हमारी संवेदना को विस्तार देता है साहित्य : प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी


वाराणसी. साहित्य चिंतक एवं अंग्रेजी के प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी ने कहा है कि साहित्य हमारी संवेदना को विस्तार और निखार देता है. साहित्य दूसरों के दुःख की अनुभूति कराकर हमारा दुःख कम करता है और हमारे सुख को व्यक्ति सीमा से ऊपर उठाता है.
प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय के राधाकृष्णन सभागार में ” साहित्य हमें क्या देता है ” विषय पर आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे. यह आयोजन त्रैमासिक पत्रिका ‘साखी’ के अट्ठाइसवें अंक के लोकार्पण मौके पर किया गया था.
प्रो त्रिवेदी ने कहा कि साहित्य मनुष्य को उसके दुःखों और संघर्षों से अलग एक और लोक में ले जाता है और उसे कुछ राहत व विश्राम देता है. साहित्य नींद और स्वप्न की तरह है. साहित्य के द्वारा हम एक ही जीवन में अनेक जीवन जी पाते हैं.
अध्यक्षीय उद्बोधन में महात्मा गाँधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर कमलेश दत्त त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य मनुष्य के जीवन को समूचापन देता है. अगर भाषाएँ और ललित कलाएँ न होंगी तो मनुष्य का जीवन ही अधूरा हो जाएगा. जब तक मानव चेतना में सृजन की इच्छा रहेगी तब तक साहित्य भी रहेगा और मनुष्य के जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करता रहेगा.
अतिथियों का स्वागत हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामकली सराफ ने किया. संचालन प्रोफेसर अवधेश प्रधान एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर सदानन्द शाही ने किया.
स्वागत वक्तव्य के बाद प्रोफेसर शाही ने पत्रिका का संक्षिप्त परिचय दिया तत्पश्चात दो युवा कवियों-विहाग वैभव और शरदेन्दु उपाध्याय ने पत्रिका के इस अंक  में प्रकाशित अपनी कविताओं का पाठ किया.
कार्यक्रम में प्रो रामकीर्ति शुक्ल, प्रो आनन्दवर्धन शर्मा, प्रो.राजकुमार, प्रो. आभा, प्रो.महेन्द्र नाथ राय, प्रो. उमेश चन्द्र दूबे (प्रमुख कला संकाय) प्रो दीपक मलिक,प्रो रामा नन्द राय, प्रो बलिराज पाण्डेय,प्रो दीनबन्धु तिवारी, प्रो. वी.एन त्रिपाठी, डा. भानु प्रताप सिंह , डा. कमल कुमार, डा. राकेश, डा. ब्जराज, डा. नीतू , विश्वमौलि, धीरज, रुद्र प्रताप एवं विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.

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