समकालीन जनमत

Tag : Dr. ramayan Ram

साहित्य-संस्कृति

वर्ग की अवधारणा को खंडित नहीं करता, बल्कि व्यापक बनाता है अस्मितावाद : डॉ रामायन राम

समकालीन जनमत
अनिल सिन्हा स्मृति व्याख्यान दलित चेतना के कवि आशाराम जागरथ और सी बी भारती ने कविताएं सुनाईं लखनऊ। ” अस्मितावाद न तो सर्वहारा को विभाजित...
कविता

सपना चमड़िया की कविताएँ : कविता में सहज प्रतिरोध की अभिव्यक्ति

समकालीन जनमत
रामायन राम अस्मिता विमर्श और उसके साहित्य के विषय में यह आम धारणा है कि यह एक स्व – केंद्रित विमर्श है यानि अस्मिताएँ अपने...
शख्सियत

प्रो. तुलसी राम के चिंतन व लेखन को सामने लाना ज़रूरी है!

डॉ रामायन राम
“जब मैं पहले दिन स्कूल पहुंचा तो नाम लिखते हुए अध्यापक मुंशी राम सूरत लाल ने पिता जी से पूछा यह कब पैदा हुआ था?...
जनमतशख्सियतस्मृति

कटरी की रुक्मिनी: कविता का अलग रास्ता

डॉ रामायन राम
वीरेन डंगवाल 70 के दशक की चेतना के कवि हैं। कविता के क्षेत्र मे उनका प्रवेश 70 के दशक में हुआ । यह वह समय...
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