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छात्र-युवा दिल्ली में करेंगे “यंग इंडिया अधिकार मार्च”

नई दिल्ली। 29-30 नवंबर को देशभर के 206 किसान संगठनों ने अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर मार्च किया था। किसानों से प्रेरणा लेते हुए देशभर के सौ से ज्यादा छात्र – युवा संगठनों, छात्रसंघों और आंदोलनों को एकजुट करते हुए ‘यंग इंडिया नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी’ (YINCC) का गठन किया गया है।

कल 27 दिसंबर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में एफटीटीआई, आईआईटी मद्रास, पंजाब विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, एएमयू, मानू, इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत देश के सौ से ज्यादा आंदोलनों के नेताओं, छात्र-युवा संगठनों और छात्रसंघों की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में ये साझा कार्यक्रम बना था कि मोदी सरकार के छात्र-युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ एक समन्वय समिति का गठन करके इसका विरोध किया जायेगा और दिल्ली में 7 फरवरी को मार्च किया जायेगा।


आज प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में YINCC की तरफ से जनसुनवाई और प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया तथा 2019 के चुनाव के लिए ‘यंग इंडिया चार्टर’ रिलीज किया गया। YINCC की तरफ से घोषणा की गई कि शिक्षा रोजगार और सम्मान के लिए 7 फरवरी को देशभर से छात्र युवा दिल्ली में मार्च करेंगे। देश के युवाओं ने मोदी सरकार की शिक्षा विरोधी, युवा विरोधी और विभाजन कारी नीतियों को पिछले 5 सालों से झेला और उसके खिलाफ संघर्ष किया है अब वे 7 फरवरी को दिल्ली में अपनी एकजुटता के साथ मार्च के लिए उतरेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। साथ ही 8-9 जनवरी को होने वाले आम हड़ताल को समर्थन करते हुए मोदी सरकार से ये मांग भी की गयी कि मज़दूरों का शोषण और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिये श्रम कानूनों में बदलाव बन्द किया जाए।

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष एन साई बालाजी ने कहा- ” देश के किसानों की तरह अब देश के युवा भी मोदी सरकार को हटाने की हुंकार भरेंगे। हमें हमारे शिक्षा सम्मानजनक रोजगार से वंचित किया जा रहा है और आवाज उठाने पर हमें देशद्रोही कहा जा रहा है। हम लोगों ने पिछले 5 सालों में सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष किया है। अब हम एकजुट होकर मार्च करेंगे और इस सरकार को सीधी चुनौती देंगे।”

यूथ फॉर स्वराज की तरफ से अनुपम ने कहा – “सरकार सम्मानजनक रोजगार के अवसरों को को जिस तरीके से समाप्त कर रही है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। यूथ फॉर स्वराज तहे दिल से इस अभियान में भागीदारी करेगा और इस बात की गारंटी करेगा की यंग इंडिया अधिकार मार्च इस जनविरोधी सरकार के सामने मजबूत चुनौती पेश कर सके।”

‘पिंजरा तोड़’ से अवंतिका ने कहा – “हमारी छात्रवृत्ति में कटौती कर छात्रावास से वंचित कर, हम पर भेदभाव कारी नियमों को थोपकर दरअसल ये सरकार हमें उच्च शिक्षा से वंचित कर देना चाहती है। देश भर की छात्राओं ने न केवल इनके भेदभावकारी नियमो और कर्फ्यू टाइम के खिलाफ आंदोलन किया बल्कि शिक्षा के अधिकार के लिए भी संघर्ष किया।

आइसा से सुचेता डे ने कहा – ” इस सरकार ने आज़ादी के बाद शिक्षा को न्यूनतम बजट दिया है। 24 लाख सरकारी पद अभी भी रिक्त है। सरकार BHU को AMU के खिलाफ खड़ा कर रही है। देश के बेरोजगार नौजवानों को धर्म के आधार पर एक दूसरे से लड़वाना चाहती है। वो चाहते है कि लोग JNU से घृणा करे। ये नही हो सकता और हम ऐसा होने नही देंगे। यंग इंडिया अपनी लड़ाई लड़ेगा ओर इन साजिशों को ध्वस्त करेगा।”

CYSS से हरिओम ने कहा- “सरकार को कार्पोरेट को मुनाफा देने के बजाय शिक्षा पर और अधिक खर्च करना चाहिए तथा युवाओं को रोजगार देना चाहिए। यंग इंडिया ने एक चार्टर तैयार किया जिसमें नफरत और बटवारे के लिए कोई जगह नहीं है। हम सब इस संघर्ष में एकजुट हैं।”

FEDCUTA के सचिव अतुल सूद ने शिक्षक समुदाय की तरफ से इस पहलकदमी को अपना समर्थन दिया। YINCC के घटक दलों की ओर से सभी वक्ताओं ने अपनी बात रखी और कहा कि वो 7 फरवरी को दिल्ली की सड़कों पर उतरकर पुरजोर आंदोलन करेंगे।

आन्दोलन की प्रमुख माँगें हैं कि  सभी रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए, परीक्षा में पेपर लीक पर भ्रष्टाचार के राज को खत्म किया जाए,शिक्षा पर बजट का न्यूनतम 10% खर्च हो, स्कूल बंद करने, सीट कटौती, फंड कटौती, फीस वृद्धि और आरक्षण कटौती की नीतियों को तुरंत रद्द  किया जाए । लैंगिक भेदभाव के नियमों को खत्म कर सभी छात्राओं के लिए हॉस्टल की गारंटी करें । सभी असरदार संस्थाओं में सक्रिय यौन उत्पीड़न विरोधी सेल का गठन हो।

शिक्षा का भगवाकरण बंद   किया जाए,कैंपस में अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी सुनिश्चित हो । संविधान प्रदत्त आरक्षण को हर हाल में पूरा कर सभी कैंपसों में भेदभाव विरोधी सेल का गठन किया जाए ।

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