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योगी राज में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ लखनऊ की सड़कों पर उतरी ऐपवा की महिलाएं

महिलाओं के तेवर देखकर सड़क पर बैठ गए पुलिस अधिकारी : बोले हमारे ऊपर से होकर जाइए

यूपी को अपराध, हत्या और बलात्कार की राजधानी नहीं बनने देंगे – ऐपवा सचिव

लखनऊ, 21 मई. प्रदेश में बढ़ती महिला हिंसा की घटनाओं पर चारबाग रेलवे स्टेशन से मुख्यमंत्री आवास तक शांतिपूर्ण ढंग से निकल रहे ऐपवा के जुलूस को पुलिस अधिकारियों ने परमिशन न होने का हवाला देकर हुसैनगंज के निकट रोकने की कोशिश की और महिलाओं के उग्र तेवर देखकर इस कोशिश में नाकाम पुलिस अधिकारी महिलाओं के जुलूस के सामने बैठ गए और महिलाओं को अपने ऊपर से मार्च निकालने की बात कहने लगे।
ऐपवा ने पुलिस के इस घुटना टेकू नीति को ठुकराते हुए जीपीओ तक मार्च किया जहां वह सभा में तब्दील हो गया ।

ऐपवा की राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने जीपीओ पार्क में गांधी प्रतिमा के पास सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में तेजी से बढ़ते अपराध, हत्या, बलात्कार की जघन्य घटनाओं ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नाबालिग बच्चियों से सामूहिक बलात्कार के मामले में यूपी पहले पायदान पर है। उन्नाव में नाबालिग के साथ बलात्कार की घटना और जेल में उसके पिता की हत्या के प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि योगी सरकार और उसका प्रशासन खुलेआम अपराधी विधायकों को सजा दिलाने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है। पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और योगी राज जंगल राज में तब्दील हो गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं संगठित होकर संघ-भाजपा के इस फासीवादी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगी और यूपी को अपराध, हत्या और बलात्कार का केंद्र नहीं बनने देंगी।

ऐपवा प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने की कोशिश औऱ दलितों पर बढ़ता अत्याचार – सहारनपुर की घटना, गोरखपुर के गगहा में दलितों पर पुलिस फायरिंग, बलिया में दलित नाबालिग से बलात्कार करके जिंदा जला देने की घटना और दोषियों पर कोई कार्रवाई न करना – यह दर्शाता है कि योगी सरकार संविधान के मुताबिक नहीं बल्कि मनुवादी नजरिये से इस प्रदेश को चलाना चाह रही है।

 

 

ऐपवा की जिला सचिव मीना सिंह ने कहा कि मोदी-योगी सरकार द्वारा शुरू योजनाओं के जरिये ही महिलाओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के नाम पर महिलाओं की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करके उनका यौन उत्पीड़न किया जा रहा है।
उसी तरह से गौरक्षा के नाम पर दलित-मुस्लिम समुदाय के लोगों की हत्या करवाई जा रही है। उसी तरह से, महिला सुरक्षा के नाम पर एन्टी-रोमियो स्क्वायड बनाकर प्रेमी जोड़ों की मारपीट, लूट के साथ महिलाओं पर नैतिक पहरेदारी तो हो ही रही है, साथ ही सांप्रदायिक राजनीति का गंदा खेल खेला जा रहा है।

ऐपवा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विद्या रजवार ने कहा कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली भाजपा सरकार में उनके अपराधी मंत्रियों, विधायकों से ही महिलाओं को अपना बचाव करना पड़ रहा है।

मार्च में गाजीपुर, बलिया, चंदौली, वाराणसी, भदोही, गोरखपुर, फैजाबाद, अंबेदकरनगर, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, कानपुर, जालौन, लखनऊ से ऐपवा की महिलाओं की उपस्थिति रही।

सभा के अंत में, ऐपवा ने राज्यपाल को संबोधित नौ-सूत्री मांगपत्र सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से दिया।

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