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यूपीएसएसएफ का गठन लोकतंत्र व न्याय व्यवस्था पर कुठाराघात, अधिसूचना फौरन रद्द हो: माले

लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की राज्य इकाई ने योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के गठन की कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने इस बल को दी गई शक्तियों को लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर कुठाराघात बताते हुए इसके गठन की अधिसूचना को अविलंब निरस्त करने की मांग की है।

सोमवार को यहां जारी बयान में भाकपा (माले) ने कहा कि इस बल का गठन विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक के बजाय कैबिनेट बाइसर्कुलेशन से किया गया है। इस बल को असीमित शक्तियां दी गई हैं। जैसे कि बिना वारंट के गिरफ्तारी व घर की तलाशी का अधिकार, बल के सदस्यों द्वारा नियम विरुद्ध या ज्यादती करने पर भी सरकार की बिना इजाजत के हाई कोर्ट को भी सुनवाई से वंचित करने का प्रावधान आदि।

माले ने कहा कि कहने को तो इस बल के गठन का उद्देश्य सरकारी इमारतों व प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना बताया गया है, पर यह हाथी के दांत दिखाने के हैं। इसका इस्तेमाल कुख्यात अफ्स्पा (सशत्र बल विशेष अधिकार अधिनियम) की तर्ज पर लोकतंत्र के पक्ष में आवाज उठाने वालों, सरकार की आलोचना करने वालों और आंदोलनकारियों का मुंह बंद करने के लिए किया जाएगा।

पार्टी ने कहा कि योगी सरकार एक-के-बाद-एक काले अधिनियम बना रही है। कुछ ही समय पूर्व उसने सीएए-विरोधी आंदोलन को दबाने की मंशा से आंदोलनकारियों से क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए एक अधिनियम बनाया, जिसमें स्थापित न्याय प्रक्रिया व प्राकृतिक न्याय व्यवस्था की अवहेलना की गई। उससे आगे बढ़कर अब यूपीएसएसएफ अधिनियम लाया गया है।

माले ने कहा कि योगी सरकार दिन प्रतिदिन तानाशाह होती जा रही है। कठिन संघर्षों से हासिल नागरिक अधिकारों को छीनकर वह अंग्रेजों वाली गुलामी लादना चाहती है। पहले ही यह सरकार यूपी में एनकॉउंटर राज, पुलिस राज व जंगल राज होने के तमगे जनता से हासिल कर चुकी है। अब अनियंत्रित अधिकारों के साथ इस विशेष बल का गठन लोकतांत्रिक व्यवस्था का चीर हरण कर निरंकुशता की ओर ले जाएगा। संवैधानिक लोकतंत्र में इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है।

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