आलोक रंजन   युवा कवि पवन कुमार वर्मा की कविताएँ सामने हैं और सामने है हमारे समय की असलियतों की अभिव्यक्ति भी। इन कविताओं को...
जनमत

नामचीन लेखिका जया जादवानी बनीं जन संस्कृति मंच रायपुर की अध्यक्ष

समकालीन जनमत
लोकतंत्र, न्याय और समानता के लिए कार्यरत प्रतिबद्ध लेखिकाओं और संस्कृतिकर्मियों के हाथों में जसम रायपुर की कमान लेखिका वंदना कुमार और दिलशाद सैफी उपाध्यक्ष...
कविता

रौशन कुमार की कविताएँ जेएनयू से अर्जित सामाजिक परिवर्तन की उम्मीद से निर्मित हैं

समकालीन जनमत
नीलम युवा कवि रौशन कुमार की कविताएँ ‘ भूख हड़ताल ‘, ‘ नजीब तुम ज़िंदा हो ‘…,  ‘ क्या है जे एन यू ‘, ‘...
पुस्तक

हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘दाता पीर’ की पुस्तक समीक्षा

समकालीन जनमत
पवन करण दाता पीर एक सुनार का बेटा था। चाँद के टुकड़े जैसा सुंदर। उसने आवाज़ लगाई कि कुछ गढ़वा लो, कुछ बनवा लो। उसने...
शख्सियत

यूं ही लोग उन्हें भाभी नहीं कहते थे: प्रणय कृष्ण

01अगस्त को मीना राय के जन्मदिन पर इलाहाबाद में ‘स्मरण में है आज जीवन’ कॉम. मीना राय की स्मृति में प्रलेसं, जलेसं, जसम और समकालीन...
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