डीजल-पेट्रोल के बढ़े हुए दाम वापस लेने की मांग पर पटना में प्रदर्शन

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पटना. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के वावजूद डीजल-पेट्रोल के दाम में लगातार वृद्धि के खिलाफ आज पटना में इनौस, खेग्रामस और किसान सभा के नेताओं ने विरोध दर्ज किया.

देश व्यापी प्रतिवाद दिवस को सफल बनाते हुए तीनों संगठनों के कार्यकर्ता पटना के जीपीओ गोलम्बर पर एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना प्रतिवाद दर्ज किया.

इस मौके पर खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा, ऐपवा नेता शशि यादव, माले नेता अभ्युदय, किसान नेता उमेश सिंह, एक्टू नेता रणविजय कुमार, इनौस की तरफ से पटना के सचिव विनय कुमार सहित विजय यादव, अखिलेश कुमार, राहुल कुमार, राजीव कुमार, सन्नी कुमार आदि ने मार्च का नेतृत्व किया.

वक्ताओं ने कहा कि कहां तो मोदी ने वादा किया था कि हम सरकार में आते ही जनता के दुःख -दर्द दूर कर देंगे लेकिन अभी की सरकार ने जनता के लिए मुसीबत बन गई है.कोरोना का भय दिखाकर जिस बेतरतीबी से लॉकडाउन थोपा वह समाज के हर तबके के लिए एक आपदा ही साबित हुआ है.इस विपत्ति काल में डीजल-पेट्रोल के की कीमतों में हुई बेलगाम बढ़ोतरी जनता के दैनिक जीवन की मुश्किलें बढ़ाने वाला है जिसे कत्तई सहन नहीं किया जा सकता है.जो डीजल-पेट्रोल की मुल्य वृद्धि के खिलाफ पिछली सरकार को कोसते हुए आलोचना करते थे वही सत्ता में बैठने के बाद रिकॉर्ड तोड़ मुल्य वृद्धि के बावजूद आपराधिक मौन धारण कर जनता से दुश्मनों जैसा सलूक कर रहे हैं. ऐसी जनविरोधी सरकार से जनता ऊब चुकी है और बहुत जल्द ही जनता इनको इनके किए की सजा जनता देगी.

नेताओं ने कहा कि वृद्धि कर मोदी सरकार ने लॉकडाउन की मार झेल रही जनता के प्रति संवेदनहीनता का परिचय दिया है। कोरोना संकट काल में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिर रहे थे तब केंद्र सरकार ने 14 मार्च को पेट्रोल, डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। इसके बाद पांच मई को फिर से पेट्रोल पर रिकार्ड 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया।

डीजल-पेट्रोल के बढ़े हुए दाम के कारण किसानों को लगभग 1000 रुपया प्रति एकड़ खर्च बढ़ेगा और साथ ही साथ जरूरी सामानों के दाम बढ़ने के कारण आम गरीब जनता जो पहले से ही लॉकडाउन की मार झेल रही है उनपर बहुत बड़ा बोझ, सरकार के इस फैसले के कारण पड़ेगा।

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