समकालीन जनमत

Tag : लोकतंत्र

इतिहास

उनसे झुकने को कहा गया वो रेंगने लग गए

शालिनी बाजपेयी
मार्च 1971 में हुए चौथी लोकसभा के चुनाव अपने आप में खासे महत्वपूर्ण थे। कांग्रेस इंदिरामयी हो चुकी थी। तब मार्गदर्शक-मण्डल शब्द तो गढ़ा नहीं...
कविताजनमतसाहित्य-संस्कृति

कुमार मुकुल की कविताएँ : लोकतंत्र के भगवाकरण की समीक्षा

समकालीन जनमत
30 वर्षों से रचनारत कुमार मुकुल के कविता परिदृश्य का रेंज विशाल और वैविध्य से भरा है , प्रस्तुत कविताओं में आज के समय को...
जनमत

हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभार

गोपाल प्रधान
सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन...
जनमत

भारत के लोकतंत्र को भारत के मीडिया से ख़तरा है : रवीश कुमार

समकालीन जनमत
  ( वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार द्वारा शनिवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंडिया कॉन्‍फ्रेंस 2018 में दिया गया भाषण )   आप सभी का शुक्रिया....
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