समकालीन जनमत
स्मृति

………तो क्या कामरेड जफ़र हुसैन की हत्या किसी ने नहीं की ?

शंकरलाल चौधरी

कामरेड जफ़र हुसैन की हत्या को आज एक साल हो गया.  पिछले वर्ष 16 जून को उनकी हत्या नगरपालिका प्रतापगढ़ के कर्मचारियों के एक समूह ( कमिश्नर अशोक जैन के नेतृत्व में) द्वारा उस समय कर दी गई जब कामरेड जफ़र इस दल द्वारा बस्तीवालों के घरों में शौचालय नहीं होने की मजबूरी के चलते खुले में शौच के लिए गई महिलाओं की वीडियोग्राफी का विरोध कर रहे थे.

वास्तव में कामरेड जफ़र  इस समस्या को पिछले कुछ  समय से से नगर पालिका  प्रशासन और जिला प्रशासन के सामने बस्ती के लोगों के साथ उठा रहे थे. परन्तु प्रशासन जिसमें भू-माफियाओं का दखल है, शहर के विकसित क्षेत्र के अधीन आ गई इस बस्ती के बेशकीमती हो जाने के चलते इसे खाली करवाने पर तुला था.

हत्या के पहले दिन भी कामरेड जफ़र कमिश्नर के पास बस्ती में शौचालयों के निर्माण की अनुमति और भारत योजना के अंतर्गत वितीय सहायता जारी करने के लिए गये थे परन्तु उनके आवेदन को फाड़कर फेंक दिया गया.

प्रत्यक्षदर्शी महिलाओं के अनुसार कामरेड जफ़र  ने वीडियोग्राफी से जन नगर पालिका कर्मचारियों को रोका तो उन्होंने उन पर लात-घूसों से हमला कर दिया जिससे वह बुरी तरह घायल होकर गिर पड़े.

घायल हालात में जफर ने उठकर बस्ती की ओर चलने की कोशिश की तो फिर गिर कर बेहोश हो गये. वहां इकट्ठे हुए लोग आटो रिक्शा से उन्हें अस्पताल ले गये जहाँ उन्हें भर्ती करने के बाद किसी से मिलने नहीं दिया गया और कुछ समय बाद उनकी मौत हो जाने की सूचना मिली.

बस्तीवासियों ने हमलावरों- कमिश्नर अशोक जैन के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की  परन्तु नामजद अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं की गयी. मीडिया,खासतौर से सोशल मीडिया में जब हत्या की भर्त्सना होने लगी तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उदयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक की ट्वीट को रिट्वीट करते हुए मात्र कहा- “जफ़र हुसैन की मृत्यु का उन्हें बेहद अफ़सोस है ”.

मुख्यमंत्री की पुलिस महानिरीक्षक की ट्वीट से यह साफ हो गया था कि इस मामले को दबाने का प्रयत्न किया जा रहा है.

पुलिस और प्रशासन द्वारा जानबूझ कर इस मामले को लटका कर ठंडे बस्ते में डालने की योजना स्पष्ट होने के बाद प्रतापगढ़ के नागरिकों की ओर से “ जस्टिस फॉर जफ़र” नाम से एक संघर्ष मोर्चा बना कर 3 जुलाई को हजारों की तादाद में जिला कमीश्नर कार्यालय पर “न्याय मार्च ” निकाल कर नामजद हत्यारों की गिरफ्तारी कर उन पर हत्या का मुकदमा चलाने की मांग की गई.

तब प्रतिनिधि-मंडल से जिला प्रशासन ने कहा कि उनका ‘ बिसरा ’ फोरेंसिक लैब के पास भिजवा दिया गया है और रिपोर्ट आने पर ही कार्यवाही होगी. बाद में न्याय मंच और बस्तीवासियों द्वारा प्रशासन से तामीद करने पर हमेशा यही जबाब मिलता रहा कि अभी रिपोर्ट आनी बाकी है.

एक साल बीत गया,  हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं. हालाँकि इस घटना के बाद मजबूरी में खुले में शौच करनेवाली महिलाओं की विडियोग्राफी करने जैसी शर्मनाक घटनाएँ रुक गईं  पर इस मुद्दे का मूल भू-माफिया के दबाव में बस्ती को खाली करवाने की तलवार अभी भी लटकी हुई है.

16 जून को कामरेड जफ़र की शहादत की बरसी पर “जस्टिस फॉर जफ़र संघर्ष मंच” की बैठक चल रही थी तो कामरेड जफ़र की बेवा रसीदा ने प्रश्न किया कि “ तो क्या अब उनको यह मानना ही पड़ेगा कि उसके पति जफ़र की हत्या किसी ने नहीं की ?  ”

बैठक में सम्मिलित लोगों ने संकल्प लिया कि का. जफ़र के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जायेगा.  उनके हत्यारों को कानूनी कार्यवाही के जरिये सींखचो तक पहुंचा कर का. जफ़र को न्याय दिलाने और आवासहीन गरीबों को पट्टे दिलाने के संघर्ष को तब तक जारी रखा जायेगा जब तक उनका हक़ उनको नहीं मिलता है.

 

[author] [author_image timthumb=’on’][/author_image] [author_info]शंकरलाल चौधरी, भाकपा-माले, प्रतापगढ़ के जिला सचिव हैं [/author_info] [/author]

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