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‘ क्या इस देश से इंसाफ़ का जनाज़ा उठ गया है ’

( उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ़्तार पत्रकार सिद्दीक कप्पन की पत्नी रिहाना सिद्दीक यह बातचीत रेडिफ़ डॉट काॅम में 18 दिसम्बर को प्रकाशित हुआ था। समकालीन जनमत के लिए इसका हिन्दी अनुवाद दिनेश अस्थाना ने उपलब्ध कराया है) 

रेडिफ़ डॉट काॅम की शोभा वारियर जब गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीक कप्पन की पत्नी रिहाना सिद्दीक से नवम्बर में मिली थीं तो उन्हें उम्मीद थी कि उच्च्तम न्यायालय तो उनके पति को जमानत दे ही देगा। पर जब उच्च्तम न्यायालय ने भी उत्तरप्रदेश सरकार की दलीलें सुनकर उनकी जमानत याचिका को निरस्त कर दिया तो उनकी सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गयीें। अब इसकी सुनवाई 21 जनवरी, 2021 के लिये तय की गयी है।

कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया के तीन लोगों के साथ सिद्दीक जब हाथरस में एक दलित महिला के दुर्दान्त बलात्कार और जघन्य हत्या की घटना की रिपोर्टिंग करने जा रहे थे तभी उसकी गिरफ्तारी मथुरा में हुयी थी।

रिहाना रोती हुयी बताती हैं कि ‘‘ जब आपसे पिछली बार बात हुयी थी उस समय मुझे पूरी उम्मीद थी कि उन्हें जमानत मिल जायेगी। अब वे (उत्तरप्रदेश सरकार) जिस तरह से उनपर आरोप पर आरोप लगाते जा रहे हैं, उससे मेरा डर बढ़ता जा रहा है। तब से मैं लगातार रोये जा रही हूँ और कभी-कभी तो मुझे लगता है कि मेरा दिल फट जायेगा और मैं मर जाऊँगी………।’’

दो दिन पहले आपके पति की जमानत याचिका का विरोध करते हुये उ0प्र0 सरकार ने दलील दी थी कि उनके सम्बन्ध प्रतिबन्धित संगठन सिमी से थे और पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सदस्य होने के बावजूद वह पत्रकार के भेस में काम कर रहे थे…..

यह एकदम झूठ है। वे बस झूठ ही बोल रहे हैं, वे हर बार एक नया झूठ बोल रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें जमानत न मिले। मेरे पति पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सदस्य नहीं हैं, और उनका सिमी से भी कुछ लेना-देना नहीं है। उनसे पहले कहा गया कि वे पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सदस्य हैं लेकिन इसे साबित करने के लिये उनके पास सबूत क्या है ? उनके सिमी से भी सम्बन्ध होने के क्या सबूत हैं ? हर बार जब उनकी जमानत याचिका सुनवाई के लिये सामने आती है तो वे एक नया आरोप लगा देते हैं। तब के0यू0डब्ल्यू0जे0 (केरला यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) उन आरोपों को गलत साबित करने के लिये सबूत दिखाती है। फिर, अगली बार वे एक नया आरोप लगाते हैं। बस यही चल रहा है।

शुरू-शुरू में उ0प्र0 सरकार का आरोप था कि कप्पन पी0एफ0आई0 के सदस्य हैं और कार में सवार बाकी तीन लोग कैम्पस फ्रंट के। उनकी दलील थी कि वह पहले पी0एफ0आई0 के अखबार, तेजस में काम करते थे…..।

हाँ, उन्होंने तेजस में पत्रकार के तौर पर काम किया था। उस अखबार में अकेले कप्पन ही पत्रकार नहीं थे; बहुत सारे लोग तेजस में काम करते थे। तो क्या इसका यह मतलब है कि तेजस में काम करनेवाले सारे पत्रकार पी0एफ0आई0 के सदस्य हैं ? सिर्फ तेजस में काम करने की वज़ह से वह पी0एफ0आई0 के सदस्य हो जायेंगे ? और फिर यह दलील भी दी जा सकती है कि अगर मान लें कि वह पी0एफ0आई0 के सदस्य हैं भी तो क्या पी0एफ0आई0 का सदस्य होना गुनाह है ? क्या यह एक प्रतिबन्धित संगठन है ? जहाँ तक मेरी जानकारी में है, पी0एफ0आई0 कोई प्रतिबन्धित संगठन नहीं है।

