जामिया विश्वविद्यालय में दिल्ली पुलिस की बर्बरता और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आजमगढ़ में प्रतिवाद मार्च

खबर जेरे बहस

आज़मगढ़, 16 दिसम्बर 2019: नागरिकता संशोधन कानून CAA के खिलाफ़ तथा जामिया विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी और हाॅस्टल में घुसकर दिल्ली पुलिस द्वारा की गयी बर्बर, पाशविक कारनामे के विरोध में नागरिक मंच आज़मगढ़ ने प्रतिवाद मार्च का आयोजन किया।

वीर कुंवर सिंह उद्यान में एकत्रित हुए लोग जुलूस की शक्ल में नारे लगाते हुए आगे बढ़े। मार्च में शामिल लोग ‘नागरिकता कानून समाप्त करो!’, जामिया, एमयू में लाठीचार्ज का जिम्मेदार, तड़ीपार तड़ीपार, लिखी तख्तियां लिए चल रहे थे।

मार्च अग्रसेन चौक, कलेक्ट्री कचेहरी तथा राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा से होते हुए डीएम ऑफिस पहुँच कर डीएम को ज्ञापन देने के साथ समाप्त हुआ। माननीय राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन में नागरिकता संशोधन कानून समाप्त करने, असम में इस कानून का विरोध करते हुए मारे गये लोगों को मुआवजा देने, गिरफ्तार किये गये लोगों को रिहा करने, उन पर लादे गये मुकदमे खत्म करने तथा जामिया विश्वविद्यालय में पुलिस द्वारा की गयी हिंसा की जांच और दोषी पुलिस कर्मियों को दण्डित करने की मांग की गयी। मार्च के बाद मीडिया कर्मियों से वार्ता करते हुए नागरिक मंच के जयप्रकाश नारायण ने इस मार्च और आगे के संघर्षों को लेकर कहा कि नागरिकता संशोधन कानून राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे के अंतर्गत बनाया गया है। 1936-37 में ही इसके मुखिया गोलवरकर ने लिखा है कि भारत में मुसलमानों को रहना है तो उन्हें किसी भी नागरिक अधिकार की मांग नहीं करनी होगी। इसी एजेंडे के तहत माॅब लिंचिंग, तीन तलाक़, कश्मीर लाॅक डाउन, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, अयोध्या निर्णय के बाद यह नागरिकता संशोधन कानून बनाया गया है। आरएसएस और भाजपा अपने इस विभाजनकारी एजेंडे को उस स्तर तक ले जाना चाहते हैं जहाँ से देश को अराजकता में झोंक कर जनतंत्र को सस्पेंड कर सकें। दूसरी तरफ यह कानून संविधान के बुनियादी आधार और मूल भावना के खिलाफ़ है। इस कानून के खिलाफ़ और व्यापक आन्दोलन किया जाएगा और हम इसे नागरिक अवज्ञा के स्तर तक ले जाएंगे। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह हमारा जनतांत्रिक अधिकार है कि अगर प्रधानमंत्री भी संविधान और कानून के बाहर जाता है तो उसे प्रधानमंत्री मानने से इनकार कर सकते हैं!

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