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आरक्षण विरोधी फैसलों के विरुद्ध भाकपा माले का अखिल भारतीय प्रतिरोध कार्यक्रमों का आह्वान

नर्इ दिल्ली. आरक्षण विरोधी फैसलों के विरुद्ध भाकपा माले ने पूरे देश में प्रतिरोध कार्यक्रमों का आह्वान किया है. पार्टी ने संविधान आैर एस.सी./एस.टी./आेबीसी आरक्षण को कमजोर करने वाले 13-पाॅइण्ट रोस्टर प्रणाली आैर 10 प्रतिशत सामान्य श्रेणी के आरक्षण जैसे सभी निर्णयों को वापस लेने की मांग करते हुए 200 पाॅइण्ट रोस्टर को पुर्नबहाल करने के लिए कानून बनाने की मांग की है.

भाकपा माले की केन्द्रीय कमेटी की ओर से प्रभात कुमार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि शिक्षा आैर रोजगार के क्षेत्रों में एस.सी./एस.टी./आेबीसी आरक्षण को समाप्त करने की कोशिशें चल रही हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में इलाहाबाद हार्इ कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है जिसमें एस.सी./एस.टी./आेबीसी उम्मीदवारों को लिये तय सीटों की गणना करने के लिए काॅलेज या विश्वविद्यालय की कुल रिक्त सीटों को आधार बनाने की जगह विभाग के रिक्त पदों को आधार बनाया गया है। इस प्रकार की व्यवस्था (जिसे 13-पाॅइण्ट रोस्टर व्यवस्था कहा गया है, पहले यह 200 पाॅइण्ट रोस्टर व्यवस्था थी) उच्च शिक्षा संस्थानों में रिक्त अध्यापकीय पदों में आरक्षण को निस्प्रभावी बनाने की गारंटी है।

पहले वाले 200-पाॅइण्ट रोस्टर में समूचे काॅलेज/विश्ववि़द्यालय में कुल रिक्त पदों को आधार बनाया गया था, जिस कारण एक विभाग में आरक्षित पदों के न होने पर भी दूसरे विभाग द्वारा उस कमी को पूरा किया जा सकता था। लेकिन अब 13-पाॅइण्ट रोस्टर आने के बाद किसी भी एक विभाग में कम से कम 14 नियुक्तियां होने पर ही एक आरक्षित पद भरा जा सकता है जिस कारण आरक्षित पदों पर वास्तविक नियुक्तियों की संख्या संविधान द्वारा तय 49.5 प्रतिशत से काफी कम हो जायेगी। यह कैसा मजाक है कि छोटे विभागों में जहां कुल पदों की संख्या ही 14 से कम होगी, वहां आरक्षित कैटेगरी का एक भी उम्मीदवार नहीं लिया जायेगा।

पहले से ही आरक्षित पद भारी संख्या में खाली पडे हैं। कुल मिला कर कहा जाय तो उच्च शिक्षा का क्षेत्र वंचित आैर दमित पृष्ठभूमि के छात्रों के लिये आैर दूर हो जायेगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला जब से आया है, पूरे देश का अध्यापक समुदाय मोदी सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय से मांग कर रहा है कि 200-पाॅइण्ट रोस्टर प्रणाली को बनाने के लिए तुरंत कानून बनाया जाये। लेकिन मोदी सरकार एेसा नहीं करना चाहती। अब सर्वोच्च् न्यायालय के इस निर्णय के बाद यह बेहद जरूरी हो गया है कि मोदी सरकार तत्काल 200-पाॅइण्ट रोस्टर प्रणाली को बचाने के लिए एक अध्यादेश लाये।

एक आेर एस.सी./एस.टी./आेबीसी के आरक्षण के अधिकार को कमजोर बनाने की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी आेर सामान्य कैटेगरी के गरीब उम्मीदवारों को 10 प्रतिशत आरक्षण का विधान बनाया गया है, जोकि संविधान के मूल उद्देश्यों के खिलाफ है। संविधान का उद्देश्य आरक्षण के माध्यम से सामाजिक भेदभाव को दूर करना है।

भाकपा माले इन आरक्षण विरोधी कदमों के विरुद्घ निम्नलिखित मांगों के साथ अखिल भारतीय प्रतिरोध कार्यक्रमों का आहवान करती है।

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