पर असलियत यह है कि वे पी0एफ0आई0 के सदस्य नहीं हैं, पर उन्होंने पहले तेजस में काम किया है। लेकिन जब वह बन्द हो गया तो उन्होंने तल्समयम् में काम किया। जब तल्समयम् का भी प्रकाशन बन्द हो गया तब उन्होंने अज़ीमुगम् में काम किया। इस बीच कुछ महीनों तक उन्होंने वीक्षणम् और मंगलम् में भी काम किया था।

उनके इन सारे प्रकाशनों में काम करने के पर्याप्त सबूत हैं। वह केरला यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के सेक्रेटरी रहे। क्या आप समझती हैं कि दूसरे पत्रकार इतने बेवकूफ़ रहे होंगे कि उन्होंने पी0एफ0आई0 के एक सदस्य को अपनी यूनियन का सेक्रेटरी बना दिया ?

इस समय उनके तार सिमी से जोड़े जा रहे हैं, पी0एफ0आई0 से नहीं, आपका क्या ख्याल है कि ऐसा क्यों किया जा रहा है ?

सिमी एक प्रतिबन्धित संगठन है जबकि पी0एफ0आई0 के साथ ऐसा नहीं है। मैंने रिसर्च किया है कि इसकी स्थापना 1977 में हुयी थी और 2001 में इसे प्रतिबन्धित कर दिया गया। आप जानती हैं कि इस समय इक्का (सिद्दीक कप्पन) सिर्फ 41 साल के हैं। आपका क्या ख्याल है कि उन्होंने किस उम्र में सिमी की सदस्यता लेकर उसमें काम किया होगा ? आपको समझना होगा कि इक्का एक पत्रकार हैं और अपने कैरियर में उनकी बहुत से लोगों से मुलाकात हुयी होगी। इसी दौर में हो सकता है कि पी0एफ0आई0 के सदस्यों से भी उनकी दोस्ती रही हो। उनके दोस्त आर0एस0एस0, भाजपा, कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों के लोग भी रहे होंगे। इसी प्रकार उनकी दोस्ती पी0एफ0आई0 के सदस्यों के साथ भी रही होगी। ध्यान रहे कि उन्होंने उनके प्रकाशन तेजस में भी काम किया था। तो यह क्यों नहीं कहा जा रहा है कि उनके तार आर0एस0एस0, भाजपा, कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों से भी जुड़े हैं ? सिर्फ पी0एफ0आई0 की बात क्यों की जा रही है ?

प्रवर्तन निदेशालय कह रहा है कि हाथरस की यात्रा के लिये धन पी0एफ0आई0 ने मुहैया कराया था…..।

पहले 100 करोड़ रुपये और एक वेबसाइट बनाने की बात की जा रही थी। अब इस बारे में कोई बात नहीं हो रही है। वे 100 करोड़ रुपये और वेबसाइट कहाँ ग़ायब हो गये ? हाँलाकि इन आरोपों के खिलाफ़ के0यू0डब्ल्यू0जे0 ने पर्याप्त सबूत मुहैया करा दिये हैं। जब उनपर लगाये गये आरोप आधारहीन नज़र आते हैं तो नये आरोप गढ़ दिये जाते हैं। सारे आरोप झूठे हैं। क्या कप्पन के खाते में इस तरह का कोई धन मिला है।

ई0डी0 का आरोप है कि कप्पन और पी0एफ0आई0 कालाधन सफेद करने का धन्धा करते हैं। उसका कहना है कि चूँकि कैम्पस फ्रंट का अपना कोई खाता नहीं है, इसलिये सारा धन रऊफ के खाते से भेजा जाता था, उसे भी अगले दिन गिरफ्तार कर लिया गया था……।

