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सरकार पर है लॉकडाउन के बाद पैदल ही घर को निकले प्रवासी मजदूरों की मौत का जिम्मा

लॉकडाउन के बाद मुंबई और तेलंगाना जैसे सुदूर के शहर से अपने घर परिवार के लिए पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल नापने सड़कों पर उतरे मजदूरों को सरकार और दमनकारी व्यवस्था की तरह सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों ने कुचलना शुरु कर दिया है।

मुंबई, विरार में टेंपो ने 7 मजदूरों को कुचला

शनिवार की सुबह मुंबई से सटे विरार में मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर एक तेज गति से आई आयरिश टेंपो ने 7 मजदूरों को कुचल दिया। इसमें 4 मजदूरों की मौत हो गई जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस टेंपों में चिकित्सा से संबंधित सामान लदे हुए थे। सभी 7 मजदूर पैदल ही अपने घरों की ओर जा रहे थे। तभी  भारोल गांव के पास  तेजी से आ रहे आयरस टेंपो ने उन्हें कुचल दिया।

पालघर के एस पी गौरव सिंह के मुताबिक टेंपो चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसमें  मेडिकल से जुड़ा समान भरा हुआ था।

मुंबई और गुजरात में अभी भी यूपी-बिहार के लाखों प्रवासी मजदूर फँसे हुए हैं जबकि हजारों मजदूर सड़कों पर कदम दर कदम घर वापसी का रास्ता नाप रहे हैं।

तेलंगाना में सड़क दुर्घटना में कर्नाटक के सात मजदूरों की मौत

27 मार्च को देर रात तेलंगाना शहर के बाहरी क्षेत्र में पेड्डा गोलकोंडा के पास एक वैन को ट्रक ने टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में वैन में सवार कर्नाटक के सात मजदूरों की मौत हो गई जबकि चार लोग घायल हो गए। मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल हैं।

सहायक आयुक्त (यातायात) विश्व प्रसाद के मुताबिक वैन में सवार 31 मजदूरों में से पांच की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि दो मजदूरों की इलाज के दौरान हो गई। जबकि चार मजदूर अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर बनी हुई है।

वाहन में सवार अन्य लोगों को हल्की चोटें आईं हैं। सहायक आयुक्त विश्व प्रसाद ने बताया कि ये सभी मजदूर यहां सूर्यपेट इलाके में सड़क निर्माण के कार्य में लगे थे और कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण काम बंद होने के बाद कर्नाटक में अपने गृह जिले रायचुर लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि गुजरात जा रहा आम से लदा ट्रक बेहद तेज गति में था।

पैदल चलने के चलते मजदूर की मौत

रणविजय दिल्ली से मुरैना के लिए पैदल ही निकला था। उसे उम्मीद थी कि वो पुलिस और कोरोना से बचते बचाते एक न एक दिन घर पहुँच ही जाएगा। लेकिन उसकी यात्रा आगरा पहुँचकर सदा सदा के लिए खत्म हो गई। अब घर वो नहीं उसकी लाश पहुँचेगी।

39 वर्षीय रणविजय सिंह राष्ट्रीय राजधानी में एक निजी रेस्तरां के लिए होम डिलीवरी बॉय के रूप में काम किया था. रणविजय के तीन बच्चे हैं. वह दिल्ली से में मध्य प्रदेश के मुरैना जिले स्थित अपने गांव के लिए निकले लेकिन के रास्ते में लगभग 200 किलोमीटर पैदल चलने के बाद आगरा में उनकी मौत हो गयी.
रणवीर सिंह अंबा पुलिस क्षेत्राधिकार, मुरैना जिले, मध्य प्रदेश के बडफरा गाँव का निवासी था और पैदल घर जा रहा था.

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित रणविजय राष्ट्रीय राजमार्ग -2 के कैलाश मोड़ के पास गिर गए उन्हें सीने में तेज दर्द हो रहा था. एक स्थानीय हार्डवेयर स्टोर के मालिक संजय गुप्ता पीड़ित के पास दौड़कर गया. उन्होंने पीड़ित को एक कालीन पर लेटाया और चाय और बिस्किट दिया. पीड़ित ने सीने में दर्द की शिकायत की और अपने जीजा अरविंद सिंह को फोन पर अपनी स्वास्थ्य स्थिति को साझा करने के लिए कहा. शाम करीब 6.30 बजे, पीड़ित ने दम तोड़ दिया.

रणविजय की मौत का जिम्मेदार कौन है ?

इन सभी 10 मजदूरों की मौत लॉकडाउन के चलते हुई है। इनकी गिनती कोविड-19 संक्रमण से होने वाली मौत में नहीं गिना जाएगा। लॉकडाउन के बाद पैदल घर जाते मारे गए इन मजदूरों की मौतों का आँकड़ा कहीं नहीं दर्ज होगा। न ही इन्हों मुआवजा दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री और सरकार ने आखिर इन प्रवासी मजदूरों के सकुशल घर वापसी के बारे में एक बार क्यों नहीं विचार किया। क्यों इन मजदूरों को भूखे और सड़कों पर गाड़ियों से कुचल कर मारे जाने के लिए छोड़ दिया गया। लॉकडाउन के चलते भूखे प्यासे पुलिस की लाठियाँ खाते पैदल यात्रा करते समय गाड़ियों से कुचलकर मारे गए इन मजदूरों की हत्या सरकार के सिर है।

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