समकालीन जनमत

Tag : समकालीन हिंदी कविता

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पल्लवी की कविताएँ संवेदना की परिपक्व भाव-भूमि पर रची गई हैं।

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प्रज्ञा गुप्ता पल्लवी की कविता स्त्री-स्वातंत्र्य, विद्रोह और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया को रूपक और प्रतीकों के माध्यम से बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत...
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सुमन कुमार सिंह की कविताएँ वंचित तबकों का यथार्थ बयान करती हैं

अवंतिका सिंह सुमन कुमार सिंह की कविताएँ समकालीन भारतीय समाज का दर्पण हैं। इन कविताओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विडंबनाओं, आम आदमी की...
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संतोष पटेल की कविताएँ मानवीय संघर्ष और अस्मिता के विस्तार तक ले जाती हैं

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नीलाम्बुज सरोज संतोष पटेल की कविताएँ हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हैं। उनका कविता संग्रह ‘कारक के चिह्न’ केवल साहित्यिक सौंदर्य का उत्सव नहीं, बल्कि...
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गौरव सिंह की कविताएँ नेपथ्य में खो गए जीवन-रागों को आवाज़ देती हैं

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प्रो. रामेश्वर राय कविता समय से तटस्थ नहीं होती, लेकिन समय के साथ उसका रिश्ता इतिहास और सूचना-तंत्र से भिन्न होता है। कविता में दर्ज़...
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रत्नेश कुमार की कविताएँ सामाजिक सरोकारों और मानव मूल्यों का यथार्थ चित्रण हैं

रौशन कुमार रत्नेश की कविताएँ मानव जीवन में होने वाली उथल-पुथल समेत समकालीन वक्त की समस्याओं एवं चुनौतियों को ज़रूरी ढंग से रेखांकित करतीं हैं।...
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नीलाम्बुज सरोज की कविताएँ जन आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति हैं

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सुमन कुमार सिंह समकालीन हिंदी कविता का स्वर बहुरंगी है। यह रंग ठीक ‘हिंदी-सा’ है। यह इसलिए भी कि यह देश के हर कोने, हर...
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धर्मेश चौबे की कविताएँ दो दुनियाओं के बीच क्षरित होने की मार्मिक अभिव्यक्ति हैं

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विपिन चौधरी   “घर केवल ईंट पत्थर और गारे का जोड़ भर नहीं होते जो ईश्वर की कोई भी चुनी हुई कौम ढहा दे तो...
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पवन कुमार वर्मा की कविताएँ समकालीनता का स्वीकार प्रस्तुत करती हैं

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आलोक रंजन   युवा कवि पवन कुमार वर्मा की कविताएँ सामने हैं और सामने है हमारे समय की असलियतों की अभिव्यक्ति भी। इन कविताओं को...
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रौशन कुमार की कविताएँ जेएनयू से अर्जित सामाजिक परिवर्तन की उम्मीद से निर्मित हैं

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नीलम युवा कवि रौशन कुमार की कविताएँ ‘ भूख हड़ताल ‘, ‘ नजीब तुम ज़िंदा हो ‘…,  ‘ क्या है जे एन यू ‘, ‘...
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अवंतिका सिंह की कविता यात्रा संभावनाओं भरी नई सुबह की तलाश में है।

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प्रज्ञा गुप्ता अवंतिका सिंह की कविताएँ सामाजिक यथार्थ एवं उसकी विडंबनाओ का बोध कराती हुई हमसे संवाद करती है। अवंतिका एक ऐसा संसार रचना चाहती...
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अरुण देव की कविताएँ मृत्‍यु की लौकिकता का संसार रचती हैं

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पंकज चौधरी मृत्‍यु के बाद जीवन को समाप्‍त मान लिया जाता है। माना जाता है कि मृत्‍यु के बाद जीवन की तमाम गतिविधियाँ और कारोबार...
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उद्देश्य कुमार की कविताएँ मध्यवर्गीय जीवन की एकरसता से जूझती हैं

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अनुराग यादव एक रचनाकार अगर वास्तव में समाज को एक नया नज़रिया, सोचने समझने का एक नया तरीका प्रदान करना चाहता है उसे अपनी दृष्टि...
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संघमित्रा राएगुरू की कविताएँ सामाजिक और सांस्कृतिक संचेतना से सराबोर हैं

शिरोमणि महतो उड़ीसा की युवाकवि संघमित्रा राएगुरू उड़िया व हिंदी साहित्य से जुड़ी हुई हैं। दोनों भाषाओं में उनका समानाधिकार है। वह मुख्य रूप से...
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अपूर्वा दीक्षित की कविताएँ मन की डोर को थामे रहने की समझ से निर्मित हैं

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पीयूष कुमार संभावनाओं से भरी अपूर्वा की कविताएँ.. समकालीन कविता जहाँ साहित्यिक लोकतंत्र के विस्तार से सम्पन्न हुई है, वहीं विचारहीन युवाओं के इस स्वर्णकाल...
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सबीहा रहमानी की कविताओं में सामाजिक सच्चाई से टकराने का साहस है

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मयंक खरे डॉ. सबीहा रहमानी की कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे एक वैचारिक प्रतिरोध, सामाजिक दृष्टि और सांस्कृतिक पुनर्पाठ की कोशिशें...
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गुलज़ार हुसैन की कविताएँ नफ़रत के ख़िलाफ़ मोहब्बत का पैग़ाम हैं

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पंकज चौधरी प्रखर युवा कवि, पत्रकार गुलज़ार हुसैन का जन्म एक अत्यंत कमज़ोर आर्थिक पृष्ठभूमि में हुआ। नौकरी की तलाश में मुंबई जैसे महानगर पहुँचे,...
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नीरज की कविताएँ समकालीन जटिलताओं की पुख़्ता शिनाख़्त हैं

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विजय राही समकाल को समझे बिना कविता को समझना दुष्कर है। कोई भी कवि समय सापेक्ष परिस्थितियों को उजागर करता हुआ आगे बढ़ता है या...
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टेकचंद की कविताएँ वर्तमान समय के असंतोष को चिन्हित करती हैं

उमा राग
ख़ुदेजा ख़ान किसी भी साहित्यकार की लेखन के प्रति प्रतिबद्धता तब तक अधूरी है जब तक वो जन सरोकारों से न जुड़े। देश- दुनिया के...
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मोहन मुक्त की कविताएँ भाषा में वर्णाश्रमी प्रपंचों को तोड़ने वाली राजनीतिक चेतना की बानगी हैं

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केतन यादव एक पूर्वकथन यह कि मेरी भूमिका मात्र इस कवि से परिचय कराने की होगी बाकि बात कवि की कविताएँ खुद कहेंगी। यह एक...
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रानी कुमारी की कविताएँ मनुष्य की गरिमा के पक्ष में उठाये गए सवाल हैं

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अरविंद पासवान रानी की कविताओं से होकर गुजरना, मानो आईना में अपना ही अक्स देखना है। कवयित्री कल्पना के उड़ान पर सवार नहीं होती, बल्कि...
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