मुझे बताइये कि कप्पन का इससे क्या लेना-देना है ? वे यह तो साबित नहीं कर पाये कि वह पी0एफ0आई0 के सदस्य थे। उन्हें कप्पन के खाते में भी ऐसा कोई धन नहीं मिला। मैं कह नहीं सकती कि उन्हें फँसाने के लिये अब उनके खाते में कुछ धन डाला भी जा सकता है। अब तक तो उनके खाते में अज़ीमुगम् से मिलनेवाली तनख्वाह से ज्यादे कुछ नहीं मिला है। उन लोगों के साथ एक कार में होने के अलावा और उनका कसूर क्या था ? मुझे बताया गया है कि रऊफ एक व्यापारी है। मेरा सवाल है कि क्या इस यात्रा के लिये रऊफ ने कोई धन उपलब्ध कराया था ? इस बात का कोई सबूत क्यों नहीं है ? उनका कहना है कि कप्पन एक पत्रकार नहीं है। क्या उनको जाननेवाला कोई व्यक्ति यह कह सकता है कि वह पत्रकार नहीं हैं ? पिछले 10 सालों से वह दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं। अगर वह पत्रकार नहीं होते तो केरला यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट् के सेक्रेटरी कैसे बन जाते ? उन्होंने अब तक जो कुछ भी लिखा है उसे पढ़ा जा सकता है।

इस दौरे में उनके पास अज़ीमुगम् का दिया हुआ लैपटाॅप था। अब उनका कहना है कि उनके थैले में लैपटाॅप के अलावा तेजस का पहचान-पत्र भी था। वह पहचान-पत्र उस समय का था जब वह तेजस में काम करते थे। अब अज़ीमुगम् ने अपने लिखित बयान में अदालत में कहा है कि कप्पन उनके यहाँ काम करते थे। मुझे यह समझ में नहीं आता कि उनके बारे में क्या-क्या झूठी बातें कही जा रही हैं।

आप जब ‘उनकी’ बात करती हैं तो क्या आपका मतलब उ0प्र0 सरकार से होता है ?

हाँ, उ0प्र0 सरकार ही। सबसे पहले उन्हीं लोगों ने उन्हें गिरफ्तार करके पुलिस हिरासत में डाला। मुझे नहीं पता कि इस साज़िश के पीछे कौन है और यह सब क्यों हो रहा है। अब जब भी उनकी जमानत याचिका सुनवाई के लिये आती है, वे सिद्दीक को जाननेवालों की नयी सूची लेकर आ जाते हैं। क्या एक पत्रकार के सम्बन्ध बहुत सारे लोगों से नहीं होंगे ? क्या कोई पत्रकार सभी दलों के लोगों से बात नहीं करेगा?

क्या आप इस बात से इत्तिफ़ाक़ करती हैं कैम्पस फ्रंट के लोगों के साथ जाना ही कप्पन ही गलती थी ?

सिर्फ उनके साथ जाने से वह पी0एफ0आई0 का सदस्य तो नहीं हो जायेंगे। पत्रकार के रूप में इतने सारे साल गुजारने का क्या बना ? क्या अबतक के उनके काम का कोई मोल नहीं है ? हाथरस का मुद्दा उस समय जीवन्त मुद्दा था, वह सिर्फ उसकी स्टोरी कवर करने जा रहे थे। मैं निश्चित तौर पर जानती हूँ कि अपने बुरे से बुरे सपने में भी उन्होंने नहीं सोचा होगा कि इस सफ़र का यह हश्र होगा और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। अगर उन्हें पता होता कि पुलिस उनको गिरफ्तार कर लेगी, तो आप क्या समझती हैं कि वे उन लोगों के साथ यह सफ़र करते ?

सच यह है कि वे दूसरे पत्रकारों से पता कर रहे थे कि क्या कोई और भी हाथरस जा रहा है, वे वहाँ जाकर एक स्टोरी करना चाहते थे। जब राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को वहाँ जाने से रोक दिया गया था उसके बाद वह वहाँ गये थे। मेरा सवाल है कि सिर्फ सिद्दीक कप्पन को ही क्यों पकड़ा गया ? दूसरे जो पत्रकार वहाँ गये थे उनके बारे में क्या कहना है ? क्या वहाँ कोई गया ही नहीं ? क्या इसके पीछे सिर्फ उनका मुस्लिम नाम होना ही है ? क्या ऐसा इसलिये किया गया कि वह केरल से हैं ? हाँ, उनको (उ0प्र0 सरकार को) एक सफलता मिल गयी। हाथरस में जो कुछ हुआ यह उसकी पूर्णाहुति थी। क्या इस समय कोई उस लड़की या उस घटना की बात कर रहा है ? जिन लोगों ने उस लड़की को यातनायें देकर बड़ी बेरहमी से मार डाला वे आजाद घूम रहे हैं, पर जो वहाँ उनके बारे में कुछ लिखने जा रहा था वह जेल में है। यह कैसा इन्साफ़ है ? उनका सिर्फ एक ही मकसद है कि उनकी जमानत नहीं होनी चाहिये। जब उन्हें लगा कि पी0एफ0आई0 वाला दाँव खाली जा रहा है तो उन्होंने सिमी को घुसा दिया। अब वे इसके तार दिल्ली दंगों से जोड़ रहे हैं।

