पटना (बिहार)। ” मैं मीडिया” के पत्रकारों पर विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) की रिपोर्टिंग के दौरान बिहार के किशनगंज में भीड़ द्वारा हमला करने की घटना की निंदा करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, लेखकों-कलाकारों ने साझा वक्तव्य जारी करते हुए दोषियों पर कारवाई की मांग की है।
साझा बयान में कहा गया है कि ” मैं मीडिया” के पत्रकारों पर, विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) में बंग्लादेशी हिन्दू परिवार की रिपोर्टिंग करने पर बिहार के किशनगंज में भीड़ द्वारा हमला करने की कोशिश की हम लोग निंदा करते है। इस घटना के दोषियों, इस तरह को भीड़ को उकसाने वाले नेताओं पर कठोर कार्रवाई की मांग करते हैं। हमारी सहानुभूति और एकजुटता “मैं मीडिया” और उसके पत्रकार तंजील आसिफ और शाह फैसल के साथ है। हम उनकी सुरक्षा की मांग करते हैं। हमलोग एसआईआर (SIR) को चुनावी लाभ के लिए किसी भी प्रकार के ध्रुवीकरण के खिलाफ हैं। “
कुछ मीडिया चैनलों पर किशनगंज से जुड़ी एक खबर चलाई गई थी, जिसमें कई लोगों ने बताया कि चुनाव आयोग ने डॉक्यूमेंट में गड़बड़ी को लेकर उन्हें नोटिस भेजा है। इसमें कुछ नेपाल की महिलाएं थीं जिनकी शादी भारत में हुई है और कुछ ऐसे लोग जिनके पिता बांग्लादेश से यहां आये थे। इनमें सभी हिन्दू हैं। इस खबर की तहकीकात करने सीमांचल के प्रतिष्ठित मीडिया चैनल ‘मैं मीडिया’ के तनज़ील आसिफ और शाह फैसल ने 31 अगस्त की दोपहर जिले के बेसरबाटी के बुटीझारी गाँव गए।
बुटीझारी चौक पर रुक कर दोनों पत्रकारों ने उन लोगों की जानकारी ली। गाँव वालों की ही मदद से वे वहां पहुंचे। वहां उनकी मुलाक़ात दुलाल सिंह से परिवार से हुई। परिवार ने बताया दुलाल पश्चिम बंगाल में काम करते हैं इसलिए घर पर नहीं हैं, उसके बाद उन्होंने आँगन में कुर्सी निकाल कर बैठने को कहा। बातचीत में दुलाल सिंह की पत्नी ने दोनों को सारी जानकारी दी, कि उनके ससुर बांग्लादेश से आये थे और दुलाल की पैदाइश यहीं हुई है। लेकिन थोड़ी ही देर के बाद भीड़ वहां धमक पड़ी। भीड़ ने दोनों पत्रकारों का नाम पूछा, आई कार्ड देखा मगर अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। इनमें से एक व्यक्ति के टी-शर्ट में भाजपा का चुनाव चिन्ह लगा था। भीड़ ने दोनों पत्रकारों को डराया-धमकाया, गालियां दी और ठाकुरगंज के पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल को फ़ोन किया। गोपाल इस इलाके में घुसपैठ का मामला उठाते रहते हैं और यहाँ के मुसलमानों को लेकर उल्टे सीधे बयान देते रहते हैं। गोपाल ने कुछ दिन पहले ही वापस जदयू ज्वाइन किया है।
भीड़ का कहना था कि बांग्लादेशी के बारे में अगर रिपोर्टिंग करनी है तो किसी मुस्लिम के घर जाओ, हिन्दुओं के घर क्यों आये हो।भीड़ में शामिल लोगों ने उनकी सारी रिकॉर्डिंग ज़बरदस्ती डिलीट करवा दी। उन्हें धमकाया। मारने का वातावरण बनाया। पत्रकारों को लगने लगा कि कही उनको भीड़ द्वारा लिंच न कर दिया जाए। कुछ लोग दोनों पत्रकारों को किसी तरह वहाँ से निकाला।
तनज़ील और फैसल का कहना है कि ‘मैं मीडिया’ के खिलाफ इनका ये गुस्सा एक दिन का नहीं है। वे लगातार इनके प्रोपगेंडा को ग्राउंड रिपोर्टिंग और फैक्ट चेक से काउंटर करते रहे हैं
साझा बयान पर तुषार गांधी (महात्मा गांधी के प्रपौत्र व लेखक), मेधा पाटकर ( नर्मदा बचाओ आंदोलन व जन आंदोलनो का राष्ट्रीय समन्वय), डॉ सुनीलम ( किसान नेता संयुक्त किसान मोर्चा), महेन्द्र यादव (कोशी नव निर्माण मंच), उदय (राष्ट्र सेवा दल ), पुष्यमित्र (पत्रकार), अनीश अंकुर (स्वतंत्र पत्रकार और लेखक), प्रो अजीत झा ( अवकाश प्राप्त प्रोफेसर दिल्ली विवि व अध्यक्ष भारत जोड़ो अभियान) , सरफराज ( प्रदेश महासचिव, पीयूसीएल), पुष्पराज (लेखक व पत्रकार), मनोज कुमार सिंह (पत्रकार व महासचिव जन संस्कृति मंच), गौतम कुमार (गंगा मुक्ति आंदोलन), योगेन्द्र सहनी ( जल श्रमिक संघ), दीपक ढोलकिया ( अवकाश प्राप्त आकाशवाणी के पत्रकार और पूर्व राष्ट्रीय संयोजक भारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता मंच), जक्की अनवर ( अध्यक्ष, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट), नवनीत (पत्रकार), मणिलाल ( एडवोकेट पटना हाईकोर्ट और संयोजक बिहार जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी), सुनीता त्रिपाठी ( पत्रकार), राहुल कुमार सिंह (पत्रकार), अरविंद गिरी (एडवोकेट), सतेन्द्र सिन्हा ( सामाजिक कार्यकर्ता), फैसल बाबर (राज्य महासचिव, बिहार यूथ आर्गनाइजेशन), प्रीति ( पत्रकार), आनंद एस.टी. दास ( पत्रकार), डॉ प्रकाश लुईस ( सामाजिक कार्यकर्ता), जुंबिश (पत्रकार), अभिषेक आनंद एडवोकेट, नीतू सिंह, स्वतंत्र पत्रकार (शेड्स ऑफ रुरल इंडिया).
मंथन ( सह संयोजक, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान), प्रो अखिलेश कुमार, लक्ष्मी कांत (पत्रकार), आशीष रंजन ( जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय ( NAPM), अरविंद मूर्ति (राष्ट्रीय संयोजक, भारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता मंच), अमरनाथ झा (पत्रकार), नीलांशु रंजन (पत्रकार व लेखक), कुमारेश ( अधिवक्ता पटना हाईकोर्ट), प्रशांत कुमार (पत्रकार, मधेपुरा), मनीष चन्द्र मिश्रा (पत्रकार), वेद प्रकाश (पत्रकार), अमलेंदु ( पत्रकार), सत्येन शरण ( वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता), बिमल कुमार (पत्रकार बक्सर), महेंद्र नाथ मिश्र (संपादक, जन चौक), उमेश राय ( पत्रकार) ने हस्ताक्षर किया है।

