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फासीवाद के खिलाफ मजबूत वाम एकता आज की जरूरत : दीपंकर भट्टाचार्य

नई दिल्ली. “ त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जनतंत्र की हत्या बंद करो ” नारे के साथ 24 जुलाई को दिल्ली के संसद मार्ग पर पांच प्रमुख वामपंथी पार्टियों का संयुक्त धरना हुआ. धरने में दिल्ली व आस-पास के क्षेत्रों के वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

धरने को माकपा के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव सुधाकर रेड्डी, भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, फॉरवर्ड ब्लाक के राष्ट्रीय महासचिव देवब्रत विश्वास और आरएसपी के नेता अशोक घोष के साथ ही त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री मानिक सरकार, केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन, पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के अध्यक्ष विमान बोस और हिन्दुस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के नेता बीजू नायक ने भी संबोधित किया.

धरने को संबोधित करते हुए कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज पूरे देश में वामपंथी –प्रगतिशील कार्यकर्ताओं पर फासिस्ट हमले तेज हो गए हैं. परन्तु त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल में ये हमले ख़ास हैं क्योंकि वहाँ वामपंथ लम्बे समय से सत्ता में था. भाजपा – आरएसएस अपनी इस जीत को विपक्ष पर हमले का लाइसेंस मान बैठी है. इस लिए ये हमले सिर्फ उन पर नहीं हो रहे जो सत्ता में थे, बल्कि हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं और कार्यलयों पर भी हमले हुए हैं जबकि हम सत्ता में कभी नहीं रहे.

उन्होंने कहा अभी हाल में पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा जिले में हमारे जिला कार्यालय को टीएमसी के गुंडों ने बिल्डर से मिलकर कब्जा कर लिया. त्रिपुरा के उदयपुर में हमारे जुलूस पर पुलिस की मौजूदगी में भाजपा–आरएसएस के गुंडों ने हमला किया. उन्होंने कहा यह राजनीतिक हिंसा है और वाम पर हमला है.

कामरेड दीपंकर ने कहा कि वे सोचते हैं कि वामपंथी लम्बे समय से सरकार पर निर्भर थे इस लिए हममें अब सत्तर के दशक जैसी प्रतिरोध की ताकत नहीं बची होगी. हमें इन फासिस्ट ताकतों को दिखाना होगा की वामपंथ सड़क पर एक नई ऊर्जा और नई ताकत के साथ मुकाबला कर रहा है. इस लिए अब सड़क पर प्रतिरोध खडा हो. उन्होंने कहा भाजपा अब सिर्फ दंगाई पार्टी नहीं है. आज जो भीड़ तंत्र हर जगह दिख रहा है वो प्रायोजित है, संगठित है. वे हर भीड़ हिंसा के बाद सरकार के संरक्षण के प्रति आश्वस्त हैं.

उन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश पर हमले के सवाल का जवाब देते हुए देश के गृहमंत्री बोल रहे हैं कि सबसे बड़ी भीड़ हिंसा 84 में हुई थी. तो क्या केंद्र सरकार उन हत्याओं की संख्या तक पहुंचना चाहती है ? उनके एक केन्द्रीय मंत्री कह रहे हैं कि जैसे–जैसे मोदी की लोकप्रियता बढ़ेगी भीड़ हिंसा भी बढ़ेगी. आज देश में लोकतंत्र को बचाने में वामपंथ की बड़ी भूमिका होगी. हमें त्रिपुरा, बंगाल में अपना बचाव करना है पर देश में असुरक्षित हर व्यक्ति और हर समुदाव का भी बचाव करना है. कामरेड दीपंकर ने कहा कि बंगाल , त्रिपुरा में वामपंथ की सरकार के दौरान हममें कई सवालों पर मतभेद थे. पर अब हम सब सड़क हैं. हमें बड़ी और मजबूत वाम एकता की और बढ़ना होगा. फासीवाद के खिलाफ यह मजबूत वाम एकता आज की जरूरत है.

सबसे पहले कामरेड सीताराम येचुरी ने सभा की शुरुआत करते हुए त्रिपुरा और बंगाल में वामपंथी कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमले के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा की इस फासीवादी सरकार का मुकाबला एकताबद्ध वामपंथ ही कर सकता है.

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