अपने हलफ़नामे में उ0प्र. सरकार कहती है कि कप्पन, दिल्ली दंगों में शामिल लोगों के लगातार सम्पर्क में रहे…….। इस बारे में आपका क्या कहना है ?

अब मैं क्या कह सकती हूँ ? वे देश में हुये दूसरे सारे दंगों से उन्हें जोड़ सकते हैं। मुझे 4 अक्तूबर को उ0प्र0 में घटी कुछ दूसरी घटनाओं के बारे में भी बताया गया है जिसका दारोमदार उन लोगों के कन्धों पर डाला जा रहा है जो वहाँ 5 अक्तूबर को गये थे। उनकी जमानत याचिका डेढ़ माह के लिये टाल दी गयी है। क्या किसी निर्दोष व्यक्ति को जमानत न देकर उसे जेल में बन्द रखना ठीक है ? क्या इस देश से इन्साफ़ का जनाज़ा उठ गया है ?

जब आपसे नवम्बर में बात हुयी थी उस समय तक आपका उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया था। क्या इसके बाद कोई बात हुयी?
उस समय तो मैं इस बात से मुतमइन नहीं थी कि वे ज़िन्दा भी हैं। डेढ़ महीने से उनका कोई हाल नहीं मिला था। उनसे वकील तक बात नहीं कर पाते थे। अदालत के आदेश पर ही उनसे हफ्ते में एक बार मेरी और वकील की भी बात मुमकिन हो सकी। एक महीने तक हम हफ्ते में एक बार बातें करते रहे, उसके बाद ही उन्हें रोज़ बात करने की मंज़ूरी मिल सकी।
क्या वह परेशान थे?

नहीं, वह परेशान नहीं थे। उनका कहना था कि ‘मैंने कोई गलती नहीं की, तो मुझे किस बात का डर? मैं वहाँ एक स्टोरी कवर करने गया था। मेरी गिरफ्तारी ऊपर के आदेश पर हुयी थी।’ वह हमेशा मुझे मज़बूत रहने के लिये कहते हैं। मैने उनसे पूछा कि क्या पुलिस ने उन्हें प्रताड़ित किया था, तो पहले उन्होंने कहा कि नहीं। लेकिन जब मैंने जोर देकर उनसे पूछा तो आखीर में उन्होंने माना कि पुलिस हिरासत में उन्हें प्रताड़ित किया गया था। 5 और 6 अक्तूबर को जब उन्होंने आरोपों को स्वीकार करने से मना कर दिय था तो उनके साथ बदसलूकी की गयी थी।

उ0प्र0 सरकार ने अदालत में कहा था कि सवालों का जवाब देने में कप्पन ने सहयोग नहीं दिया…….।

हाँ, वे चाहते थे कि जो भी झूठ वे बोलें उन्हें फौरन कबूल कर लिया जाय। जब उन्होंने पूछा कि क्या तुम एक आतंकवादी हो तो उनसे उम्मीद थी कि वह कहेंगे, हाँ, मैं एक आतंकवादी हूँ। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका सम्बन्ध पी0एफ0आई0 से है तो उन्हें कहना चाहिये था कि हाँ, ऐसा है। जब उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें 100 करोड़ रुपये मिले थे तो उन्हें कहना चाहिये था कि हाँ, मुझे 100 करोड़ रुपये मिले थे। उन्होंने इन समस्त आरोपों के जवाब में ‘हाँ’ नहीं कहा, यही उनका असहयोग था। उन्हें यह सब इसीलिये झेलना पड़ा क्योंकि वह केरल से थे।

ऐसा क्यों ?

