समकालीन जनमत

Author : दुर्गा सिंह

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(लेखक दुर्गा सिंह आलोचक और संस्कृतिकर्मी हैं)
ज़ेर-ए-बहस

पर्यावरण अब एक राजनैतिक एजेण्डा है

दुर्गा सिंह
आज़मगढ़। जन संस्कृति मंच ने 10 जनवरी 2026 को एक गोष्ठी का आयोजन किया। अरावली संकट के सन्दर्भ में पर्यावरण और संस्कृति विषय पर केन्द्रीय...
जनमतपुस्तकसाहित्य-संस्कृति

उर्दू इसी देश की बोली-भाषा है

दुर्गा सिंह
  भाषा का सवाल मानव सभ्यता के इतिहास में हमेशा अहम रहा है। एक तो भाषा में ही कोई संस्कृति ज्यादा स्थायित्व पाती है, दूसरे...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

मैं लेखन के लिए ही बना हूँ

  ‘लेखक से मिलिए’ अभियान के अंतर्गत जन संस्कृति मंच, आज़मगढ़ इकाई 17 अगस्त 2025 को प्रतिष्ठित लेखक पंकज गौतम के घर पहुंची। पंकज गौतम...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

‘कुन्द’ जी स्वयं में एक लाइब्रेरी हैं

जन संस्कृति मंच, आज़मगढ़ इकाई, ‘लेखक के घर चलो’ अभियान के अंतर्गत आज़मगढ़ के साहित्य जगत में प्रतिष्ठित जगदीश प्रसाद बरनवाल ‘कुन्द’ के घर पहुंची।...
पुस्तक

साधारण जन की कहानियां समेटे संग्रह

दुर्गा सिंह
  हरीश चन्द्र पाण्डे एक कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं। ‘कुछ भी मिथ्या नहीं है’, ‘एक बुरूंश कहीं खिलता है’, ‘भूमिकाएँ खत्म नहीं होतीं’,...
जनमत

‘नयी कहानी आन्दोलन और मार्कण्डेय की कहानियाँ’ विषय पर हुआ संवाद

दुर्गा सिंह
इलाहाबाद।  प्रसिद्ध कहानीकार मार्कण्डेय की पुण्यतिथि के अवसर पर एक संवाद-गोष्ठी का आयोजन हिन्दुस्तानी एकेडमी के गाँधी सभागार में किया गया। इस अवसर पर मार्कण्डेय...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और सामाजिक लोकतंत्र

निराला के निबंधों और टिप्पणियों में राजनीति और समाज को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श मिलता है। इसमें वे राष्ट्रीय मुक्ति के लिए चलने वाली राजनीति और...
जनमतपुस्तक

ज़ीरो माइल अयोध्या

अयोध्या, पिछले दिनों हुए लोकसभा के आम चुनाव के परिणाम आने के बाद, फिर से चर्चा में आ गया। पिछले सात दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक...
कहानीजनमतसाहित्य-संस्कृति

पंकज मित्र की कहानियाँ: पूंजी और सत्ता की थम्हायी उम्मीद के बियाबान में भटकते लोगों की दास्तान 

दुर्गा सिंह
1991 में आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के लागू होने के बाद भारतीय समाज और संस्कृति में ऐसे परिवर्तन शुरू हुए, जो सतत विकास से अलग...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और भाषा

दुर्गा सिंह
राष्ट्र निर्माण में भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। निराला भावी राष्ट्र निर्माण को लेकर अपने लेखों और टिप्पणियों में  विचार करते हैं। आजादी की...
जनमत

पंचायत-3: नये ग्रामीण यथार्थ के बीच मानवीय संवेदनाओं की जद्दोजहद रचती वेब श्रृंखला

दुर्गा सिंह
‘पंचायत’ सीजन-3, पिछले दिनों प्राइम वीडियो पर जारी हुई। यह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी होने वाली वेब श्रृंखला है। यह ओटीटी पर जारी होने वाली...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और गांधी

दुर्गा सिंह
निराला राष्ट्रीय आंदोलन से गहरे सम्बद्ध थे। वे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नीतियों पर टिप्पणी, आलोचना तो करते ही थे, साथ ही राष्ट्रीय आंदोलन के...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

जमींदारी उन्मूलन, भूमि-सुधार और मार्कण्डेय की कहानियाँ

दुर्गा सिंह
 (हिन्दी कहानी के प्रमुख हस्ताक्षर मार्कण्डेय के जन्मदिन पर समकालीन जनमत के पाठकों के लिए प्रस्तुत है दुर्गा सिंह का लेख) मार्कण्डेय की कहानी ‘भूदान’...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण का सवाल और नेहरू

दुर्गा सिंह
निराला कवि और लेखक होने के साथ चिंतक भी हैं। निराला का वैचारिक लेखन भी उसी मात्रा में है, जितना कविता और गद्य लेखन। निराला...
कहानीसाहित्य-संस्कृति

परिवर्तन के कहानीकार हैं मार्कण्डेय

दुर्गा सिंह
आज़मगढ़ विगत 18 मार्च 2024 को आज़मगढ़ के शिब्ली मंजिल सभागार में मार्कंडेय स्मृति  संवाद का आयोजन किया गया।  इस संवाद गोष्ठी का विषय ‘मार्कंडेय...
साहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखनः राष्ट्र निर्माण का सवाल और जाति-वर्ण

दुर्गा सिंह
निराला के जन्मदिन(बसंत पंचमी)  के अवसर पर प्रस्तुत लेख निराला के लेखन में राष्ट्र निर्माण, स्वाधीनता, धर्म, भाषा व जाति-वर्ण आदि को  रचनात्मक ढंग से...
साहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखनः राष्ट्र निर्माण और हिंदू-मुस्लिम एकता का सवाल

दुर्गा सिंह
निराला ने रचनात्मक साहित्य के साथ साहित्यिक पत्रकारिता भी की है। अपने समय में प्रेमचंद के अलावा निराला ही थे, जो रचनात्मक साहित्य और साहित्यिक...
साहित्य-संस्कृति

निराला का वैचारिक लेखन: राष्ट्र निर्माण और स्त्री प्रश्न

दुर्गा सिंह
निराला के वैचारिक लेखन की मूल अंतर्वस्तु भी उनके बाकी के साहित्य के क्रम में है। स्वाधीनता, हिंदी जाति का उत्थान और राष्ट्र निर्माण की...
शख्सियतसाहित्य-संस्कृति

आम किसान की पक्षधरता के कहानीकार हैं मार्कण्डेय

दुर्गा सिंह
(हिन्दी के प्रसिद्ध कहानीकार मार्कण्डेय के जन्मदिन, 2 मई पर विशेष) आज जबकि गांव और किसान दोनों पूंजी और बाजारवादी प्रसार के बीच बेतरह पीछे...
जनमतसाहित्य-संस्कृति

हिंदी जातीयता के निर्माण का सवाल और निराला

दुर्गा सिंह
निराला बंगाली जातीयता से प्रभावित थे। ब्रह्म समाज, रामकृष्ण परमहंस, देवेन्द्र नाथ टैगोर, रवीन्द्र नाथ  टैगोर, विवेकानंद  के अलावा बंगाल के इस जागरण में जितने...
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