उनके साथ गिरफ्तार हुये तीन दूसरे लोगों को कोई यातना नहीं दी गयी। केवल केरल के सिद्दीक कप्पन के साथ बदसलूकी की गयी। मुझे नहीं पता क्यों। क्या उन्हें केरलियों से इतनी ज्यादे नफ़रत है? उ0प्र0 पुलिस ने उनसे इस तरह के सवाल किये थे- ‘क्या तुम्हें केरल में कोई बलात्कार का मामला नहीं मिला था, स्टोरी करने के लिये? ऐसा क्यों है कि केरल के एक मुसलमान के दिल में उ0प्र0 की एक दलित महिला के लिये इतनी हमदर्दी है? राहुल गाँधी तुम्हारी पत्नी से मिलने क्यों गये थे?’
राहुल गाँधी जब मलप्पुरम् गये थे तो आपने उनसे मुलाकात की थी। क्या ऐसा एक याचिका दाखिल करने के लिये किया गया था?
मैं मदद माँगने के लिये वायनाड गयी थी। वह मेरे घर कभी नहीं आये। उसके बाद दुबारा मैं उनसे मल्लपुरम् में मिली। उन्होंने कहा था कि वह मेरी याचिका प्रियंका गाँधी तक पहुँचा देंगे। उन्होंने मदद करने का वादा तो किया था, पर वास्तव में कुछ किया नहीं। केरल के मुख्यमंत्री ने भी कुछ नहीं किया।

क्या कप्पन को उनकी मधुमेह की दवा नियमित तौर पर मिल रही है ? उनके मधुमेह को लेकर आप बहुत परेशान थीं।

उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सब ठीक है। उन्हें दिन में दो बार खाना दिया जा रहा है, उनका शूगर लेवेल नार्मल है। उन्हें दवायें भी मिल रही हैं। लेकिन जबसे उनपर सिमी के सम्पर्क में होने का आरोप लगाया गया, तबसे उन्होंने मुझसे बात नहीं की है। पिछले शुक्रवार को जब उनसे बात हुयी थी तो उन्होंने अगले दिन बात करने को कहा था, पर मुझे अभी तक उनका फोन नहीं आया। अब मुझे चिन्ता हो रही है।

यह अब आपकी लड़ाई बन चुकी है……।

मैं उनके लिये लड़ रही हूँ क्योंकि मैं जानती हूँ कि वह निर्दोष हैं। और जो भी पत्रकार उनके साथ खड़े हैं वे भी जानते हैं कि वह किस तरह के व्यक्ति हैं ? मैं इसलिये लड़ रही हूँ कि उनकी 90 साल बूढ़ी माँ हैं जो लगातार अपने बेटे के लिये बिलख रही हैं। मैं उनके तीन बच्चों के लिये लड़ रही हूँ। हम एक मामूली परिवार से हैं, हम लोग आतंकी नहीं हैं। आप कभी हमारे यहाँ आकर देखिये कि हम अपने पड़ोसी हिन्दुओं के साथ किस तरह मिलजुल कर रहते हैं। सबरीमला के दौर में जब महिलायें अपना खाना नहीं बना पा रही थीं तब हम लोग अपने घर से उन्हें खाना भेजते थे। पड़ोसियों से हमारे सम्बन्ध ऐसे ही हैं। और वे हमें मज़हबी-कट्टरपंथी कहते हैं।

आपको लड़ने का साहस कहाँ से मिलता है ?

क्या वह मेरे पति नहीं हैं ? उनके लिये मेरे अलावा और कौन लड़ेगा ? उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है, इसलिये मुझे इन्साफ मिलने का पूरा भरोसा है। पर अगर सारे पत्रकार एक होकर उनकी रिहाई के लिये नहीं लड़ेंगे, तो मुझे लगता है कि वे लोग उन्हें आतंकवादी बनाकर वहीं रखेंगे। अब मामला चूँकि लम्बा खिंच रहा है, इसलिये मेरा डर बढ़ता जा रहा है। मुझे एक हफ़्ते से उनकी कोई ख़बर नहीं मिली है और अब मैं ज्यादे डरी हुयी हूँ। तब से मैं लगातार रोये जा रही हूँ और कभी-कभी तो मुझे लगता है कि मेरा दिल फट जायेगा और मैं मर जाऊँगी।

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